मनरेगा की जगह नया कानून: VB-GRAM-G Act 2025 क्या कहता है आर्थिक सर्वे 2025-26
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक सर्वे 2025-26 पेश किया। इसमें ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा की कमियों का ज़िक्र सामने रखतें हुए उन्होंने एक VB-GRAM-G Act 2025 के बारें में जानकारी दी है।
सर्वे बताता है कि 2005 से चल रही मनरेगा योजना ने "ग्रामीण परिवारों को अकुशल काम के लिए कम से कम 100 दिनों का गारंटीड रोजगार दिया, मजदूरी को स्थिर किया और बुनियादी ढांचा बनाया। पिछले सालों में इस योजना में कई सुधार हुए। सर्वे के मुताबिक, महिलाओं की भागीदारी FY14 में 48 प्रतिशत से बढ़कर FY25 में 58.1 प्रतिशत हो गई।आधार से पेमेंट शुरू हुई, ई-पेमेंट आम हो गई, और जियो-टैगिंग से काम की निगरानी बेहतर हुई।
लेकिन क्या-क्या गड़बड़ियां थीं?
सर्वे में लिखा है कि अच्छाइयों के साथ-साथ मनरेगा में गहरी समस्याएं भी थीं। कई राज्यों में मॉनिटरिंग से पता चला - जमीन पर काम नहीं हो रहा, खर्च और काम की प्रगति मैच नहीं कर रही, मजदूरी वाले काम में मशीनों का इस्तेमाल हो रहा था, और डिजिटल हाजिरी सिस्टम को बार-बार बायपास किया जा रहा था। सर्वे आगे बताता है, "समय के साथ गड़बड़ियां जमा होती गईं, और महामारी के बाद केवल थोड़े से परिवारों ने पूरे 100 दिन का रोजगार पूरा किया।" इससे साफ हो गया कि "जबकि डिलीवरी सिस्टम में सुधार हुआ, मनरेगा की समग्र संरचना अपनी सीमा तक पहुंच गई है।"
रोजगार की मांग क्यों घटी?
दिलचस्प बात ये है कि मनरेगा की मांग ही कम हो गई। सर्वे के आंकड़े बताते हैं, "पर्सन डेज़ महामारी के चरम FY21 में 389.09 करोड़ से घटकर FY26 में (31 दिसंबर 2025 तक) लगभग 183.77 करोड़ रह गए, जो 53 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट है।इस गिरावट का कारण बतातें हुए सर्वे समझाता है, मनरेगा की मांग में यह गिरावट ग्रामीण बेरोजगारी में कमी के साथ मेल खाती है - 2020-21 में 3.3 प्रतिशत से 2023-24 में 2.5 प्रतिशत तक, जो बताता है कि कई ग्रामीण परिवार गैर-कृषि या अन्य गैर-मनरेगा काम तक पहुंच रहे हैं।NABARD की नवंबर 2025 की सर्वे भी कहती है कि "ग्रामीण आर्थिक बुनियादी बातें मजबूत हुई हैं - अच्छा उपभोग, ऊंची आय वृद्धि, बढ़ता निवेश, बेहतर फॉर्मल क्रेडिट एक्सेस।
क्या है VB-GRAM-G Act 2025 ?
सर्वे बताता है, इस पृष्ठभूमि में, सरकार ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 बनाया है, जिसे VB-G RAM-G Act 2025 भी कहते हैं।सर्वे के मुताबिक,यह अधिनियम मनरेगा का व्यापक वैधानिक ओवरहॉल है, जो ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक विजन के साथ जोड़ता है, जबकि जवाबदेही, इंफ्रास्ट्रक्चर परिणाम और आय सुरक्षा को मजबूत करता है।
नए कानून की मुख्य बातें-
1. ज्यादा दिन की गारंटी:
पुराने कानून में 100 दिन थे। सर्वे बताता है कि नए कानून में प्रति वित्तीय वर्ष प्रति ग्रामीण परिवार 125 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी" है।
2. काम का फोकस साफ:
पहले कई तरह के बिखरे हुए काम होते थे। अब चार स्पष्ट प्राथमिकता वाले क्षेत्र - जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका और चरम मौसम तथा आपदा तैयारी को कम करने के काम।
3. बेरोजगारी भत्ता:
पहले भी भत्ते का प्रावधान था लेकिन "डिसेंटाइटलमेंट क्लॉज़ मौजूद थे।अब डिसेंटाइटलमेंट क्लॉज़ हटा दिए गए, अधिकार-आधारित पात्रता को मजबूत करते हुए। सरल भाषा में समझें तो पहले भी बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान था, लेकिन कुछ शर्तों के कारण मजदूर अक्सर इससे वंचित रह जाते थे। अब ये शर्तें हटा दी गई हैं, जिससे काम न मिलने पर भत्ता पाना मजदूर का स्पष्ट और मजबूत अधिकार बन गया है।
4. पॉज विंडो:
सर्वे बताता है कि राज्यों को 60 दिनों तक की अवधि के लिए, चरम बुवाई और कटाई सीजन के दौरान, जब काम नहीं किए जाएंगे, अधिसूचित करने का अधिकार है, जिससे कृषि संचालन के दौरान खेतिहर मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
5. फंडिंग में बदलाव:
पहले फंडिंग मांग के आधार पर होती थी, जिससे कई बार आवंटन अनिश्चित रहता था। अब राज्यों को उनके विकास स्तर और जरूरतों के अनुसार पहले से तय फंड दिया जाएगा, ताकि सभी क्षेत्रों में बराबरी, न्याय और संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।
मजदूरी और प्रशासन
सर्वे के अनुसार, नए कानून में यह तय किया गया है कि मजदूरों को हफ्ते में या काम पूरा होने के 15 दिन के भीतर मजदूरी मिल जाए। साथ ही योजना को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए प्रशासनिक खर्च की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है, ताकि फील्ड स्टाफ और निगरानी व्यवस्था मजबूत हो सके।
प्लानिंग और मॉनिटरिंग
सर्वे के अनुसार, VB-G RAM-G के तहत योजना बनाना गांव की जरूरतों से शुरू होगा। विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं बनाई जाएंगी, जिन्हें PM गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय प्रणालियों से जोड़ा जाएगा। ग्राम पंचायतें कुल लागत के हिसाब से कम से कम आधे काम को खुद लागू करेंगी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को शिकायतों की जांच, गंभीर गड़बड़ी पर फंड रोकने और सुधार के निर्देश देने का अधिकार दिया गया है। डिजिटल तकनीक के जरिए काम की रियल-टाइम निगरानी होगी, GPS से ट्रैकिंग की जाएगी और हर छह महीने में सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा। इसके अलावा, इस योजना के तहत बनी सभी संपत्तियों को एक राष्ट्रीय ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा, ताकि विकास कार्य एकीकृत और समन्वित रूप से आगे बढ़ सकें।
सर्वे के अनुसार, मनरेगा ने भागीदारी बढ़ाने, डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शिता के मामले में अच्छे नतीजे दिए, लेकिन कुछ ढांचागत कमजोरियों के कारण इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया। समय के साथ ग्रामीण रोजगार की जरूरतें बदल गईं, जिससे योजना के उद्देश्य और डिजाइन की दोबारा समीक्षा जरूरी हो गई। इसी को ध्यान में रखते हुए नया कानून बनाया गया है, जो पुराने सुधारों को आगे बढ़ाते हुए एक आधुनिक, जवाबदेह और इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित ढांचे के जरिए उनकी कमियों को दूर करता है।