क्या है e-NAM? 10 साल में कैसे बदली किसानों की कमाई और मंडियों की तस्वीर
भारत में कृषि क्षेत्र लाखों किसानों की आजीविका का आधार है, लेकिन पारंपरिक मंडी व्यवस्था में बिचौलिए, कम कीमत और जानकारी की कमी जैसी समस्याएं लंबे समय से चली आ रही थीं। इन्हीं चुनौतियों को दूर करने के लिए 14 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) की शुरुआत की गई। आज यह प्लेटफॉर्म "एक राष्ट्र, एक बाजार" के सपने को हकीकत में बदल रहा है।
e-NAM के जरिए किसानों को मिला बाजार
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर बताया कि नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (e-NAM) ने अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस डिजिटल पहल ने भारतीय कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने कहा कि e-NAM के जरिए किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बड़ा बाजार मिला है, पारदर्शी व्यापार व्यवस्था मजबूत हुई है और बेहतर दाम मिलने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने इसे किसानों की ताकत बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
e-NAM क्या है?
e-NAM (National Agriculture Market) एक पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है। यह मौजूदा APMC मंडियों को डिजिटल रूप से जोड़ता है, ताकि किसान अपनी फसल को सिर्फ स्थानीय मंडी तक सीमित न रखकर पूरे देश में बेच सकें। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो पारदर्शी नीलामी, रीयल-टाइम प्राइस डिस्कवरी और डायरेक्ट पेमेंट की सुविधा देता है। वेबसाइट enam.gov.in और मोबाइल ऐप के जरिए किसान, व्यापारी और खरीदार आसानी से जुड़ सकते हैं।
e-NAM क्यों शुरू किया गया?
- एक राष्ट्र, एक बाजार की अवधारणा को लागू करना।
- बिचौलियों की भूमिका कम करना और किसानों को सीधे बेहतर खरीदारों से जोड़ना।
- कीमतों में पारदर्शिता लाना और गुणवत्ता के आधार पर उचित मूल्य सुनिश्चित करना।
- इंटर-स्टेट व्यापार को बढ़ावा देना, ताकि किसान ज्यादा से ज्यादा कमाई कर सकें।
- कृषि विपणन को डिजिटल और कुशल बनाना।
इससे पहले किसान अपनी फसल केवल स्थानीय मंडी में बेच पाते थे, जहाँ दाम कम और बिचौलिए ज्यादा होते थे। e-NAM ने इस व्यवस्था को बदल दिया।
e-NAM कैसे काम करता है?
e-NAM का पूरा प्रोसेस स्टेप-बाय-स्टेप और आसान है:
रजिस्ट्रेशन: किसान enam.gov.in पर या नजदीकी APMC मंडी में "Farmer" के रूप में रजिस्टर कर सकते हैं। आधार, बैंक डिटेल्स और भूमि दस्तावेज अपलोड करने होते हैं।
उत्पाद की एंट्री: फसल मंडी पहुंचने पर गेट एंट्री होती है। लॉट आईडी जनरेट होती है।
क्वालिटी टेस्ट (Assaying): फसल की गुणवत्ता जांच की जाती है – सफाई, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध है।
ऑनलाइन नीलामी: व्यापारी देशभर से ऑनलाइन बोली लगाते हैं। रीयल-टाइम बिडिंग होती है।
ट्रेडिंग और पेमेंट: सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को फसल बिकती है। पेमेंट सीधे किसान के बैंक खाते में आ जाता है।
मोबाइल ऐप पर 247 फसलों की लाइव कीमतें, मंडी मैप और 100 किमी तक की लोकेशन जानकारी मिलती है। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-270-0224 किसी भी समस्या के समाधान के लिए उपलब्ध है।
किसानों के लिए e-NAM के फायदे
यह प्लेटफॉर्म किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ता है, जिससे उन्हें अपनी उपज के लिए बेहतर दाम मिलते हैं। बिचौलियों के खत्म होने से किसानों को सीधा फायदा हो रहा है। यह सब ऑनलाइन होने के कारण पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। किसान अब अपने घर बैठे ही पूरे देश के बाजार में अपनी फसल बेच सकते हैं। इससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है। छोटे किसान भी FPO (Farmer Producer Organizations) के ज़रिए इस बड़े बाज़ार का हिस्सा बन पा रहे हैं।
e-NAM से किसानों की आय बढ़ी है और फसल खराब होने से होने वाला नुकसान भी कम हुआ है। इस प्लेटफॉर्म पर किसानों को कई अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलती हैं। जैसे कि उपज की क्वालिटी टेस्ट, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की सुविधा। साथ ही, वे लाइव प्राइस अपडेट भी देख सकते हैं। इससे उन्हें यह तय करने में मदद मिलती है कि कब और कहाँ अपनी फसल बेचनी है।
कैसे जुड़ें?
अपनी नजदीकी मंडी में संपर्क करें या enam.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करें। ऐप डाउनलोड करके लाइव प्राइस चेक करें। किसी समस्या के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-270-0224 पर कॉल करें। e-NAM किसानों की मेहनत को सही दाम दिलाने का विश्वसनीय साथी बन चुका है। यह डिजिटल क्रांति जारी रहेगी और भारतीय कृषि को और मजबूत बनाएगी।