Child Adoption: गोद लेने की प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए सीएआरए/CARA के नए निर्देश
भारत में बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए निर्देश जारी किए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत काम करने वाली इस संस्था ने राज्य दत्तक ग्रहण एजेंसियों से कहा है कि गोद लेने से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन किया जाए, बच्चों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएँ और उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।
गोद लेने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएँ जरूरी
सीएआरए ने साफ किया है कि किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित करने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है। यह व्यवस्था किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के तहत लागू होती है।
यदि कोई बच्चा अनाथ या परित्यक्त (Abandoned Child) का अर्थ ऐसे शिशु या बालक से है जिसे उसके जैविक माता-पिता या अभिभावकों ने जानबूझकर, बिना किसी वैध कारण के, बेसहारा छोड़ दिया है, तो पहले उसकी सही जाँच-पड़ताल की जाएगी, जैविक माता-पिता का पता लगाने की कोशिश होगी और पुनर्वास के प्रयास किए जाएंगे। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित किया जा सकता है। अगर बच्चे को उसके माता-पिता ने खुद संस्था को सौंपा है, तो ऐसे मामलों में दो महीने की अनिवार्य पुनर्विचार अवधि भी पूरी करनी होगी।
बच्चों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पर जोर
सीएआरए ने बच्चों और दत्तक व्यक्तियों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने पर भी विशेष जोर दिया है। कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ संस्थान बंद हो जाते हैं या उनका पंजीकरण रद्द हो जाता है, जिसके कारण पुराने रिकॉर्ड मिलना मुश्किल हो जाता है। इससे उन लोगों को परेशानी होती है जो बड़े होने के बाद अपने मूल परिवार के बारे में जानकारी जानना चाहते हैं।
इसी को देखते हुए राज्यों से कहा गया है कि सभी भौतिक और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और जरूरत पड़ने पर किसी नामित संस्था को सौंप दिए जाएं। साथ ही बिना तय प्रक्रिया के इन अभिलेखों को नष्ट या हटाया नहीं जा सकता।
बच्चों की पहचान सार्वजनिक न करने की सख्त हिदायत
सीएआरए ने यह भी निर्देश दिया है कि बाल देखभाल संस्थानों या दत्तक एजेंसियों में रहने वाले बच्चों की पहचान किसी भी स्थिति में सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। उनकी फोटो, वीडियो या पहचान से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया या किसी भी अन्य माध्यम पर साझा करना कानूनन प्रतिबंधित है।
राज्यों को यह भी कहा गया है कि अगर इस नियम का उल्लंघन होता है तो संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और कर्मचारियों को इस बारे में संवेदनशील बनाया जाए।
बच्चों के अधिकार और गोपनीयता की सुरक्षा पर जोर
इन नए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य गोद लेने की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी गरिमा व गोपनीयता को बनाए रखना है। सीएआरए ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की है कि इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि देश में गोद लेने की व्यवस्था ज्यादा भरोसेमंद और प्रभावी बन सके।