एलोवेरा की खेती का पूरा गणित समझिए, ज्यादा मुनाफे के लिए पत्तियां नहीं पल्प बेचें, देखें वीडियो

पिछले कुछ वर्षों में एलोवेरा की मांग तेजी से बढ़ी है। कई कंपनियां इसके प्रोडक्ट बना रही हैं। बड़े पैमाने पर इसकी खेती भी हो रही है। लेकिन किसानों के सामने समस्या मार्केट की है। आखिर किसान अपनी फसल बेचे कहां ? दर्जनों किसान कई जालसाज कंपनियों के शिकार हो चुके हैं। इसलिए गांव कनेक्शन आपको इसकी खेती और कारोबार का गणित

" एलोवेरा की खेती से किसान ने साल भर में कमाए करोड़ों रुपए… एलोवेरा (घृत कुमारी) की खेती मतलब कमाई पक्की। एलोवेरा के पौधों से किसान ने इतने कमाएं, पौधा यहां ले.. एलोवेरा की बिक्री के लिए संपर्क करें.. " ऐसी ख़बरें अक्सर सोशल साइट्स और व्हॉट्सऐप ग्रुप पर वायरल होती रहती हैं। ऐसा नहीं है कि एलोवेरा से किसान कमाई नहीं कर रहे हैं लेकिन इस खेती के लिए कुछ जानकारियां होना जरूरी हैं, वर्ना फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। सही भूमि का चयन, पानी और नमी वाली जगह ये बातें आपको एलोवेरा की खेती के दौरान ध्यान में रखनी होंगी।

गांव कनेक्शन जब एलोवेरा से संबंधित कोई ख़बर प्रकाशित करता है सैकड़ों किसान फोन और मैसेज कर उस बारे में जानकारी मांगते हैं, क्योंकि लोगों तक सही जानकारी नहीं पहुंच पाती है। पिछले कुछ वर्षों में एलोवेरा के प्रोडक्ट की संख्या तेजी से बढ़ी है। कॉस्मेटिक, ब्यूटी प्रोडक्ट्स से लेकर खाने-पीने के हर्बल प्रोडक्ट और अब तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री में इसकी मांग बढ़ी है।

देेखिए एलोवेरा प्रोसेसिंग ट्रेनिंग का पूरा वीडियो ऊपर देखिए

केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में प्रमुख वैज्ञानिक सुदीप टंडन ने गांव कनेक्शन को बताया, एलोवेरा जिसे घृत कुमारी कहा जाता है इसके बहुत फायदे हैं। जिस तरह से एलोवेरा की मांग बढ़ती जा रही है ये किसानों के लिए बहुत फायदे का सौदा है। इसकी खेती कर और इसके प्रोडक्ट बनाकर दोनों तरह से अच्छी कमाई की जा सकती है। लेकिन इसके लिए थोड़ी सवाधानियां बरतनी होंगी। किसानों को चाहिए कि वो कंपनियों से कंट्रैक्ट कर खेती करें और कोशिश करें की पत्तियों की जगह इसका पल्प बेंचे।'

बरसात और ठंड के मौसम में एलोवेरा के खेती में ज़्यादा पानी के आवश्यकता नहीं होती। अगर मौसम गर्मी का है तो पंद्रह दिन में एक बार पानी जरूर दें। एलोवेरा की 1 एकड़ खेती से आसानी से 5 से 7 लाख रुपए कमाए जा सकते हैं। अभी बाबा रामदेव की पतंजलि सहित कई कंपनियां एलोवेरा खरीद रही हैं। एलोवेरा पर अभी तक किसी ख़ास रोग का प्रभाव सामने नहीं आया है।

एलोवेरा का पौधा।

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सुदीप टंडन ने न सिर्फ इसकी पूरी प्रक्रिया गांव कनेक्शन के साथ साझा की बल्कि ऐसे किसानों से भी मिलवाया जो इसकी खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं। करीब 25 वर्षों से गुजरात के राजकोट में एलोवेरा और दूसरी औषधीय फसलों की खेती कर रहे हरसुख भाई पटेल (60 वर्ष ) बताते हैं, " एलोवेरा की एक एकड़ खेती से आसानी से 5- 7 लाख रुपए कमाए जा सकते हैं। वर्ष 2002 में गुजरात में इसकी बड़े पैमाने पर खेती हुई लेकिन खरीदार नहीं मिले। इसके बाद मैंने रिलायंस कंपनी से करार किया। "

एलोवेरा को वैज्ञानिक करिश्माई पौधा बताते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है। गूगल के सर्च में एलोवेरा का बाजार भाव, एलोवेरा की कीमत, घृतकुमारी के फायदे जैसे शब्द लगातार ट्रेंड करते रहते हैं।

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इंजीनियरिंग के बाद कई वर्षों तक आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनी में काम कर चुकीं बेंगलुरु की रहने वाली आंचल जिंदल ने गांव कनेकशन से बात करते हुए बताया ऐलोवेरा जादुई पौधा है। इसके कारोबार में बहुत संभावनाएं हैं, क्योंकि आजकल हर चीज़ में इसका उपयोग हो रहा है। अब मैं यूपी के बरेली में शिफ्ट हो गई हूं, मैंने एलोवेरा का मार्केट भी सर्च किया है और कोशिश कर रही हूं कि एलोवेरा का उद्योग लगाऊं। " जिसमें पल्प और जूस निकाला जाएगा।

सीमैप में एलोवेरा की तैयार होती पौध। फोटो- शुभम कौल

आंचल की तरह ही महाराष्ट्र के विदर्भ के रहने वाले आदर्श पाल अंतरिक्ष विज्ञान में पढ़ाई कर चुके हैं लेकिन आजकल वो खेती में फायदे का सौदा देख रहे हैं। वो बताते हैं, पैर जमीन पर होने चाहिए, मेरे पास खेती नहीं है इसलिए किसानों के साथ कांट्रैक्ट फार्मिंग (समझौता पर खेत लेकर खेती) करता हूं। पंतजलि के प्रोडक्ट की लोकप्रियता के बाद संभावनाएं अब और बढ़ गई हैं।

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सीमैप में दी जाती है ट्रेनिंग

अगर आप एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहते हैं तो केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) कुछ-कुछ महीनों पर ट्रेनिंग करता है। इसका रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होता है और निर्धारित फीस के बाद ये ट्रेनिंग ली जा सकती है। (ऊपर वीडियो देखिए)

इंजीनियरिंग और एमबीए करने वाला युवा नौकरी की बजाए कर रहे खेती, लगा रहे यूनिट

ग्रेटर नोएडा में गलगोटिया इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर मदन कुमार शर्मा (35 वर्ष) ने पतंजलि से करार कर 4 एकड़ खेत में अपने गांव में (अलीगढ़ जिला) एलोवरा का प्लांटेशन कराया है। वो अब प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहते हैं। मदन बताते हैं, अभी तक मेरे घर में धान, गेहूं, आलू की फसलें उगाई जाती थीं, मुझे लगा कुछ नया और ज्यादा मुनाफे वाला करना चाहिए तो राजस्थान से पौध मंगाकर मैंने ये एलोवेरा की खेती शुरू की।

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ऐसी ही एक युवा आंचल के पास खेत तो नहीं है लेकिन वो इंडस्ट्री लगाना चाहती हैं, देश में अब लोगों का रुझान खेती की तरफ बढ़ रहा है, प्रधानमंत्री भी खेती पर जोर दे रहे हैं, अब हमें भी इस पर कुछ करना चाहिए।" वो कहती हैं। एलोवेरा का बाजार भाव और कीमत सीधे मांग पर निर्भर करती है। लेकिन जानकार किसी कंपनी से एग्रीमेंट के बाद ही खेती करने की सलाह देते हैं।

एलोवेरा की खेती की बड़ी बातें

  • हेल्थकेयर, कॉस्मेटिक और टेक्सटाइल में भी एलोवेरा का इस्तेमाल
  • हर्बल दवा बनाने वाली कंपनियों में होता है सबसे ज्यादा इस्तेमाल
  • कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर खेती करना किसानों के लिए फायदेमंद
  • पतंजलि, डाबर, बैद्यनाथ, रिलायंस कई बड़ी कंपनियां हैं बड़ी ग्राहक
  • किसानों से सीधे भी पल्प और पत्तियां खरीदती हैं कंपनियां
  • पल्प निकालने या सीधे प्रोडक्ट बनाने की लगा सकते हैं प्रोसेसिंग यूनिट
  • पल्प निकालकर बेचने पर 4 से 5 गुना ज्यादा मुनाफा होता है
  • देश के कई राज्यों में हो रही है एलोवेरा की खेती
  • एलोवेरा की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए सीमैप में दी जाती है ट्रेनिंग
  • अपने जिले में FCCI से लाइसेंस लेकर शुरु कर सकते हैं अपना रोजगार
  • सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान भी देता है ट्रेनिंग
  • एक एकड़ में करीब 16 हजार पौधे लगते हैं। (जानकारों के मुताबिक)
  • एलोवेरा के जूस की मांग बढ़ने से घृत कुमारी का जूस निकालने की छोटी मशीनें डिमांड में हैं।

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कुुछ इस तरह के होतेे हैं एलोवेरा के पौधे.

एलोवेरा : ये बरतें सावधानियां

  • शुरुआत में कंपनियों से समझौता (कॉन्ट्रैक्ट) कर ही करें खेती
  • 8 से 18 महीने में पहली कटाई करने की सलाह देते हैं जानकार
  • एलोवेरा की कटी पत्तियों को 4-5 घंटे में प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचना जरूरी
  • कभी न लगाएं कटाई के बाद एलोवेरा की पत्तियों का ढेर
  • जलभराव वाले इलाकों में न करें खेती

वीडियो- शुभम कौल, कैमरा, शुभम और बसंत कुमार

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