सस्ते शहद के आयात पर ब्रेक! सरकार का बड़ा कदम, दिसंबर 2026 तक 1400 डॉलर MEP रहेगा लागू
केंद्र सरकार ने प्राकृतिक शहद (Natural Honey) के आयात-निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए न्यूनतम निर्यात मूल्य (Minimum Export Price - MEP) की अवधि को बढ़ा दिया है। सरकार ने इस व्यवस्था को 31 दिसंबर 2026 तक लागू रखने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य सस्ते शहद के आयात को हतोत्साहित करना और घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा करना है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्राकृतिक शहद के निर्यात पर 1400 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन (FOB) का न्यूनतम मूल्य लागू रहेगा। DGFT ने अपने नोटिफिकेशन में कहा, “प्राकृतिक शहद पर मौजूदा न्यूनतम निर्यात मूल्य 1400 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की वैधता को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाया जाता है।”
क्या है सरकार का उद्देश्य
सरकार का यह कदम खासतौर पर सस्ते शहद के आयात को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर आने वाला शहद घरेलू बाजार को प्रभावित करता है, जिससे भारतीय मधुमक्खी पालकों को नुकसान होता है। ऐसे में MEP लागू रहने से सस्ते उत्पादों की एंट्री सीमित होगी और स्थानीय उत्पादकों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।
नोटिफिकेशन में क्या बदलाव किए गए
DGFT द्वारा जारी संशोधन के तहत शहद (HS Code 04090000) के निर्यात को ‘फ्री’ कैटेगरी में रखते हुए उस पर न्यूनतम निर्यात मूल्य की शर्त को जारी रखा गया है। पहले यह व्यवस्था 31 मार्च 2026 तक लागू थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। नोटिफिकेशन के “Effect of this Notification” सेक्शन में स्पष्ट किया गया है कि 1400 डॉलर प्रति टन का MEP अब साल के अंत तक प्रभावी रहेगा।
अन्य निर्यात पर भी नई शर्तें
इसी के साथ DGFT ने एक अलग अधिसूचना में पंख, खाल और अन्य पशु अवशेषों के निर्यात पर अतिरिक्त शर्तें भी लागू की हैं। इसका मकसद इन उत्पादों के व्यापार को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है।
एक्सपोर्ट के ताजा आंकड़े
ताजा एक्सपोर्ट आंकड़ों के मुताबिक, भारत शहद उत्पादन और निर्यात के मामले में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल से जनवरी) के दौरान देश से करीब 95,308 टन शहद का निर्यात हुआ, जिसकी कुल कीमत लगभग 176.56 मिलियन डॉलर रही। हालांकि, इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 1 लाख टन से ज्यादा शहद का निर्यात किया था, जिसकी वैल्यू 206.47 मिलियन डॉलर दर्ज की गई थी। भारतीय शहद की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है और इसका निर्यात मुख्य रूप से अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों में किया जाता है।
घरेलू बाजार और किसानों पर असर
सरकार के इस फैसले से मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को राहत मिलने की उम्मीद है। MEP लागू रहने से घरेलू शहद उत्पादकों को सस्ते विदेशी शहद से प्रतिस्पर्धा कम करनी पड़ेगी और उन्हें अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। साथ ही यह कदम भारत के शहद निर्यात को भी संतुलित और व्यवस्थित बनाए रखने में मदद करेगा।