जनवरी की ठिठुरन में खेती कैसे बचाएं? उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए ज़रूरी सलाह
इस बार जनवरी महीने में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिसका रबी फसलों पर सर्दी का असर पड़ रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) ने मौसम को देखते हुए किसानों के लिए अगले दो सप्ताह की खेती से जुड़ी सलाह भी जारी की गई है।
गेहूं की फसल में अब केवल बहुत देर से बोई जाने वाली किस्मों की बुवाई का समय बचा है, इसलिए किसान 15 जनवरी तक ही गेहूं की बुवाई पूरी कर लें और वही किस्में बोएँ जो उनके क्षेत्र के लिए अनुशंसित हैं। जो गेहूं समय पर बोया जा चुका है, उसमें 20 से 25 दिन के अंतर पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करते रहें।
आलू की फसल में इस मौसम में पछेती झुलसा बीमारी का खतरा रहता है, इसलिए किसान अपने खेतों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें। जिन खेतों में बीमारी का असर दिखने लगे, वहाँ 15-15 दिन के अंतर पर दवा का छिड़काव करना जरूरी है।
मटर की फसल में फूल आने के समय सिंचाई बहुत जरूरी होती है। इस मौसम में कोहरा और नमी बढ़ने से मटर में सफेद चूर्ण जैसी बीमारी और डाउनी मिल्ड्यू का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए किसानों को समय रहते दवा का छिड़काव करना चाहिए। फलियां बनते समय दूसरी हल्की सिंचाई भी करनी चाहिए।
टमाटर और मिर्च की फसलों में झुलसा रोग से बचाव के लिए फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें और कीटों से बचाने के लिए नीम आधारित या जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें। आम के बागों में अच्छी बौर पाने के लिए पोषक तत्वों का घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है, जिससे मंजर अच्छे से निकलते हैं और उत्पादन बढ़ता है।
ठंड और पाले से बचाव भी इस समय बहुत जरूरी है, खासकर नए लगाए गए पौधों और एक-दो साल पुराने बागों के लिए। ऐसे पौधों को घास या फूस से ढकना चाहिए और खेत में नमी बनाए रखनी चाहिए, इससे पाले से नुकसान कम होता है।
गन्ना किसानों को सलाह दी गई है कि चीनी मिलों को आपूर्ति के लिए गन्ने की कटाई जमीन की सतह से करें। वहीं मछली पालने वाले किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अगर तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाए और कोहरा हो, तो तालाब में भोजन, चूना या खाद डालना बंद कर देना चाहिए।
इसके साथ ही किसानों को अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार की योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी गई है। खेतों में ज्यादा पेड़ लगाने से मिट्टी की सेहत सुधरती है और कार्बन फाइनेंस परियोजना के जरिए अतिरिक्त आय भी मिल सकती है। इसके लिए किसानों का पंजीकरण चल रहा है।
वहीं राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बांस की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें किसानों को 50 प्रतिशत तक सरकारी सहायता मिलती है। मौसम बदलने के इस दौर में किसानों को सलाह दी गई है कि वे रेडियो, टीवी और अखबार के जरिए मौसम की ताजा जानकारी लेते रहें, ताकि ठंड, कोहरा और शीतलहर से होने वाले नुकसान से समय रहते बचाव किया जा सके।
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