AI स्मार्ट कॉलर Startup: अब AI तय करेगा गायों को कब, कहाँ और कितनी देर तक चरना चाहिए
न्यूजीलैंड के एक स्टार्टअप Halter ने गायों के लिए AI- पावर्ड स्मार्ट कॉलर बनाकर कमाल कर दिया है। इस तकनीक ने कंपनी को 2 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन तक पहुँचा दिया है। यह कॉलर गायों की लोकेशन, सेहत, तापमान, चबाने की आदत और प्रजनन चक्र जैसी हर चीज़ पर 24 घंटे नज़र रखता है। सबसे खास बात यह है कि इससे किसानों को बाड़े बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। वे ऐप में बस एक वर्चुअल बाउंड्री बना देते हैं और गायें उस सीमा को पार करने पर बीप और वाइब्रेट की आवाज़ से वापस मुड़ जाती हैं। कंपनी के AI सिस्टम, जिसे Cowgorithm कहा जाता है, यह तय करता है कि गायों को कब और कहाँ चरना चाहिए और पूरे झुंड को कैसे निर्देशित करना है। इससे किसानों का समय और पैसा बचता है, और उत्पादकता बढ़ती है। यह सेवा फिलहाल न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में करीब 7 लाख गायों पर इस्तेमाल हो रही है।
गाय के गले में AI का जादू, 2 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन तक पहुँचा स्टार्टअप
कल्पना कीजिए, जैसे इंसानों के लिए स्मार्टवॉच होती है, वैसे ही अब गायों के लिए भी स्मार्ट गैजेट आ गया है! न्यूजीलैंड का Halter नाम का एक स्टार्टअप इसी अनोखे आइडिया पर काम कर रहा है। उन्होंने गायों के गले में एक खास तरह का AI- पावर्ड स्मार्ट कॉलर पहनाया है। यह कॉलर इतना सफल रहा है कि कंपनी की कीमत 2 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई है।
स्मार्ट कॉलर क्या-क्या करता है?
इस स्मार्ट कॉलर में GPS, सोलर पावर और AI आधारित सॉफ्टवेयर लगा है। यह कॉलर 24 घंटे गायों की हर गतिविधि पर नज़र रखता है। यह बताता है कि गाय कहाँ है, उसका स्वास्थ्य कैसा है, उसका तापमान कितना है, वह कितना चबा रही है और उसके प्रजनन चक्र का समय क्या है। यह सब जानकारी किसान को तुरंत मिल जाती है।
बाड़े की झंझट खत्म!
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को अब अपनी गायों के लिए बड़े-बड़े बाड़े या घेरे बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। किसान अपने मोबाइल ऐप में बस एक लाइन खींच देता है और वही एक वर्चुअल बाउंड्री बन जाती है। जब कोई गाय उस सीमा के पास पहुँचती है, तो कॉलर बीप और वाइब्रेट करने लगता है। इससे गाय डरकर या समझकर वापस मुड़ जाती है।
Cowgorithm: गायों का अपना AI मैनेजर
कंपनी ने अपने AI सिस्टम का नाम Cowgorithm रखा है। यह सिस्टम तय करता है कि गायों को कब, कहाँ और कितनी देर तक चरना चाहिए। साथ ही, यह पूरे झुंड को किस दिशा में ले जाना है, यह भी बताता है। किसान बस एक बटन दबाकर पूरे झुंड को नई घास वाली जगह या मिल्किंग शेड की ओर भेज सकता है। इससे मजदूरों का खर्च कम होता है, लागत घटती है और उत्पादकता बढ़ती है।
किफायती सेवा, बड़ी बचत
किसान इस स्मार्ट कॉलर की सेवा के लिए प्रति गाय हर महीने 5 से 8 डॉलर (लगभग 450 से 800 रुपये) का भुगतान करता है। यह एक छोटी सी रकम है, लेकिन इससे किसानों को बहुत फायदा होता है। यह तकनीक पहले से ही न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में इस्तेमाल हो रही है। इन देशों में करीब 7 लाख गायों पर यह कॉलर पहनाया जा चुका है। अमेरिका में तो इस सिस्टम से 11,000 मील से भी ज्यादा लंबी वर्चुअल फेंसिंग बनाई जा चुकी है।
दुनिया के बड़े निवेशक भी हुए कायल
इस स्टार्टअप को दुनिया के मशहूर और सफल निवेशक Peter Thiel’s Founders Fund से फंडिंग मिली है। यह दिखाता है कि यह आइडिया कितना दमदार है। AI की असीमित संभावनाएं भी यहाँ नजर आ रही हैां। यह मामला दिखाता है कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) हर क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रहा है, यहाँ तक कि उन जगहों पर भी जहाँ हम कभी टेक्नोलॉजी का ज्यादा रोल नहीं सोचते थे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोला और रेफ्रिजरेशन का उदाहरण। असली फायदा तो कोला बनाने वाली कंपनी ही कमाती है, AI तो बस एक ज़रिया है। यह गायों के स्मार्ट कॉलर का मामला भी कुछ ऐसा ही है।