बिहार कृषि मंत्री राम कृपाल यादव: किसान रजिस्ट्री से योजनाओं का लाभ, 45 लाख किसान आईडी तैयार
बिहार सरकार ने किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि 'किसान रजिस्ट्री' में पंजीकरण न होने पर भी राज्य और केंद्र सरकार की किसी भी कृषि योजना का लाभ रोका नहीं जाएगा। यह ऐलान बुधवार को राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में किया। उन्होंने कहा कि विभाग किसानों के हितों की रक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कोई भी किसान सरकारी सहायता से महरूम नहीं रहेगा।
क्या है किसान आईडी कार्ड और यह क्यों जरूरी है?
किसान आईडी कार्ड केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) परियोजना का एक अहम हिस्सा है। इस योजना के अंतर्गत देश के प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट (Unique) पहचान संख्या यानी 'किसान आईडी' दी जाती है। यह आईडी आधार कार्ड की तरह काम करती है, लेकिन यह विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए बनाई गई है। किसान आईडी कार्ड बनने के बाद किसान केंद्र और राज्य सरकार की सभी प्रमुख योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, कृषि ऋण, सब्सिडी पर खाद-बीज, और बाजार मूल्य समर्थन का लाभ सीधे और बिना किसी बिचौलिये के उठा सकता है। इस डिजिटल पहचान पत्र से किसान के जमीन के रिकॉर्ड, फसल का विवरण और बैंक खाते की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़ जाती है।
किसान आईडी कैसे बनवाएं?
कृषि मंत्री ने बताया कि किसान आईडी बनवाने के लिए किसानों को तीन सुविधाजनक विकल्प दिए जा रहे हैं। पहला, किसान ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। दूसरा, अपने नजदीकी 'वसुधा केंद्र' (Common Service Centre) पर जाकर आईडी बनवाई जा सकती है। तीसरा, विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित विशेष शिविरों में जाकर यह कार्ड तैयार कराया जा सकता है। मंत्री ने आश्वस्त किया कि ऐसे शिविर लगातार जारी रहेंगे ताकि कोई भी किसान इस सुविधा से वंचित न रहे। अब तक बिहार में एग्रीस्टैक योजना के तहत 45 लाख किसानों की आईडी तैयार की जा चुकी है। विभाग का लक्ष्य है कि राज्य के सभी पात्र किसानों को शीघ्रातिशीघ्र इस रजिस्ट्री में शामिल किया जाए।
उर्वरक कालाबाजारी पर सरकार की सख्त कार्रवाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, लेकिन कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यालय स्तर पर 'फ्लाइंग स्क्वाड' का गठन किया गया है, जो अचानक छापे मारकर अनियमितताओं की जांच करती है। 17 फरवरी 2026 तक 104 प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई हैं और 419 उर्वरक दुकानों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। यादव ने कहा कि किसानों के हक के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2028 तक 54 बाजार समितियां
बिहार सरकार के चौथे कृषि रोड मैप के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक 'बाजार समिति' स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत कुल 54 बाजार समितियां स्थापित की जाएंगी, जिनमें से 22 समितियां पहले से कार्यरत हैं। शेष 32 समितियों को 2028 तक चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। मौजूदा 22 बाजार समितियों में नवीनीकरण का कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। इनमें से सात का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नवीनीकरण के बाद किया जा चुका है। इन समितियों का मकसद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना है।
'समृद्ध किसान, विकसित बिहार'
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बैठक में 'समृद्ध किसान, विकसित बिहार' के अपने दृष्टिकोण को दोहराया। उन्होंने कहा कि विधानमंडल सत्र समाप्त होते ही वे अधिकारियों के साथ जिलों का दौरा शुरू करेंगे, किसानों से सीधे मिलेंगे और उनकी जमीनी समस्याओं को समझने व सुलझाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कृषि आय में वृद्धि और खेती को एक सम्मानजनक पेशे के रूप में स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। "हम किसी भी किसान को किसान रजिस्ट्री के दायरे से बाहर नहीं छोड़ेंगे और किसी को भी केंद्रीय सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।" राम कृपाल यादव, कृषि मंत्री, बिहार