लीची किसानों सावधान! इस समय 3 खतरनाक कीट और इस रोग का खतरा, कृषि विभाग ने बताया ऐसे बचाएं अपनी फसल
बिहार सरकार के कृषि विभाग ने लीची उत्पादक किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि इस समय शाही किस्म के पेड़ों में फल बनने (फल सेट) की प्रक्रिया जारी है। विभाग के अनुसार चाइना किस्म में फल सेट होने में थोड़ी देर लगती है, इसलिए किसानों को बागानों की नियमित देखभाल और प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
इस समय इन तीन कीटों का रहता है खतरा
विभाग ने चेतावनी दी है कि इस समय बागानों में स्टिंक बग, प्लावर वेबर और फल बेधक कीट का प्रकोप अधिक रहता है, जबकि मंजर और फल झुलसा रोग भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए समय पर नियंत्रण जरूरी है। विभाग के अनुसार, बागों में हल्की सिंचाई कर पर्याप्त नमी बनाए रखें और प्रति पेड़ 500-600 ग्राम यूरिया तथा 600 ग्राम एमओपी (पोटाश) का प्रयोग करें।
इन कीटनाशकों का करें छिड़काव
वहीं जिन बागों में स्टिंक बग का प्रकोप है, वहां थियाक्लोप्रिड 21.7% एससी 0.5 मिली प्रति लीटर पानी के साथ लैम्बडा-सायहेलोथ्रिन 5% ईसी 0.5 मिली प्रति लीटर पानी मिलाकर छिड़काव करें। इसके विकल्प के रूप में बीटा-सायफ्लुथ्रिन 8.49% + इमिडाक्लोप्रिड 19.81% ओडी 0.6 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव भी प्रभावी बताया गया है। विभाग ने यह भी कहा है कि कीटनाशकों का छिड़काव तभी करें जब फल बड़े लौंग के आकार में आ जाएं।
रोग प्रबंधन के लिए मंजर और फल झुलसा से बचाव हेतु कीटनाशक के साथ कवकनाशी थायोफेनेट मिथाइल 70% डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। बेहतर परिणाम के लिए छिड़काव में स्टिकर 0.3 मिली प्रति लीटर या सर्फ एक चम्मच प्रति 15 लीटर पानी में मिलाना भी जरूरी बताया गया है।
स्टिंक बग न होने पर इस दवा का करें इस्तेमाल
कीट नियंत्रण के लिए विभाग ने स्पष्ट दवा और मात्रा भी तय की है। जिन बागों में स्टिंक बग का प्रकोप नहीं है, वहां फल बेधक और प्लावर वेबर से बचाव के लिए थियाक्लोप्रिड 21% एससी 0.6 मिली प्रति लीटर पानी या नोवाल्यूरान 10 ईसी 1.5 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। इसके अलावा संयुक्त उत्पाद नोवाल्यूरान 5.25% + इन्डोक्साकार्ब 4.5% एससी 1.5 मिली प्रति लीटर का भी उपयोग किया जा सकता है।
इसके अलावा, विभाग ने कहा है कि 15 दिन के अंतराल पर तरल बोरोन (20-21%) 1 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर दो बार छिड़काव करें। इससे फल फटने की समस्या कम होगी और फल का आकार व गुणवत्ता बेहतर होगी।
किसान कॉल सेंटर से ले सकते हैं अधिक जानकारी
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इन वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर लीची की बेहतर पैदावार हासिल करें। अधिक जानकारी के लिए किसान राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर से संपर्क कर सकते हैं या किसान कॉल सेंटर 1800-180-1551 पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।