अगरवुड, काजू, कोको, नारियल और पहाड़ी मेवों से किसानों की बढ़ेगी कमाई, हाई वैल्यू फसलों पर सरकार का बड़ा फोकस
High Value Crops- केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में खेती को ज्यादा लाभकारी बनाने के लिए हाई वैल्यू फसलों पर जोर दिया है। सरकार का फोकस अब केवल गेहूं-धान जैसी पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी फसलों पर है जिनसे कम जमीन में ज्यादा आमदनी हो सकती है। इनमें अगरवुड, काजू, कोको, नारियल, अखरोट और बादाम जैसी फसलें शामिल हैं। इन फसलों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने, निर्यात बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार सृजन पर काम किया जाएगा। समझते हैं कि पारंपरिक खेती से कैसे अलग है इन फसलों की खेती, साथ ही इन फसलों से कैसे कमाई की जा सकती है?
1) अगरवुड - उत्तर-पूर्व के किसानों के लिए बड़ा अवसर
अगरवुड दुनिया की सबसे महंगी सुगंधित लकड़ियों में गिनी जाती है। इसका इस्तेमाल इत्र, धार्मिक कार्यों, लक्जरी उत्पादों और आयुर्वेदिक उपयोगों में होता है। जनवरी 2026 तक भारत में लगभग 150 मिलियन अगरवुड पेड़ हैं, जिनमें से करीब 90 प्रतिशत उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्थित हैं। त्रिपुरा में अकेले अगरवुड बाजार का वार्षिक कारोबार लगभग 2000 करोड़ रुपये तक आंका गया है।
अगरवुड से कैसे होती है कमाई?
अगरवुड पेड़ से लकड़ी, तेल, चिप्स, पाउडर, बीड्स और अगरवुड चाय जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग ज्यादा है। भारत सरकार उत्तर-पूर्वी राज्यों, खासकर त्रिपुरा और असम में इसकी खेती बढ़ाने, प्रोसेसिंग यूनिट लगाने और निर्यात बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
2) काजू खेती बंजर जमीन को बना सकती है सोना
काजू एक ऐसी नकदी फसल है, जो कम उपजाऊ और सूखी जमीन में भी अच्छी तरह उग सकती है। इसी वजह से इसे “बंजर भूमि का स्वर्ण भंडार” कहा जाता है। बागवानी सांख्यिकी इकाई, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार भारत में काजू की खेती करीब 12.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है और उत्पादन 8 लाख टन से ज्यादा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 369.17 मिलियन डॉलर का काजू निर्यात किया। प्रमुख बाजारों में UAE, वियतनाम, जापान, नीदरलैंड और सऊदी अरब शामिल हैं।
किसानों को फायदा कैसे?
काजू खेती से कम पानी वाली जमीन का उपयोग हो सकता है। साथ ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर रोजगार और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं।
3) कोको- इंटरक्रॉपिंग से डबल फायदा
कोको वही फसल है जिससे चॉकलेट, कोको पाउडर और कोको बटर बनता है। भारत में इसे मुख्य फसल की तरह कम, लेकिन नारियल और सुपारी के साथ इंटरक्रॉपिंग के रूप में ज्यादा उगाया जाता है। यह फसल 40-50% धूप में भी अच्छी तरह बढ़ती है, इसलिए ऊंचे पेड़ों के नीचे उगाई जा सकती है। इससे किसान एक ही खेत से दो फसलों की कमाई कर सकते हैं। निर्यात की बात करें तो भारत में 2024-25 में करीब 32.91 हजार मीट्रिक टन कोको उत्पादन हुआ, जबकि निर्यात 295.58 मिलियन डॉलर तक पहुँचा। भारत के आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य कोको उत्पादन में सबसे आगे हैं।
4) नारियल-पुराने पेड़ों की जगह नई हाई-यील्ड किस्में
भारत नारियल उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। यह क्षेत्र करीब 3 करोड़ लोगों और लगभग 1 करोड़ किसानों की आजीविका से जुड़ा है। वर्ष 2024-25 में भारत ने 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से करीब 13.97 मिलियन टन नारियल उत्पादन किया।
सरकार ने नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना 'नारियल प्रोत्साहन योजना' बजट 2026-27 लेकर आई। इस योजना के तहत पुराने और कम उपज देने वाले पेड़ों को हटाकर नई हाई-प्रोडक्टिव किस्में लगाई जाएँगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले सालों में नारियल के निर्यात में भी तेजी देखी गई। साल 2024-25 में नारियल और नारियल आधारित उत्पादों का निर्यात 513 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले साल से 25% ज्यादा है।
5) पहाड़ी किसानों के लिए अखरोट-बादाम: कम जमीन में ज्यादा मुनाफा
ठंडे इलाकों में अखरोट और बादाम जैसी मेवा फसलें किसानों के लिए शानदार विकल्प हैं। बागवानी सांख्यिकी इकाई, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, भारत में वर्ष 2024-25 में बादाम का उत्पादन 13.94 हजार मीट्रिक टन रहा, जिसकी खेती मुख्यतः जम्मू एवं कश्मीर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में केंद्रित है। जम्मू एवं कश्मीर देश के कुल उत्पादन में 83 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, तथा कश्मीर क्षेत्र में प्रमुख प्रसंस्करण और विनिर्माण केंद्र स्थित हैं। जम्मू-कश्मीर राज्य इसमें सबसे आगे है। भारत में 2024-25 में 13.94 हजार मीट्रिक टन बादाम उत्पादन हुआ। इसमें जम्मू-कश्मीर का हिस्सा 83% से ज्यादा है। अखरोट-बादाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार हाई डेंसिटी प्लांटेशन, पुराने बागानों के पुनरुद्धार और वैल्यू एडिशन के जरिए पहाड़ी किसानों की आय बढ़ाने की योजना बना रही है।
युवाओं और महिलाओं के लिए भी मौका
इन हाई वैल्यू फसलों में खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग, पैकिंग, ब्रांडिंग, ऑनलाइन बिक्री और निर्यात जैसे कामों में ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए नए रोजगार अवसर बन सकते हैं। रिपोर्ट साफ बताती है कि सरकार अब ऐसी खेती को बढ़ावा देना चाहती है जिससे किसानों को ज्यादा कमाई हो। अगरवुड, काजू, कोको, नारियल, अखरोट और बादाम जैसी फसलें आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती हैं। सही नीति, तकनीक और बाजार मिलने पर ये फसलें किसानों की किस्मत बदल सकती हैं।