Budget 2026: क्या बढ़ सकती है सोने की खरीद पर PAN/आधार लिमिट?

Preeti Nahar | Jan 29, 2026, 17:42 IST
Image credit : Gaon Connection Creatives

भारत में सोने की खरीद पर जो हालात बन रहे हैं, उनमें 2 लाख रुपये से अधिक की खरीद पर पैन कार्ड दिखाना अब जरूरी हो गया है। बढ़ती सोने की कीमतें इसे आम खरीदारों के लिए चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। ज्वैलरी व्यवसायी इस नियम में बदलाव की मांग कर रहे हैं ताकि खरीदारी को और आसान बनाया जा सके।

<p>सोना खरीदने पर PAN या आधार देने की मौजूदा 2 लाख रुपये की लिमिट <br></p>

Pan/Aadhaar Limit on Buying Gold: भारत में 2 लाख से अधिक को सोना खरीदने पर पैन कार्ड दिखाना अनिवार्य है। गोल्ड या गोल्ड ज्वैलरी खरीदने पर पैन कार्ड दिखाने का नियम भारत सरकार ने साल 2016 में लागू किया था। जब ये नियम लागू हुआ था तब देश में 10 ग्राम सोने का भाव 25,000 रुपये से 32,000 के बीच था, लेकिन अब साल 2026 में 10 ग्राम सोने का भाव 1,90,000 (ख़बर लिखे जाने तक) हो चुका है। अब सामान्य खरीदारी भी 2 लाख रुपये की लिमिट पार कर जाती है, जिससे आम खरीदार भी रिपोर्टिंग के दायरे में आ रहे हैं। इन्ही कारणों के कारण ज्वैलरी इंडस्ट्री, सरकार से आने वाले बजट में इस लिमिट को बढ़ाने की डिमांड कर रही है। साथ ही ज्वैलर्स, सरकार से सोना खरीदने पर PAN या आधार देने की मौजूदा 2 लाख की लिमिट को बढ़ाने की मांग कर रही है। बजट 2026 में सोने की बढ़ती कीमतों का असर दिख सकता है।



अभी क्या हैं नियम?



आयकर कानून की धारा 139A और नियम 114B के तहत, 2 लाख रुपये से ज़्यादा की सोने या गहनों की खरीद पर खरीदार को ज्वेलर को अपना PAN (Permanent Account Number) बताना पड़ता है। PAN न होने की स्थिति में, आधार नंबर भी स्वीकार किया जाता है। यह नियम 1 जनवरी 2016 से प्रभावी है।



सरल शब्दों में कहें तो, अगर आप 2 लाख रुपये से ज़्यादा का सोना या गहने खरीदते हैं, तो आपको ज्वेलर को अपना PAN कार्ड नंबर देना होगा। अगर आपके पास PAN कार्ड नहीं है, तो आप अपना आधार कार्ड नंबर भी दे सकते हैं। यह नियम 1 जनवरी 2016 से लागू है। 2016 में नियम 114B में कुछ बदलाव किए गए थे। उस समय, सोने और गहनों के लिए अलग-अलग नियम नहीं थे, बल्कि 2 लाख रुपये की एक ही सीमा तय की गई थी। तब से सोने के दाम तो बढ़ते ही जा रहे हैं, लेकिन यह सीमा अभी तक बढ़ाई नहीं गई है।



काग़जी कार्रवाई में गाँव के लोग परेशान



राजस्थान के रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट अल्पेश सोमानी के अनुसार, सरकार को इस लिमिट पर दोबारा विचार करना चाहिए। क्योंकि 2016 में 2026 तक सोने के भाव में 1,47,000 का अंतर है। रेट में इतना अंतर आ चुका है कि आम इंसान भी अगर सोना खरीदेगा तो आज के रेट पर ही। अगर 10 ग्राम से अधिक किसी को खरीदना है तो उसे पैन कार्ड डिटेल बताती होगी जिसका प्रोसेस आम जन-मानस या कहें गाँव के लोगों के लिए कठिन हो जाता है। इस लिमिट को बढ़ाने से ईमानदार ग्राहकों को अनावश्यक डॉक्युमेंटेशन से राहत मिलेगी। छोटे ज्वेलर्स के लिए काम आसान होगा और सिस्टम का फोकस असली बड़े ट्रांजेक्शन पर रहेगा।



चार्टर्ड अकाउंटेंट अल्पेश सोमानी आगे बताते हैं, "सरकार ने यह नियम इसलिए बनाया था ताकि ज्वेलर्स तय सीमा से ज्यादा सोना खरीदने वाले की जानकारी Statement of Financial Transactions (SFT) के जरिए इनकम टैक्स विभाग को दे सकें। इस SFT में खरीदार का PAN/आधार, ट्रांजेक्शन की रकम, पेमेंट का तरीका और तारीख जैसी जानकारी होती है, जिसका इस्तेमाल टैक्स चोरी पकड़ने के लिए किया जाता है।" वे सुझाव देते हैं कि या तो 2 लाख की सीमा को बढ़ाया जाए या फिर इसे सोने की मौजूदा कीमत या महंगाई से जोड़ा जाए, ताकि यह समय-समय पर अपने आप अपडेट होती रहे।



शादी, त्योहार पर सामान्य खरीदारी भी 2 लाख रुपये से ऊपर



शादी, त्योहार या पारिवारिक जरूरतों के लिए की गई सामान्य खरीदारी भी 2 लाख रुपये से ऊपर चली जाती है। छोटे और मध्यम वर्ग के खरीदार भी रिपोर्टिंग के दायरे में आ जाते हैं। ज्वेलर्स और ग्राहकों दोनों पर अतिरिक्त कंप्लायंस का बोझ बढ़ता है। एक तरफ इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चाँदी के रेट तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं सोना व्यापारियों का व्यापार बंद पड़ गया है।



लखनऊ के सोना व्यापारी सूरज रस्तोगी बताते हैं, "हमारा सोना खरीदने का व्यापार है। दूसरे ज़िलों से सोना खरीदते हैं, लेकिन आज की तारीख में आगे से सामान नहीं खरीद पा रहे हैं। व्यापारियों में डर है कि रोजाना जिस तरह से रेट बढ़ रहे हैं, अगर हमने सामान खरीद लिया तो अगले दिन फिर रेट ऊपर चला जा रहा है। उससे व्यापारी को आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी वजह से अभी ना ही कोई सामान खरीद रहा है ना ही कोई व्यापार चल रहा है। सब रुका हुआ है। कोई काम नहीं हो रहा। सोना व्यापारियों की अपनी ऐप होती है, वो हैंग हो चुकी है, रोजाना घटते-बढ़ते रेट्स के कारण।"



क्यों बनाया गया ये नियम?



साल 2016 में, काले धन और टैक्स चोरी को रोकने के उद्देश्य से, 2 लाख रुपये से अधिक के सोने या गोल्ड ज्वैलरी की खरीद पर PAN या आधार दिखाना अनिवार्य किया गया था। यह नियम इनकम टैक्स कानून की धारा 139 A और नियम 114B के तहत लागू हुआ था। उस समय 10 ग्राम सोने का भाव 25,000 रुपये से 32,000 रुपये के बीच था, इसलिए 2 लाख रुपये की लिमिट उचित लगती थी।



लेकिन पिछले 8-9 सालों में सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है। आज 10 ग्राम सोने का भाव 1,79,000 (ख़बर लिखे जाने तक) रुपये के आसपास है। ऐसे में, शादियों और त्योहारों के मौसम में मेकिंग चार्ज के साथ सोने के गहने खरीदने पर कुल कीमत आसानी से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इस स्थिति में, 2 लाख रुपये की खरीदारी पर PAN या आधार देना अब वाजिब नहीं लगता। ज्वैलरी इंडस्ट्री और एसोसिएशन की मांग है कि इस लिमिट को बढ़ाया जाए, क्योंकि अब यह लिमिट, कीमत बढ़ने की वजह से टूट रही है, न कि इसलिए कि लोग कोई बड़ा या संदिग्ध ट्रांजेक्शन कर रहे हैं।

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