Pusa Krishi Vigyan Mela 2026: किसानों का महाकुंभ हुआ शुरू, नए स्टार्टअप्स, सेंसर आधारित सिंचाई उपकरणों की लगी प्रदर्शनी

Gaon Connection | Feb 25, 2026, 16:33 IST
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पूसा में आयोजित कृषि विज्ञान मेला 2026 का शुभारंभ किया। तीन दिनों तक चलने वाला यह मेला किसानों को नई वैज्ञानिक तकनीकों, मशीनों और स्मार्ट खेती के तरीकों से परिचित कराएगा, ताकि उनकी आमदनी में ठोस बढ़ोतरी हो सके। जानिए क्या कुछ रहा खास मेले के पहले दिन।
पूसा कृषि विज्ञान मेला–2026

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा परिसर में पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 का उद्घाटन किया। यह तीन दिवसीय मेला 25 से 27 फरवरी तक चलेगा और इसकी थीम "विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत" है। इस मेले को किसानों का महाकुंभ बनाने की परिकल्पना की गई है, जिसमें देश भर के कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वाले किसानों के सर्वश्रेष्ठ प्रयोग प्रदर्शित किए जाएंगे।



"किसानों का महाकुंभ"है कृषि मेला

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उद्घाटन के मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि यह देश का एकमात्र राष्ट्रीय कृषि मेला है, जिसे "किसानों का महाकुंभ" बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि देशभर में कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वाले किसानों द्वारा किए गए सर्वश्रेष्ठ प्रयोग इस मंच पर प्रदर्शित होने चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि अगले वर्ष इस मेले को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा और समापन अवसर पर अगली तारीखों की घोषणा भी की जाएगी। मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के खातों में स्थानांतरित करने के विचार पर भी मंथन की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि मेले का उद्देश्य केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि ऐसा मंच बनाना है जहां किसान सीखें, समझें और आधुनिक तकनीक को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।



अंतर्राष्ट्रीय महिला कृषक वर्ष को समर्पित मेला

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अंतर्राष्ट्रीय महिला कृषक वर्ष के मद्देनजर इस बार मेले में महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं की उद्यमिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों और नवाचारों की प्रदर्शनी लगाई गई है। साथ ही, युवाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं, संवाद सत्र और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें कृषि-आधारित स्टार्टअप्स और वैल्यू एडिशन की दिशा में प्रेरित किया जा सके।



उन्नत बीजों की लगी प्रदर्शनी

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मेले के प्रमुख आकर्षणों में केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही है। आईएआरआई द्वारा विकसित उच्च उत्पादकता वाली उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलों के माध्यम से नई प्रजातियों और तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे किसान वास्तविक परिणाम देख सकें।



स्मार्ट कृषि तकनीकों पर रहा फोकस

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डिजिटल और स्मार्ट कृषि तकनीक जैसे ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेंसर आधारित सिंचाई और स्मार्ट मशीनरी का प्रदर्शन किसानों को तकनीकी खेती की ओर प्रेरित कर रहा है। जलवायु अनुकूल खेती के तहत कम पानी वाली फसलें, फसल विविधीकरण और सुरक्षित खेती के उपायों की जानकारी दी जा रही है, ताकि बदलती जलवायु के प्रभाव को कम किया जा सके। एग्री-स्टार्टअप्स और नवाचारी किसानों को अपने उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है, जिससे नई आय के अवसरों पर चर्चा हो रही है।



जल्दी पता चलेगी अलगे साल के मेले की तारीख

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मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "कृषि मेले का स्वरूप बदलने की जरूरत, यह एक मात्र राष्ट्रीय मेला है, यह मेला ऐसा होना चाहिए जैसे लगे कि पूरे हिंदुस्तान में किसानों का महाकुंभ हो रहा है। देशभर में जितने प्रयोग हैं, यहाँ किसान बैठे हैं, कुछ केवीके अच्छे काम कर रहे हैं, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी-कॉलेज, वैल्यू एडिशन करने वाले, जो-जो हिंदुस्तान में सर्वश्रेष्ठ हो, वो इस कृषि मेले में दिखाई देना चाहिए। इसका प्रचार प्रसार ऐसा हो पूरा देश इसकी प्रतीक्षा करे, अगले साल यह किसान विज्ञान मेला एक राष्ट्रीय मेले के रूप में परिवर्तित किया जाएगा, मेले के समापन के समय अगले साल के मेले की तारीख की घोषणा करेंगे।"



किचन गार्डनिंग वाली सब्जियों की किस्मों की प्रदर्शनी

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खेती को सरल बनाने के लिए पूसा में कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं। गार्डन फार्मिंग के बढ़ते चलन को देखते हुए हमारे वैज्ञानिक सब्जियों की कई ऐसी किस्में विकसित कर रहे हैं, जिन्हें आसानी से घर की छत, बालकनी आदि जगह उगाया जा सके। इस तरह के प्रयोग युवाओं को खेती से जोड़ने और आय बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो रहे हैं। कुल मिलाकर, पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि खेती के भविष्य की झलक है। यहां परंपरागत अनुभव और आधुनिक तकनीक एक साथ दिखाई दे रही है, जिससे साफ है कि आने वाले समय में खेती सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि ज्ञान, तकनीक और नवाचार का संगम होगी।

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