बासमती चावल कारोबार पर मंडराया खतरा! पंजाब के निर्यातकों ने पीयूष गोयल को लिखा पत्र, BEDF में सुधार की मांग
बासमती चावल के कारोबार में बढ़ती चुनौतियों के बीच पंजाब के निर्यातकों ने अब सरकार से सीधी दखल की मांग की है। पंजाब राइस मिलर्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन में तुरंत सुधार और पुनर्गठन की मांग की है। निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था, बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के दबाव के कारण उनका मुनाफा घट रहा है। ऐसे में यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो बासमती कारोबार को बड़ा नुकसान हो सकता है।
फीस बढ़ोतरी से बढ़ा आर्थिक बोझ
निर्यातकों ने BEDF द्वारा कॉन्ट्रैक्ट पंजीकरण शुल्क को 30 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 70 रुपये प्रति टन (जीएसटी अलग) करने को बड़ा कारण बताया है। उनका कहना है कि यह बढ़ोतरी अचानक और मनमाने तरीके से की गई, जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। पंजाब के साथ-साथ हरियाणा के निर्यातकों ने भी इस फैसले का विरोध किया था, लेकिन इसके बावजूद इसे लागू कर दिया गया। अब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पहले से ही निर्यातकों की पूंजी फंसी हुई है और मार्जिन कम हो गए हैं, जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो गया है।
संरचनात्मक खामियों पर उठे सवाल
निर्यातकों का आरोप है कि करीब 23 साल पहले बासमती को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने और उसकी पहचान को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए BEDF में अब कई संरचनात्मक खामियां आ गई हैं। संगठन के निदेशक अशोक सेठी का कहना है कि फाउंडेशन में दूरदर्शिता की कमी है और यहां दीर्घकालिक योजना पर पर्याप्त काम नहीं हो रहा। उनका सुझाव है कि अनुभवी कृषि, प्रसंस्करण और निर्यात विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि बासमती उत्पादन और निर्यात को नई दिशा मिल सके। उन्होंने सरकार से एक उच्च स्तरीय समिति बनाकर सभी हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा करने की भी मांग की है।
मजबूत आंकड़ों के बावजूद चिंता बरकरार
आंकड़ों के मुताबिक भारत ने 2025-26 के वित्त वर्ष (अप्रैल से फरवरी) के दौरान 6.07 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 5.27 अरब डॉलर (करीब 46,403 करोड़ रुपये) रही। यह आंकड़े भले ही मजबूत दिखाई देते हों, लेकिन निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि बासमती जैसे प्रीमियम उत्पाद के लिए बेहतर नीतियां, पारदर्शिता और दीर्घकालिक रणनीति बेहद जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मजबूत पकड़ बनी रह सके।