Success Story: समय, तकनीक और लगन से एक किसान कैसे बना POTATO KING ?
बेहतर तकनीक और समय पर खाद-पानी से आलू की खेती अच्छा मुनाफा करा सकती है। शाहजहांपुर के किसान अमनदीप सिंह ने आलू की खेती को करोड़ों के मुनाफे के मॉडल में बदल दिया है।
बदलते मौसम में आज खेती सिर्फ़ मेहनत का काम नहीं रह गई है, यह समय, तकनीक और समझ का खेल बन चुकी है। खासकर आलू की खेती में ज़रा-सी लापरवाही पूरी मेहनत खराब कर सकती है।
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले में 125 एकड़ में आलू की खेती करने वाले किसान अमनदीप सिंह मानते हैं कि अब खेती बिना मशीनों के संभव नहीं है। किसान अगर समय से पीछे रह गया, तो नुकसान तय है।
अमनदीप सिंह कई कंपनियों के साथ कांट्रैक्ट फार्मिंग करते हैं और एक सीजन में करीब 7-8 किस्मों के आलू की बुआई करते हैं।
समय पर हो खेती का काम
अमनदीप सिंह बताते हैं कि आलू की खेती में सबसे ज़रूरी चीज़ है समय। अगर आज स्प्रे करना है, तो आज ही करना होगा। अगर आज सिंचाई करनी है, तो उसे टाला नहीं जा सकता। मौसम कभी भी करवट बदल सकता है। अचानक बारिश हो जाए या तापमान बढ़ जाए, तो फ़सल पर सीधा असर पड़ता है।
मशीनों से आसान हुई आलू की खेती
खेत की तैयारी से लेकर फ़सल की देखभाल तक, हर चरण में मशीनों की भूमिका अहम है। ट्रैक्टर, रोटावेटर, लेज़र लेवलर और स्प्रे मशीन ये सभी आलू की खेती का अहम हिस्सा हैं।
आलू के खेत को बराबर करना होता है। जब खेत पूरी तरह से समतल होता है, तो पानी हर जगह बराबर पहुंचता है। आलू को बहुत ज़्यादा पानी की ज़रूरत नहीं होती। केवल एक से दो इंच पानी ही काफ़ी होता है। समतल खेत में न पानी रुकता है और न ही सूखा रहता है, जिससे आलू की कंद अच्छी बनती हैं।
बेल काटने का बदला तरीका
आलू की खेती में बेल काटना एक अहम काम है। पहले किसान रासायनिक दवाओं से बेल सुखा देते थे, जिससे खेत साफ़ हो जाता था। लेकिन अमनदीप सिंह अब मशीन से बेल काटते हैं। वह कहते हैं कि दवाओं से खेत को नुकसान होता है। मशीन से कटी बेल खेत में ही छोड़ दी जाती है, जो कुछ समय बाद सड़कर जैविक खाद बन जाती है। इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है और अगली फ़सल को फायदा मिलता है। वे मानते हैं कि खेत से कुछ भी बाहर नहीं फेंकना चाहिए।
हर रोज देखते हैं खेत
अमनदीप सिंह दिन में दो से तीन बार खेत का चक्कर लगाते हैं। उनका मानना है कि किसान के पैर ही सबसे बड़ी खाद होते हैं। खेत में जाकर ही पता चलता है कि फ़सल को क्या चाहिए?
अमनदीप सिंह का कहना हैं कि आलू की फ़सल में सुबह और शाम के खेत में बहुत फर्क आ जाता है। पौधों की दूरी कम होती जाती है, पत्तों का रंग बदलता है। जो किसान रोज़ खेत देखता है, वह पत्तों को देखकर ही समझ जाता है कि फ़सल क्या मांग रही है।
आलू की खेती में लगातार व्यस्तता
आलू की खेती में खाली बैठने का समय नहीं मिलता। हर दिन कोई न कोई काम होता है। कभी सिंचाई, कभी स्प्रे, कभी निरीक्षण।
अमनदीप कहते हैं, आलू की फ़सल बच्चों की तरह होती है। जैसे बच्चे की हर गतिविधि पर ध्यान दिया जाता है, वैसे ही आलू की फ़सल पर नज़र रखनी पड़ती है। थोड़ी-सी लापरवाही पूरी फसल खराब कर सकती है।
सही फ़सल चक्र से बढ़ी आमदनी
आलू की खुदाई के बाद खेत खाली नहीं छोड़ते। अमनदीप आलू के बाद खरबूजा, मक्का और धान जैसी फ़सलें लेते हैं। इससे इंच-इंच ज़मीन का इस्तेमाल करते हैं।