उत्तर प्रदेश के किसानों को कैसे होगा फायदा, कृषि उत्पादों के निर्यात में हम कई प्रदेशों से पीछे

उत्तर प्रदेश के किसानों को कैसे होगा फायदा, कृषि उत्पादों के निर्यात में हम कई प्रदेशों से पीछेप्रदेश के किसानों को नहीं मिल पा रहा ज्यादा फायदा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसानों की जीतोड़ मेहनत का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश अनाज, फल और सब्जियों के उत्पादन में रिकार्ड बढ़त दर्ज कर रहा है। इसके बाद भी देश-विदेश के बजारों में दूसरे राज्यों के मुकाबले प्रदेश का कृषि उत्पाद नहीं पहुंच पा रहा है। देश में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात के लिए वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से बनाई गई संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सलाहकार विनोद कुमार कौल ने बताया ''उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाले आलू, आम, बासमती चालव और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों केा विदेशों में भेजन के लिए लिस्ट किया गया है। इसके बाद भी यह सामान दूसरे प्रदेशों के मुकाबले उत्तर प्रदेश कम निर्यात कर रहा है।''

निर्यात के मामले में उत्तर प्रदेश को बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से सीखना चाहिए। यह प्रदेश अपने राज्यों के पैदा होने कृषि उत्पाद को यूएस, यूके, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और खाड़ी देशों में पहुंचाने के लिए लगतार नीति बनाकर काम कर हैं लेकिन उत्तर प्रदेश इसमें बहुत पिछड़ा हुआ है।

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दशहरी के मुकाबले बिहार का जुर्दालु आम विदेशों में बना रहा अपनी पहचान

उत्तर प्रदेश में 45 लाख 12 हजार 705 मीट्रिक टन आम पैदा हुआ लेकिन विदेशों में मात्र 1414.8 मीट्रिक टन ही आम निर्यात हुआ। वहीं बिहार के भागलपुर में पैदा होने वाला जर्दालु आम विदेशों में दशरही के मुकाबले ज्यादा पहचान बना लिया है। बिहार मैंगो ग्रोवर्स फेडरेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार में उत्तर प्रदेश के मुकाबले तीन गुना कम लगभग 15 लाख टन आम की पैदावार हुई है लेकिन उत्तर प्रदेश जहां अंतराष्ट्रीय बाजार में हिस्सेदारी मात्र 0.25 प्रतितश से भी कम है वहीं बिहार की हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश से अधिक है। बिहार का जर्दालु आम विदेशों में 3 लाख से ज्यादा निर्यात होता है।

यूपी के आमों को नहीं हो पा रहा निर्यात।

बिहार मैंगो ग्रोवर्स के अध्यक्ष ने अच्युत चंद्रा ने बताया कि बिहार ने अपने आम के बेहतर पैकेजिंग की व्यवस्था की है। विदेशों तक अपने आम को पहुंचाने लिए लगातार अभियान चलाया है, जिसका नतीजा है कि यूपी के मुकाबले बिहार में आम की कम पैदावार होने के बाद भी बिहार का आम विदेशी बाजारों तक अपनी धाक जमा रहा है। उत्तर प्रदेश में आम के बड़े उत्पादक और आम के निर्यातक नदीम सिद्दकी ने बताया ''उत्तर प्रदेश में आम उत्पादकों और निर्यातकों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए नहीं मिल रही है। यहां का दशहरी आम विदेशों तक नहीं पहुंच पा रहा है तो इसके पीछे कारया यह है कि यहां के आम का जितना प्रचार-प्रसार करना चाहिए नहीं हो रहा है।

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बंगाल का आलू यूपी के मुकाबले देश-विदेश में ज्यादा पहुंच रहा

देश में आलू उत्पादन में बंगाल और उत्तर प्रदेश का खास योगदान है। पहले आलू उत्पादन में देश में पश्चिम बंगाल नंबर वन था लेकिन पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन में नंबर वन गया है। इस साल उत्तर प्रदेश में रिकार्ड 155 लाख टन आलू पैदा हुआ है लेकिन विभिन्न राज्यों के साथ ही विदेशों में भी 10 प्रतिशत आलू भी निर्यात नहीं हुआ है। वहीं बंगाल ने आलू निर्यातक नीति बनाकर अपने प्रदेश में पैदा होने वाले आलू को न सिर्फ देश के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाया है बल्कि विदेशों में यहां का आलू पहुंचाया है।

खेत से खुदाई के बाद निकाला आलू।

उत्तर प्रदेश आलू-प्याज विक्रेता संघ के उपाध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता ने बताया ''एपीडा के जरिए उत्तर प्रदेश का आलू विदेशों तक निर्यात करने की व्यवस्था लेकिन इकसे बाद भी यहां पर पैदा होने वाला 20 प्रतिशत आलू हर साल बर्बाद हो जाता है जबकि बंगाल में पैदा होने वाला कुल आलू का 40 प्रतिशत से भी ज्यादा निर्यात करता है। '' पश्चिम बंगाल प्रोग्रेसिव पोटैटो मर्चेट्स एसोसिएशन से जुड़े गोपाल मंडल ने बताया कि बंगाल ने अपने प्रदेश में पैदा होने वाले आलू के लिए पश्चिम बंगाल ने ब्राडिंग की है। बंगाल में इस साल 110 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ है।

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बासमती यूपी का लेकिन पंजाब ओर हरियाणा बड़ी मात्रा में कर रहा निर्यात

इस साल 2016-17 में लगभग 40 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया। जिसमें से 80 फीसदी निर्यात खाड़ी देशों ईरान और ईराक में हुआ। देश में कुल पैदा होने वाले बासमती चावल में 40 प्रतिशत हिस्सा पंजाब और हरियाणा का है। उत्तर प्रदेश में 15 से लेकर 20 फीसदी बासमती का उत्पादन होता है लेकिन पंजाब और हरियाया जहां अपने यहां पैदा होने वाले बासमती चावल की 60 प्रतिशत से ज्यादा विदेशों में निर्यात कर रहे हैं वहीं उत्तर प्रदेश मात्र 5 से लेकर 10 प्रतिशत ही निर्यात कर पा रहा है।

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उत्तर प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन से जुड़े संजीव अग्रवाल ने बताया ''उत्तर प्रदेश में बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, रामपुर, बदायूं, बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबा ओर बागपत में बासमती धान की सबसे ज्यादा खेती होती है।'' उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बासमती चावल की विदेशों में भारी डिमांड है लेकिन इसको पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश को अच्छी निर्यातक नीति बनानी पड़ेगी।

सब्जियों के उत्पादन में यूपी है नंबर वन

  1. उत्तर प्रदेश में इस साल रिकार्ड 1 करोड़ 16 लाख 78666 मीट्रिक टन हरी सब्जियां पैदा हुई हैं
  • आलू-155 लाख टन आलू- नंबर वन
  • बैंगन 267189 नंबर-2
  • मूली 145358-नंबर 2
  • कद्दू 360054-नंबर 3
  • परवल 53908- नंबर-2
  • अरबी 155939- नंबर4
  • तोरई 313598-नंबर-2
  • लोबिया 22261-नंबर-4
  • बंदगोभी 278831-नंबर-5
  • गोभी 393264-नंबर-6
  • करेला 284230-नंबर-2
  • लौकी 360054-नंबर-1

मिर्च 23416-नंबर-3
नोट- आम उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश का देश में पहला स्थान है। यहां पर सालना 45 लाख मीट्रिक टन आम पैदा होता है।

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