राजस्थान में कर्ज़माफी : जानिए किन किसानों को मिलेगा फायदा, और किन्हें हाथ लगेगी मायूसी ?

राजस्थान में 31 मई से आखिरकार किसानों के बीच कर्जमाफी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। लेकिन कर्ज़माफी में शामिल नियम और शर्तों को लेकर किसान नाखुश हैं।

राजस्थान में कर्ज़माफी : जानिए किन किसानों को मिलेगा फायदा, और किन्हें हाथ लगेगी मायूसी ?

जयपुर/लखनऊ। चुनावी साल में वसुंधरा राजे ने अपना ब्रह्मास्त्र चला दिया है। राजस्थान में 31 मई से आखिरकार किसानों के बीच कर्जमाफी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। लेकिन कर्ज़माफी में शामिल नियम और शर्तों को लेकर किसान नाखुश हैं। बड़े कास्तकार इसे गुमराह करने वाला बता रहे हैं।

राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार किसानों का 50-50 हजार रुपए तक कर्ज माफ करने की प्रक्रिया शुरू करने वाली है। वसुंधरा सरकार ने पिछले वर्ष सीकर और बीकानेर समेत कई इलाकों में जोरदार किसान आंदोलनों के बाद हुए समझौते में कर्जमाफी की बात कही थी, जिसे बजट 2018-19 में शामिल किया था।
बजट भाषण में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने लघु और सीमांत किसानों को एक मुश्त 50 हजार रुपए तक के फसली ऋण को माफ करने की बात की थी, लेकिन अब नियमों में बड़े बदलाव कर दिए गए हैं। अब कर्ज़माफी सिर्फ सहकारी बैंकों से लोन वाले किसानों की होगी।

सहकारिता विभाग के नए फैसले के तहत वर्तमान व पूर्व सांसद एवं विधायक, आयकरदाता कृषक, राज्य व केन्द्र सरकार के वेतनभोगी अधिकारी व कर्मचारी, राज्य व भारत सरकार के नियमित पेंशनधारक सेवानिवृत्त अधिकारी व कर्मचारी को फसल ऋण माफी योजना से बाहर रखा गया है।

सहकारिता विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर पीटीआई—भाषा को बताया कि यह सरकार का नीतिगत मामला है, जिसके तहत नई श्रेणियों को कर्ज़ माफी से बाहर रखा गया है। उन्होंने बताया कि किसानों के कर्ज माफी की योजना से नई श्रेणियों को बाहर रखने से पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को आंका नहीं किया गया है।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि किसानों की कर्ज़ माफी का मामला शुरुआत से ही झूठ का पुलिंदा लग रहा है। इससे पूर्व सहकारी बैंकों से लिये गये लोन की माफी के लिये घोषणा की गई थी, जबकि किसानों ने 80 प्रतिशत लोन अन्य बैंकों से लिये हैं।
पायलट ने एजेंसी को बताया कि साल 2014 में राज्य का राजकोषीय घाटा 1.2 लाख करोड़ रुपए था और वर्तमान में यह 2.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जानती हैं कि उनकी राज्य में अब सरकार नहीं बनेगी और इसलिये वह किसानों से किये गए वादों को पूरा करने के लिये लोन लेकर राजकोष पर बोझ बढा रही हैं।
29 लाख किसानों की कर्ज माफी से राजकोष पर लगभग 8 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ने की संभावना है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 31 मई को बांसवाडा जिले में आयोजित शिविर में 1.94 लाख किसानों को 250 करोड़ रुपए के कर्ज माफी का प्रमाण पत्र वितरित करेंगी।
लेकिन इस प्रक्रिया से प्रदेश के कई किसान नाखुश हैं। बीकानेर जिले के रामसर के रहने वाले 7 हेक्टेयर खेती के मालिक किसान और किसान प्रतिनिधि भरतराम कस्वां पर 8 लाख 90 हजार का कर्जा है, लेकिन उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
भरत गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "किसानों के लिए राहत नहीं, ये झुनझुना और खानापूर्ति है। सरकार ने कर्जमाफी के इतने नियम बना दिए हैं कि इसका हजारों किसानों को फायदा ही नहीं मिलेगा।" आगे कहा, "सीकर आंदोलन के बाद सरकार ने सभी किसानों का 50-50 हजार कर्जा माफ करने की बात की थी, लेकिन अब लघु सीमांत की नई परिभाषा दे दी है। ज्यादातर किसान कर्ज कॉमर्शियल बैंकों (एसबीआई, पीएनबी, आदि) से लेते हैं, लेकिन अब कर्जमाफी सहकारी बैंकों की होगी।"
वो आगे बताते हैं, "सुनने में आया है जिस किसान के पास 2 हेक्टेयर जमीन है, उसका 25 हजार और 4 से 8 हेक्टेयर वालों के 12500 रुपए माफ होंगे, ये कौन सा फार्मूला है। अब आप बीकानेर, चुरु, बाड़मेर, जैसलमेर के इलाके को देखिए, यहां किसानों को पास ज्यादा-ज्यादा जमीनें हैं। उन्हें तो इस योजना का बिल्कुल लाभ नहीं मिलेगा, जबकि वो कर्ज में डूबे हुए हैं।"
अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम बताते हैं, "राजस्थान में करीब 42 लाख किसान हैं, जिसमें से 40 लाख किसान कर्जदार होंगे, लेकिन सरकार के नए नियमों के तहत 29 लाख किसानों को फायदा पहुंचेगा, इसमें सहकारी बैंकों से लोन लेने वाले किसान फायदे में रहेंगे, लेकिन दूसरी बैंकों और खासकर बड़े काश्तकारों को नुकसान है। क्योंकि बड़े किसान की जितनी ज्यादा जमीन होगी उसे लाभ उतना ही कम मिलेगा।"
बीकानेर के किसान आसुराम गोदारा, जो सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं, गांव कनेक्शन को वो फोन पर बताते हैं, "हमारे बीकानेर में एक ट्यूबवेल लगवाने का खर्च 10-20 लाख रुपए तक आता है। ये पैसा किसान लेगा तो कर्जे पर ही। सहकारी बैंक मुश्किल से एक लाख का लोन देते हैं, ऐसे में किसान बड़े बैंकों (कॉमर्शियल) के पास ही जाएगा, लेकिन सरकार जब नियम बनाती है तो ऐसे किसानों को लाभ से बाहर कर देती है।"

लंबी लड़ाई के बाद किसानों को मिलेगी सौगात

कर्जमाफी को लेकर वर्ष 2017 में किसानों ने सीकर में 13 दिन तक लगातार आंदोलन किया था। बीकानेर और राजस्थान के दूसरे इलाकों में भी किसान सड़कों पर उतरे थे। जिसके बाद राजे सरकार ने किसानों से समझौता कर 50-50 हजार कर्जमाफी का ऐलान किया था। कई महीनों तक वादे पर अमल न होने पर किसान फरवरी में फिर सड़कों पर उतरे, लेकिन वो आंदोलन दब गया। इसी साल 15 मार्च को झुंझुनूं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली थी। जिसमें हजारों किसानों ने अपनी बात रखने की कोशिश की। कई किसानों ने काले झंडे भी दिखाए, जिसके बाद वसुंधरा राजे ने बजट में कर्ज़माफी का ऐलान किया। राजस्थान में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
(भाषा- इनपुट के साथ)

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