Cyber Fraud: ग्रामीण भारत में 400% बढ़ा डिजिटल ठगी का बढ़ता ख़तरा

Gaon Connection | Mar 24, 2026, 12:29 IST
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आधुनिक तकनीक के युग में साइबर अपराध तेजी से अपने पांव जमा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय का आंकड़ा दर्शाता है कि 2021 से 2024 की अवधि के बीच साइबर शिकायतों में 400% की अधिकता देखी गई। इसके साथ ही, साइबर ठगी से होने वाले आर्थिक नुकसान में तीन गुना इजाफा हुआ है।
साइबर डाकुओं से बचने के लिए क्या करें?

पूरे देश में, खासकर ग्रामीण इलाकों में, साइबर अपराध एक बड़ा खतरा बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2024 के बीच साइबर अपराध की शिकायतों में 400% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। 2021 में जहाँ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर करीब 4.5 लाख शिकायतें थीं, वहीं 2024 तक यह संख्या 22.6 लाख तक पहुँच गई। यह बढ़ोतरी डिजिटल दुनिया के बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती साइबर ठगी की गंभीरता को भी दिखाती है।



एक साल में 3 गुना बढ़ी साइबर ठगी

साल 2024 में स्थिति और भी चिंताजनक है। इस साल NCRP पर लगभग 22.6 लाख शिकायतें आईं, जो 2023 के मुकाबले 42% ज्यादा हैं। साइबर ठगी से लोगों को हुए आर्थिक नुकसान का आंकड़ा भी चौंकाने वाला है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2024 में साइबर फ्रॉड से करीब 22,845 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि 2023 में यह आँकड़ा लगभग 7,500 करोड़ रुपये था। यानी, सिर्फ एक साल में साइबर ठगी से होने वाला नुकसान करीब तीन गुना बढ़ गया।



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बढ़ रहे हैं डि़जिटल अरेस्ट के मामले

इस बढ़ते खतरे के बीच "डिजिटल अरेस्ट" जैसे नए तरह के फ्रॉड भी सामने आ रहे हैं। इन घोटालों में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे वीडियो कॉल या फोन पर फर्जी मामलों, जैसे ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या गिरफ्तारी का हवाला देकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। डर और घबराहट में लोग अपनी निजी जानकारी दे देते हैं या पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होता है।



क्यों बढ़ रहे हैं साइबर फ्रॉड?

डिजिटल प्लेटफॉर्म का तेजी से विस्तार, इंटरनेट और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुँच और साइबर जागरूकता की कमी इस समस्या के मुख्य कारण हैं। ग्रामीण इलाकों में, जहाँ डिजिटल साक्षरता कम है, लोग ऐसे फ्रॉड का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। ठग नई तकनीकों और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल करके लोगों को फंसा लेते हैं।



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कैसे बचें साइबर ठगी से?

ऐसे में, सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। अगर कोई फोन या वीडियो कॉल पर आपको डराने या धमकाने की कोशिश करे, तो घबराएं नहीं। यह समझना जरूरी है कि कोई भी पुलिस या जाँच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की प्रक्रिया नहीं करती। किसी भी हालत में OTP, आधार, पैन या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें और न ही किसी अनजान व्यक्ति को पैसे भेजें। अगर आपको ठगी का शक हो, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।



कुल मिलाकर, बढ़ते साइबर अपराध के इस दौर में तकनीक के साथ-साथ सतर्क रहना भी बहुत जरूरी है। सरकार इस दिशा में लगातार कदम उठा रही है, लेकिन आम नागरिकों की जागरूकता और सतर्क व्यवहार ही इस खतरे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। "जागरूकता ही बचाव" आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

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