मछली पालन में नई शुरुआत, NFDP से जुड़कर सीधे पा सकते हैं सरकारी योजनाओं का लाभ

Gaon Connection | Jan 24, 2026, 15:03 IST
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यह प्लेटफॉर्म सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ने के नए अवसर खोलता है। NFDP के जरिए मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

<p>मछुआरों और उद्यमियों के लिए बड़ी सुविधा, एक क्लिक में कई सेवाएं देगा NFDP।<br></p>

अगर आप भी प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना (PM-MKSSY) का लाभ लेकर मछली पालन या उससे जुड़ा कोई व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तों यहाँ पर आपको सारी जानकारी मिल जाएँगी।



इस योजना को बढ़ावा देने के लिए नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) भारत के मत्स्य क्षेत्र के लिए एक नई डिजिटल शुरुआत है। अब तक मछुआरे, मछली किसान और इससे जुड़े छोटे उद्यमी अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाकर योजनाओं की जानकारी लेते थे, पंजीकरण कराते थे और लाभ पाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरते थे। NFDP के आने से यह पूरा सिस्टम एक ही डिजिटल मंच पर आ गया है, जिससे मत्स्य क्षेत्र के लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।



यह प्लेटफॉर्म दरअसल एक एकीकृत डिजिटल पहचान प्रणाली है, जिसमें मछुआरे, मछली पालन करने वाले किसान, हैचरी संचालक, फीड सप्लायर, प्रोसेसर, व्यापारी और अन्य हितधारक खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद उन्हें एक यूनिक डिजिटल पहचान मिलती है, जिसके जरिए वे सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और दूसरी सुविधाओं से सीधे जुड़ सकते हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी और लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचेगा।



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NFDP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल इंडिया के साथ जोड़ता है। आज के समय में जब हर सेवा ऑनलाइन हो रही है, तब मछुआरे और ग्रामीण क्षेत्र के किसान अक्सर तकनीक से पीछे रह जाते हैं। इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए उन्हें भी डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।



अब मोबाइल या कंप्यूटर से NFDP.dof.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना आसान हो गया है। इससे सरकारी योजनाओं की जानकारी, आवेदन की स्थिति और लाभ से जुड़ी अपडेट सीधे उपयोगकर्ता तक पहुंच सकेंगी।



इस प्लेटफॉर्म का एक अहम उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में डेटा आधारित योजना बनाना भी है। जब लाखों मछुआरे और किसान एक ही प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत होंगे, तो सरकार के पास सही आंकड़े होंगे कि किस क्षेत्र में कितने लोग मत्स्य पालन से जुड़े हैं, कहाँ किस तरह की मदद की ज़रूरत है और किस राज्य में उत्पादन बढ़ाने की ज्यादा संभावना है। इससे भविष्य की योजनाएं ज्यादा सटीक बन सकेंगी और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा।



NFDP केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाजार से जुड़ने का भी एक जरिया बन सकता है। डिजिटल पहचान के जरिए मछली उत्पादकों को खरीदारों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और निर्यातकों से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर दाम मिल सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। खासकर छोटे और सीमांत मछुआरों के लिए यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जो अब तक सीमित संसाधनों और जानकारी के कारण पीछे रह जाते थे।



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