देश में मौसम का दोहरा असर: उत्तर भारत ठंड की चपेट में, दक्षिण में बारिश का खतरा

Gaon Connection | Jan 08, 2026, 17:25 IST
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भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में घना से बहुत घना कोहरा, शीत दिवस और शीतलहर की स्थिति बनी रह सकती है। वहीं बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे दबाव के कारण तमिलनाडु और केरल में भारी से बहुत भारी बारिश और समुद्र में तेज़ हवाओं और ऊँची लहरों की चेतावनी जारी की गई है।

<p>कोहरा, पाला और शीतलहर से उत्तर भारत बेहाल, तमिलनाडु–केरल में भारी वर्षा की चेतावनी<br><br></p>
देश में मौसम का मिज़ाज एक साथ कई मोर्चों पर सख़्त बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले 5-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत और बिहार में और अगले 2–3 दिनों तक मध्य भारत, उत्तर-पूर्वी भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग हिस्सों में सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रह सकता है। इसके साथ ही कई राज्यों में शीत दिवस और शीतलहर की स्थिति बनने की प्रबल संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के ऊपर बना गहरा अवदाब (Deep Depression) दक्षिण भारत में तेज़ बारिश और समुद्री हालात को बिगाड़ सकता है।

पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में घने से बहुत घने कोहरे की स्थिति दर्ज की गई, जहां कई जगह दृश्यता 50 मीटर से भी कम रही। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई शहरों—बरेली, आगरा, झांसी, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर में कुछ समय के लिए दृश्यता शून्य तक पहुंची। बिहार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और त्रिपुरा के इलाकों में भी घना कोहरा छाया रहा। कम दृश्यता के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात पर असर पड़ा और सुबह-शाम की आवाजाही जोखिमभरी बनी रही।

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IMD के अनुसार अगले 1–3 दिनों में उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश और बिहार के अलग-अलग हिस्सों में शीत दिवस की स्थिति बन सकती है। वहीं अगले 2–3 दिनों के दौरान हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में शीतलहर चलने की बहुत अधिक संभावना है। उत्तराखंड के कुछ इलाकों में ग्राउंड फ्रॉस्ट (पाला) भी दर्ज किया गया है, जिससे फसलों और खुले में रहने वाले लोगों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

तापमान के आंकड़े सर्दी की तीव्रता को साफ दिखाते हैं। जम्मू–कश्मीर–लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 0°C से नीचे दर्ज हुआ। उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तरी मध्य प्रदेश में 0–5°C के बीच, जबकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कई जगह 5–10°C के बीच तापमान रहा। देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 2.5°C सीकर (पूर्वी राजस्थान) में दर्ज किया गया। अगले दिनों में पूर्वी भारत, गुजरात और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान में बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं, जबकि मध्य भारत और महाराष्ट्र में धीरे-धीरे 2–3°C की बढ़ोतरी संभव है।

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दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के ऊपर बना गहरा अवदाब पश्चिम–उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए 9 जनवरी की शाम/रात के आसपास श्रीलंका तट को पार कर सकता है। इसके प्रभाव से 9–10 जनवरी को तमिलनाडु में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की बहुत अधिक संभावना है, जबकि 10 जनवरी को केरल में भी भारी बारिश हो सकती है। तेज़ हवाओं (50–70 किमी/घंटा) और खराब समुद्री हालात के चलते तटीय और समुद्री गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।IMD ने 8–10 जनवरी के दौरान दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, श्रीलंका तट के आसपास, मन्नार की खाड़ी और तमिलनाडु–पुडुचेरी तटों पर समुद्र की स्थिति बहुत खराब रहने की चेतावनी दी है। मछुआरों को इन क्षेत्रों में समुद्र में न जाने की सख़्त सलाह दी गई है, क्योंकि तेज़ हवाओं और ऊंची लहरों से जान-माल का खतरा बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य पर असर: कोहरा और ठंड दोनों चुनौती

घने कोहरे में मौजूद कण और प्रदूषक सांस की नलियों में जाकर खांसी, घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ बढ़ा सकते हैं, खासकर दमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों में। आंखों में जलन और संक्रमण का जोखिम भी रहता है। शीतलहर और शीत दिवस के दौरान लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से फ्लू, नाक बहना/जाम होना, फ्रॉस्टबाइट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मौसम विभाग ने अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, शरीर को सूखा रखने और पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी है।

किसानों और पशुपालकों के लिए अहम सलाह

कम तापमान, पाला और शीतलहर से रबी फसलों को नुकसान हो सकता है। प्रभावित राज्यों में किसानों को शाम के समय हल्की और बार-बार सिंचाई, मल्चिंग अपनाने और सब्ज़ियों की नर्सरी व नए पौधों को पॉलीथीन शीट से ढकने की सलाह दी गई है। दक्षिण भारत में जहां भारी बारिश की संभावना है, वहां परिपक्व फसलों की समय पर कटाई, खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी और बेल वाली सब्ज़ियों में सहारा (स्टेकिंग) देने पर जोर दिया गया है। पशुपालकों को रात में पशुओं को शेड के भीतर रखने और पोल्ट्री में पर्याप्त गर्मी की व्यवस्था करने को कहा गया है।

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