Bharat Bandh Today: लेबर कोड्स से लेकर MGNREGA तक, ये हैं प्रदर्शनकारियों की बड़ी मांगें; जानें किस राज्य में कितना असर

Gaon Connection | Feb 12, 2026, 14:18 IST
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देश भर के ट्रेड यूनियन ने आज यानी 12 फरवरी को भारत बंद बुलाया है जिसका अलग-अलग प्रदेशों में मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है. 10 ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम ने ‘भारत बंद’ का कॉल दिया है. यह स्ट्राइक सेंट्रल गवर्नमेंट की इकोनॉमिक पॉलिसीज के खिलाफ प्रदर्शन के तौर पर की जा रही है. ट्रेड यूनियनों का दावा है कि इस बंद में करीब 30 करोड़ वर्कर्स शामिल हो सकते हैं. ऐसे में बैंक, ट्रांसपोर्टेशन, और अन्य पब्लिक सर्विसेज पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आसपास के इलाकों में इस बंद का कोई असर नहीं दिख रहा है. वहीं बिहार में भी बंद का खूब व्यापक असर नहीं है. इसके अलावा ओडिशा, केरल और पश्चिम बंगाल में बंद का अच्छा खासा असर है. आइये जानते हैं कि देश के अन्य हिस्सों में कैसा असर है?

आज पूरे देश में भारत बंद का असर देखने को मिल रहा है। दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई किसान संगठनों ने मिलकर यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल बुलाई है। इस बंद का मुख्य कारण सरकार की किसान और मजदूर विरोधी नीतियां हैं, जिनमें चार नए श्रम कानून, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, ड्राफ्ट सीड बिल 2025, कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 और विद्युत संशोधन विधेयक 2025 शामिल हैं।



भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर किसानों की आपत्ति

संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक हन्नान मोल्लाह ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "यह समझौता किसानों के साथ धोखा होगा। हम अमेरिका की चालाकी के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सरकार ने आत्मसमर्पण कर दिया है। पीयूष गोयल को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने भारतीय किसानों के साथ विश्वासघात किया है।"



भारतीय किसान यूनियन की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अमेरिका से डीडीजीएस (सूखे डिस्टिलर अनाज), पशु आहार, लाल ज्वार, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों की घरेलू फसलों की कीमतें गिरेंगी। विशेष रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान के सोयाबीन किसान पहले से ही कीमतों के संकट का सामना कर रहे हैं। किसान यूनियनों का मानना है कि यह व्यापार समझौता स्थिति को और खराब कर देगा।



यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी किसान नाराज हैं। भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यूरोपीय संघ भारी सब्सिडी वाली कृषि वस्तुओं को भारत में डंप करेगा, जिससे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। साथ ही, पौधों की किस्मों पर बौद्धिक संपदा संरक्षण (यूपीओवी 1991) को स्वीकार करने से भारतीय किसानों के बीज बचाने और साझा करने के अधिकार कमजोर होंगे।



ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और अन्य विधेयकों का विरोध

भारतीय किसान यूनियन ने ड्राफ्ट सीड बिल 2025 का भी जोरदार विरोध किया है। यूनियन का कहना है कि यह बिल बीजों की कीमतें बढ़ाएगा, कॉर्पोरेट नियंत्रण को मजबूत करेगा और किसानों के अधिकारों को कमजोर करेगा। साथ ही, यह देसी बीज किस्मों और राष्ट्रीय बीज नेटवर्क को हाशिए पर धकेल सकता है। कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 को लेकर भी किसान यूनियन ने चिंता जताई है। इस विधेयक में कीटनाशक उद्योग को विनियमित करने के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं और मूल्य नियंत्रण का अभाव है, जिससे छोटे किसानों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।



विद्युत संशोधन विधेयक 2025 का भी तीखा विरोध तीखा विरोध करतें हुए भारतीय किसान यूनियन ने कहा कि यह विधेयक बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता खोलेगा और स्मार्ट मीटर लगाने से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मिलना मुश्किल हो जाएगा। यूनियन ने याद दिलाया कि 2020-21 के किसान आंदोलन में सरकार ने बिजली संशोधन बिल को वापस लेने की मांग मान ली थी, लेकिन अब फिर से इसे लाया जा रहा है।



देशभर में व्यापक असर

आज के भारत बंद में इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भागीदारी की है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि नए श्रम कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और नौकरी की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए ट्वीट किया: "आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने सड़कों पर हैं। मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा।"आम आदमी पार्टी ने भी बंद का समर्थन किया है। पार्टी ने कहा कि यह बंद किसी एक राजनीतिक दल के बारे में नहीं है, बल्कि करोड़ों मेहनतकश लोगों की स्वाभिमान, न्याय और अधिकारों के बारे में है।



पत्रकारों से बात करते हुए ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की जनरल सेक्रेटरी अमरजीत कौर ने कहा कि इस बार पार्टिसिपेशन का लेवल पहले से ज्यादा रहने की उम्मीद है. उन्होंने आगे कहा, “12 फरवरी की स्ट्राइक में 30 करोड़ से कम वर्कर्स शामिल नहीं होंगे. 9 जुलाई 2025 के प्रोटेस्ट में करीब 25 करोड़ वर्कर्स ने हिस्सा लिया था." ट्रेड यूनियनों का कहना है कि वे गवर्नमेंट की लेबर और इकोनॉमिक पॉलिसीज में बदलाव की मांग को लेकर यह बड़ा मोबिलाइजेशन कर रही हैं।



सेवाओं पर प्रभाव

बंद के कारण पूरे देश में बैंकिंग सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन और सरकारी कार्यालयों में व्यवधान हो रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सूचित किया है कि बैंक कर्मचारी संघों ने हड़ताल में भाग लेने की घोषणा की है, जिससे सेवाओं में बाधा आ सकती है।



इस बंद का उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में कोई खास असर नहीं पड़ा है जबकि पंजाब, ओडिशा, असम, केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में बंद व्यापाक रूप लेता हुआ दिखाई दे रहा है। ओडिशा में लगभग पूर्ण बंद जैसे हालात हैं जिससे नेशनल हाईवे समेत प्रमुख मार्गों पर पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है और जगह-जगह वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। वहीं, असम और केरल में प्रदर्शन का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. बड़े शहरों में दुकानें बंद हैं और परिवहन व्यवस्था लगभग ठप है।



कर्नाटक में बंद की आधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं की गई है फिर भी छिटपुट असर है।पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी प्रदर्शन के कारण यात्रा और परिवहन सेवाएं प्रभावित हुई हैं और कई जगहों को प्रोटेस्ट का हो रहे हैं।हालांकि, अस्पताल, एम्बुलेंस सेवाएं, दवा की दुकानें और अन्य आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं।



किसान संगठनों की मांगें

भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से मांग की है कि:



-भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौतों से कृषि संबंधी सभी प्रावधानों को वापस लिया जाए।

-यूपीओवी 1991 को स्वीकार न किया जाए, जो भारतीय किसानों के बीज अधिकारों को कमजोर करता है।

-ड्राफ्ट सीड बिल 2025 में गंभीर कमियों को दूर किया जाए और किसानों के अधिकारों की रक्षा हो।

-कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जाए।

-विद्युत संशोधन विधेयक 2025 को तुरंत वापस लिया जाए।

-चार नए श्रम कानूनों को रद्द किया जाए।

-मनरेगा को बहाल किया जाए और विकसित भारत-ग्राम अधिनियम 2025 को रद्द किया जाए।

विश्व श्रमिक संघ महासंघ (डब्ल्यूएफटीयू) ने भी अपनी 105 मिलियन सदस्यता के साथ भारत में मजदूरों और किसानों के संघर्ष का समर्थन किया है। संगठन ने कहा कि नए श्रम कानून संघ बनाने, सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल के अधिकार पर प्रहार करते हैं। किसान यूनियन और ट्रेड यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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