चीन की नई चाल! भारत की 3 राइस एक्सपोर्ट कंपनियों के लाइसेंस किए रद्द, ऐक्शन ले सकती है केंद्र सरकार
चीन ने भारतीय चावल निर्यात को बड़ा झटका देते हुए तीन कंपनियों के आयात लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। यह फैसला GMO के अंश मिलने के आधार पर लिया गया है, जिसे भारत में अवैध बताया जा रहा है। मामले को लेकर सरकार और निर्यातक सक्रिय हो गए हैं और जवाबी कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
सरकार उठा सकती है जवाबी कदम
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के कस्टम विभाग ने NM फूडइम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड, श्रीराम फूड इंडस्ट्री लिमिटेड और स्पॉन्ज एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के आयात लाइसेंस 17 अप्रैल से रद्द कर दिए हैं। इससे पहले करीब एक महीने पहले इन कंपनियों की चावल की खेपों को जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) के अंश मिलने के कारण खारिज कर दिया गया था। चीन में भारतीय दूतावास ने इस फैसले की जानकारी कृषि निर्यात संवर्धन प्राधिकरण (APEDA) को दी, जिसके बाद प्रभावित कंपनियों को सूचित किया गया। सूत्रों का कहना है कि चीन के इस फैसले का आधार कानूनी रूप से सही नहीं है और यदि निलंबन जारी रहा तो भारत सरकार जवाबी कदम उठा सकती है। प्रभावित कंपनियों ने इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर उठाने के लिए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और APEDA से संपर्क किया है।
GMO विवाद और जांच का मुद्दा
सूत्रों ने बताया कि चीन के कस्टम विभाग के नए आदेश की प्रभावी तिथि शुरुआती खेपों के खारिज होने के समय के आधार पर तय की गई है। मार्च में चीन ने भारतीय गैर-बासमती चावल की खेपों को GMO के अंश मिलने का हवाला देकर खारिज किया था, जबकि इन खेपों का परीक्षण चीन की सरकारी कंपनी चाइना सर्टिफिकेशन एंड इंस्पेक्शन ग्रुप (CCIC) द्वारा किया गया था। गौरतलब है कि भारत में कपास को छोड़कर अन्य किसी भी जेनेटिकली मॉडिफाइड फसल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं है। प्रभावित कंपनियों ने इस मुद्दे को APEDA और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सामने भी उठाया है, जबकि उद्योग सूत्रों का कहना है कि चीन खुद जेनेटिकली मॉडिफाइड चावल उगाता है और 2006 में यूरोपीय संघ ने चीनी चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड संदूषण का मुद्दा उठाया था।
निर्यात के आंकड़े और चीन की मांग
आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2024-25 में चीन को 1,80,805 टन गैर-बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत 79.43 मिलियन डॉलर थी। वहीं चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जनवरी के बीच यह मात्रा बढ़कर 1,86,013 टन हो गई, हालांकि मूल्य घटकर 65.59 मिलियन डॉलर रह गया। चीन द्वारा गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण 2019-20 तक भारतीय चावल का निर्यात बहुत कम था, जो उस वर्ष केवल 567 टन रहा, लेकिन 2020-21 में प्रतिबंध हटने के बाद यह बढ़कर 3,31,571 टन पहुंच गया। यूएसडीए के अनुसार 2025-26 में चीन का चावल आयात 3.1 मिलियन टन, निर्यात 1.9 मिलियन टन और उत्पादन 146.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है। व्यापार सूत्रों के मुताबिक, चीन ने शुरुआत में भारत के 16 राइस मिलों को मान्यता दी थी, लेकिन बाद में 100 से अधिक मिलों को निर्यात की अनुमति दे दी गई।