Economic Survey 2025-26 : वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि की भूमिका रहेगी अहम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज़ की है, जिसमें पशुपालन और मत्स्य पालन का प्रमुख योगदान है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रही।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश आर्थिक सर्वे 2025-26 में कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की भूमिका अहम होगी। इसके साथ ही आने वाले बजट में कृषि क्षेत्र पर अधिक फोकस रहने की संभावना बढ़ गई है। सर्वे में कहा गया है कि वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी में 6.8-7.2 प्रतिशत बढ़ोत्तरी का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष के 7.4 प्रतिशत से थोड़ा कम है। साथ ही, सुधारों और मैक्रो-इकॉनॉमिक स्थिरता से मध्यम अवधि में वृद्धि क्षमता 7 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। सर्वे में भारत की बाहरी स्थिरता को प्रमुख ताकत बताया गया, जो वैश्विक अस्थिरता से अपेक्षाकृत सुरक्षित रखती है। हालांकि, वैश्विक झटकों का प्रभाव विलंब से आ सकता है, इसलिए नीति-निर्माताओं को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
कृषि क्षेत्र को लेकर आर्थिक सर्वे में खास बातें-
- सर्वे के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र ने स्थिर कीमतों पर औसतन 4.4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की है, जिसमें पशुपालन और मत्स्य पालन ने प्रमुख योगदान दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि विकास दर 3.5 प्रतिशत रही।
- आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि मौजूदा कीमतों पर भारत की राष्ट्रीय आय में कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों का योगदान लगभग पांचवां हिस्सा है, लेकिन देश के कार्यबल में इनकी हिस्सेदारी 46.1% है।
- वित्त वर्ष 2025-2026 की पहली तिमाही में अनुकूल मानसून से कृषि GVA में 3.6% की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो पिछले साल की 2.7% से बेहतर है, लेकिन लंबी अवधि के औसत 4.5% से कम रही।फसल क्षेत्र में उतार-चढ़ाव जारी है, जो सीमित उत्पादकता लाभ को दर्शाता है। वहीं, पशुधन और मत्स्यपालन जैसे क्षेत्र 5-6% की स्थिर दर से बढ़े हैं और इनका हिस्सा बढ़ने से कुल कृषि विकास में स्थिरता आई है।
- सर्वे ने कृषि क्षेत्र की मजबूती और संबद्ध गतिविधियों (पशुपालन मत्स्यपालन) के योगदान को रेखांकित करते हुए उत्पादकता बढ़ाने और निर्यात स्थिरता पर जोर दिया है।
- कृषि मशीनरी पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया। उर्वरक इनपुट जैसे सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड और अमोनिया पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया है। इसका फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है।
- कृषि निर्यात 34.5 अरब डॉलर से बढ़कर 51.1 अरब डॉलर हो गया (8.2% CAGR)। इस दौरान कृषि निर्यात का हिस्सा 11-14% के बीच रहा। वैश्विक कृषि निर्यात 2022 में 2.3 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में 2.4 ट्रिलियन डॉलर हो गया।
- डॉक्यूमेंट में कहा गया है, कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में रोजगार का हिस्सा काफी अधिक होने की वजह से यह सेक्टर भारत की कुल ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए, सभी को साथ लेकर चलने वाली ग्रोथ और खाद्य सुरक्षा बनाए रखते हुए इसे और मजबूत करने के लिए कृषि क्षेत्र के परफॉर्मेंस को मजबूत करना जरूरी है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित मौसम, बढ़ता तापमान और चरम मौसमी घटनाएँ फसल उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं। मानसून पर निर्भर क्षेत्रों में जल की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
- भारत की कृषि विकास दर वैश्विक औसत 2.9 प्रतिशत से अधिक है, फिर भी अनाज, मक्का, सोयाबीन और दालों की प्रति हेक्टेयर उपज वैश्विक औसत से कम है। साल 2022-23 में कुल सिंचित क्षेत्र बढ़कर 55.8 प्रतिशत हुआ, जो 2001-02 में 41.7 प्रतिशत था, लेकिन राज्यों और फसलों के बीच भारी असमानता बनी हुई है। उदाहरण के लिए, मोटे अनाजों में सिंचाई कवरेज 15 प्रतिशत से कम है, जबकि चावल में यह लगभग 67 प्रतिशत है।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) से 11 करोड़ से अधिक किसानों को सीधी आय सहायता मिली है, जबकि PM-KISAN मानधन योजना से 23.61 लाख किसानों को पेंशन मिल रही है। सर्वे में ग्रामीण भारत की मजबूती पर जोर देते हुए कहा गया कि कृषि क्षेत्र ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद स्थिरता दिखाई है। पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों ने ग्रामीण रोजगार और आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।