Animal Vaccination: आंध्र प्रदेश और राजस्थान में पशुओं का टीकाकरण अभियान, जानें कब और कैसे मिलेगा लाभ?
आंध्र प्रदेश और राजस्थान में पशुधन के लिए फुट-एंड-माउथ डिजीज (एफएमडी) के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू किए गए हैं। आंध्र प्रदेश में यह अभियान 16 मार्च से 29 अप्रैल, 2026 तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मवेशियों को मुफ्त टीके लगाए जाएंगे। वहीं, राजस्थान ने भी मंगलवार को अपने एफएमडी नियंत्रण कार्यक्रम के सातवें चरण के तहत दो करोड़ से अधिक पशुओं के टीकाकरण की शुरुआत की है।
आंध्र-प्रदेश और राजस्थान में टीकाकारण की शुरूआत
आंध्र प्रदेश में, में ये टीके पशुपालकों के घरों पर जाकर मुफ्त में टीके लगाए जाएंगे। इस कार्यक्रम के लिए जिलों में 83.69 लाख खुराकें वितरित की गई हैं। टीकाकरण दो चरणों में होगा: मुख्य चरण 16 मार्च से 14 अप्रैल तक चलेगा और इसके बाद बूस्टर खुराक और शेष पशुओं के लिए 15 से 29 अप्रैल तक टीकाकरण किया जाएगा।
राजस्थान में पशुपालन मंत्री जाराराम कुमावत ने जयपुर के पास बगरू में रामदेव गौशाला से इस सातवें चरण के अभियान की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य राज्य की 2.32 करोड़ गायों और भैंसों को टीका लगाना है। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य पशुधन को इस संक्रामक बीमारी से बचाना है, जो न केवल पशुओं के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, बल्कि किसानों को भारी आर्थिक नुकसान भी पहुँचाती है। राजस्थान सरकार ने 2030 तक राज्य को FMD मुक्त बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जबकि आंध्र प्रदेश में भी टीकाकरण के दो चरण यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं कि सभी लक्षित पशुओं को समय पर टीका लग जाए।
क्या होता है फुट-एंड-माउथ डिजीज?
फुट-एंड-माउथ डिजीज जिसे खुरपका-मुंहपका बीमारी भई कहते हैं, एक अत्यधिक संक्रामक वायरल संक्रमण है जो विशेष रूप से क्रॉस-ब्रेड पशुओं को प्रभावित करता है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। यह बीमारी दूध उत्पादन को कम करती है, पशुओं को कमजोर बनाती है, बैलों और सांडों की कार्य क्षमता को घटाती है और बछड़ों की मृत्यु का कारण बन सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होता है।
फुट-एंड-माउथ डिजीज के लक्षण
खुरपका-मुंहपका (FMD) एक बहुत ही खतरनाक और तेजी से फैलने वाली वायरल बीमारी है। यह बीमारी गायों, भैंसों, सूअरों, भेड़ों और बकरियों जैसे पालतू जानवरों को अपनी चपेट में ले लेती है। इस बीमारी के होने पर पशुओं को तेज बुखार आता है। साथ ही, उनके मुंह, जीभ और पैरों के खुरों में छाले या फफोले पड़ जाते हैं। इन छालों की वजह से पशुओं को खाने-पीने में बहुत दिक्कत होती है और वे ठीक से चल भी नहीं पाते। यह बीमारी पशुओं की सेहत पर बहुत बुरा असर डालती है, जिससे दूध का उत्पादन कम हो जाता है और कई बार तो पशुओं की मौत भी हो जाती है। इस वजह से किसानों को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
घर-घर जाकर होगा पशुओं का टीकाकरण
राजस्थान में पशुपालन मंत्री जाराराम कुमावत ने इस सातवें चरण के टीकाकरण अभियान की शुरुआत करते हुए पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने सभी पशुओं का टीकाकरण जरूर करवाएं। उन्होंने कहा, "इससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।" यह अभियान राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (National Animal Disease Control Programme) के तहत चलाया जा रहा है। पशुपालन विभाग की टीमें घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि कोई भी पशु टीकाकरण से छूट न जाए। विभाग इस पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी भी करेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुओं को टीका लगाया जा सके।