नारियल संवर्धन योजना: अब नारियल खेती बनेगी और फायदेमंद, उत्पादन से आय तक फोकस

Gaon Connection | Mar 18, 2026, 19:14 IST
सरकार ने नारियल की खेती में नवाचार लाने के लिए एक नई योजना की शुरुआत की है। इस पहल से न केवल नारियल का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। ₹350 करोड़ के वित्तीय प्रावधान से काजू और कोको जैसी अन्य फसलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
‘नारियल संवर्धन योजना’ की घोषणा 

भारत में नारियल सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। यही वजह है कि देश वैश्विक स्तर पर नारियल उत्पादन में अग्रणी बना हुआ है और दुनिया के कुल उत्पादन में करीब 30.37% हिस्सेदारी रखता है। देश में लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है और हर साल करोड़ों की संख्या में नारियल का उत्पादन होता है। इस फसल से सीधे तौर पर 3 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े हैं, जिनमें लगभग 1 करोड़ किसान शामिल हैं। ऐसे में नारियल खेती का महत्व सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में भी उभरकर सामने आता है।



‘नारियल संवर्धन योजना’ की घोषणा

इसी अहमियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बजट 2026-27 में ‘नारियल संवर्धन योजना’ की घोषणा की है। इस योजना का मकसद नारियल की खेती को अधिक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाना है। सरकार चाहती है कि किसान पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नई तकनीकों को अपनाएं, जिससे उत्पादन भी बढ़े और उनकी आय में भी सुधार हो। यह पहल उच्च-मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



नारियल का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ेगी

इस योजना के तहत सबसे बड़ा फोकस उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर रहेगा। देश के प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में पुराने और कम फल देने वाले पेड़ों को हटाकर नई और उन्नत किस्मों के पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही किसानों को बेहतर खेती तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और संसाधनों से जोड़ा जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को बेहतर गुणवत्ता के नारियल के लिए अच्छे दाम मिल सकेंगे।



सरकार ने इस योजना को 350 करोड़ रुपये के उच्च-मूल्य कृषि फंड के तहत शामिल किया है। इस फंड में नारियल के साथ-साथ काजू और कोको जैसी नकदी फसलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से हटाकर ऐसी फसलों की ओर प्रेरित करना है, जिनसे उन्हें अधिक मुनाफा मिल सके और बाजार में उनकी बेहतर हिस्सेदारी बन सके।



बेहतर पौधों में निवेश की जरूरत

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में नारियल की औसत उत्पादकता करीब 9,871 नारियल प्रति हेक्टेयर है, जो यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में अभी और सुधार की काफी संभावनाएं हैं। सही तकनीक, बेहतर पौधों और निवेश के जरिए उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति भी और मजबूत होगी।



हालांकि फिलहाल यह योजना अभी प्रारंभिक चरण में है और इसके क्रियान्वयन को लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कितनी धनराशि दी जाएगी और उसका उपयोग किस प्रकार किया जाएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में बताया है कि इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।



‘नारियल संवर्धन योजना’के फायदे

इस योजना के लागू होने के बाद किसानों को कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद है। उन्हें बेहतर किस्म के पौधे मिलेंगे, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और गुणवत्ता में सुधार होगा। आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा। इसके अलावा रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और निर्यात के जरिए किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा। कुल मिलाकर, नारियल संवर्धन योजना खेती को लाभकारी बनाने और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि भारत को नारियल उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

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