12 फरवरी को भारत बंद: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों का विरोध, देशभर में प्रदर्शन
संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान महासभा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ 12 फरवरी को देशव्यापी भारत बंद का ऐलान किया है। किसान संगठनों ने इस समझौते को किसानों के हितों पर कुठाराघात बताते हुए गांव-गांव और जिला मुख्यालयों पर बड़े प्रदर्शन की अपील की है। किसान महासभा ने इस समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की है।
भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर देश में किसान संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ-साथ अखिल भारतीय किसान महासभा ने इस समझौते के खिलाफ कल यानी 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी भारत बंद का आह्वान किया है। किसान संगठन इस समझौते को देश के किसानों के लिए तबाही का दस्तावेज बता रहे हैं।
अखिल भारतीय किसान महासभा ने 3 फरवरी को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में इस समझौते को "देश की खेती-किसानी के लिए तबाही का दस्तावेज" करार दिया है। किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि यह समझौता "देश और देश के किसानों के हितों पर बड़ा कुठाराघात तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे मोदी सरकार का पूर्ण समर्पण है।" किसान महासभा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने इस समझौते के घातक प्रावधानों पर देश और किसानों को अंधेरे में रखा है। संगठन ने कहा कि इस बार भी इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी के बजाय पहले ट्रंप ने की। मोदी सरकार समझौते के प्रावधानों को टैरिफ रेट के पीछे छुपा रही है।
अमेरिकी किसानों के लिए फायदे का सौदा
किसान महासभा ने अमेरिका में कृषि मामलों की प्रभारी राष्ट्रपति सचिव ब्रूक रोलिंस के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यह साफ हो गया है कि समझौता किसके फायदे के लिए है। ब्रूक रोलिंस ने अपने बयान में कहा था, "हमारे अमेरिकी किसानों के लिए एक बार फिर से अपना वादा पूरा करने के लिए राष्ट्रपति को धन्यवाद! नए अमेरिका-भारत समझौते से भारत के विशाल बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी का प्रवाह होगा। 2024 में, भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आज का समझौता इस घाटे को कम करने में काफी मददगार साबित होगा।" किसान महासभा ने कहा कि यह बयान साफ करता है कि समझौता अमेरिकी किसानों के फायदे के लिए है, भारतीय किसानों के लिए नहीं।
किसानों की बर्बादी की तरफ धक्का
किसान महासभा के अनुसार, "मोदी सरकार इस समझौते के माध्यम से भारतीय किसानों की कीमत पर अमेरिका से भारी सब्सिडी वाली सस्ती कृषि उपज के आयात के दरवाजे खोल रही है। भारतीय किसानों को जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है, को बर्बादी की तरफ धकेल रही है।"
संगठन ने बताया कि जिन फसलों पर इस समझौते का तुरंत असर पड़ेगा वे हैं सोयाबीन, मक्का, कपास, डेयरी और पोल्ट्री। इससे देश के करोड़ों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी और अमेरिकी जीएम फसलों से भारतीय बाजार पट जाएगा। किसान महासभा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार द्वारा एक फरवरी को संसद में पेश बजट में कृषि क्षेत्र की पूर्ण उपेक्षा ने जता दिया था कि मोदी सरकार अमेरिका के कितने दबाव में है।
संयुक्त किसान मोर्चा का विरोध
संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस समझौते का कड़ा विरोध किया है। एसकेएम ने 4 फरवरी से 11 फरवरी तक किसानों को जुटाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाया है। 12 फरवरी के भारत बंद के साथ इस अभियान का समापन होगा। किसान संगठनों का कहना है कि सस्ते अमेरिकी उत्पाद बाजार में आने से भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे और किसानों को भारी नुकसान होगा। संगठनों ने अमेरिका, यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ सरकार के व्यापार समझौतों का अध्ययन किया है और शुरू से ही इनका विरोध किया है।
सोशल मीडिया पर भी तेज विरोध
सोशल मीडिया पर #BharatBandh, #किसान_बचाओ और #StopUSAgroDeal हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने ट्वीट किया, "12 फरवरी को पूरा देश किसानों के साथ खड़ा होगा। यह समझौता किसानों की बर्बादी का सौदा है।" पंजाब किसान यूनियन ने लिखा, "अमेरिकी जीएम फसलों से भारतीय बाजार भर जाएगा। हमारे देसी बीज, हमारी पारंपरिक खेती खत्म हो जाएगी। 12 फरवरी को हर गांव में मोदी-ट्रंप के पुतले जलेंगे।" युवा किसान संगठन ने ट्वीट किया, "बजट में किसानों की उपेक्षा और अब यह खतरनाक समझौता। साफ है कि सरकार अमेरिका के दबाव में है। हम गुलामी नहीं स्वीकारेंगे।"
बंद की पूरी तैयारी
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में किसान संगठनों ने बड़े प्रदर्शन की तैयारी की है। व्यापारी संगठनों, परिवहन यूनियनों और मजदूर संगठनों ने भी बंद में समर्थन की घोषणा की है। कई राज्यों में स्थानीय बाजार समितियों ने भी बंद का समर्थन किया है। किसान नेताओं ने कहा है कि गांव-गांव में पुतले जलाए जाएंगे और तहसील व जिला स्तर पर बड़े प्रदर्शन होंगे।
सरकार का पक्ष: किसानों के हित सुरक्षित
वहीं केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का बचाव करते हुए कहा कि किसानों और डेयरी क्षेत्र के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।गोयल ने कहा, "दूध, चीज, मक्खन, घी, दही और व्हे जैसे उत्पादों के साथ गेहूं, चावल, मक्का, मोटा अनाज, जौ, ओट्स और ज्वार जैसे मुख्य उत्पादों को टैरिफ रियायत से बाहर रखा गया है। कई सब्जियां, फ्रोजन और संरक्षित खाद्य पदार्थ तथा काली मिर्च, जीरा, हल्दी, अदरक, धनिया और सरसों जैसे मसालों को भी सुरक्षित रखा गया है।"
वाणिज्य मंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, "यह समझौता भारत के आर्थिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। यह घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करेगा, स्थानीय कृषि को मजबूत करेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा।" पीयूष गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते के तहत आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) खाद्य पदार्थों की अनुमति नहीं होगी।
बंद का संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत बंद का असर देशभर के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। खासकर कृषि प्रधान राज्यों में बाजार, परिवहन, मंडियां और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।पंजाब और हरियाणा में किसान संगठनों ने सड़कों पर चक्का जाम की चेतावनी दी है। उत्तर प्रदेश में भी कई जिलों में प्रदर्शन और पुतला दहन की योजना है। कई राज्य सरकारों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। किसान-सरकार के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है। किसान संगठनों ने साफ कहा है कि वे इस समझौते को तत्काल रद्द करवाने तक संघर्ष जारी रखेंगे।