High Temperature: फरवरी के बढ़ते तापमान से तैयार फसलों को नुकसान, वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जरूरी एडवाइजरी की जारी
पूसा, नई दिल्ली से किसानों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें बढ़ते तापमान को देखते हुए फसलों और सब्जियों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है, खासकर हवा शांत होने पर ताकि पौधे गिरें नहीं। साथ ही, मूंग और उड़द की मार्च में बुवाई के लिए उन्नत बीजों का संग्रह करने और राईजोबीयम व फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बैक्टीरिया से उपचार करने को कहा गया है। गेहूं में रतुआ जैसे रोगों की निगरानी और भिंडी की अगेती बुवाई के लिए किस्मों के चयन पर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
किन फसलों के लिए क्या सलाह?
किसानों को सलाह दी गई है कि वे तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए अपनी खड़ी फसलों और सब्जियों में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। यह सिंचाई हवा शांत होने पर ही करनी चाहिए, ताकि तेज हवा से पौधे गिर न जाएँ-
1 मूँग- इस मौसम में मूंग और उड़द की मार्च में बुवाई के लिए किसान उन्नत बीजों का संग्रह कर लें। बुवाई से पहले, बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम और फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बैक्टीरिया से उपचारित करना बहुत जरूरी है। मूंग की अच्छी किस्मों में पूसा विशाल, पूसा बैसाखी, पी.डी एम-11, एस एम एल-32 शामिल हैं, और उड़द के लिए पंत उड़द 19, पंत उड़द-30, पंत उड़द-35 बेहतर उपज दे सकती हैं।
2 भिंडी- भिंडी की अगेती बुवाई के लिए किसान ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका जैसी किस्मों का चयन करें। बुवाई से पहले खेतों में पर्याप्त नमी का ध्यान रखें। बीज की मात्रा 10-15 कि.ग्रा. प्रति एकड़ रखें।
3 गेहूं- गेहूं की फसल में रतुआ जैसे रोगों की लगातार निगरानी करते रहें। यदि काला, भूरा या पीला रतुआ दिखाई दे, तो प्रोपिकोनेजोल 25 EC (1.0 ml/लीटर पानी) का छिड़काव करें। पीले रतुआ के लिए 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा होता है, और 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर इसका फैलाव नहीं होता। भूरे रतुआ के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमी वाली जलवायु चाहिए। काले रतुआ के लिए 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान और सूखी जलवायु की आवश्यकता होती है।
4 सरसों- सभी सब्जियों और सरसों की फसल में चेपा (एफिड्स) के आक्रमण पर नजर रखें। सब्जियों में इमिडाक्लोप्रिड @ 0.25-0.5 मि.ली./लीटर पानी की दर से सब्जियों की तुड़ाई के बाद छिड़काव करें। छिड़काव के बाद एक सप्ताह तक सब्जियों की तुड़ाई न करें। बीज वाली सब्जियों पर चेपा के आक्रमण पर विशेष ध्यान दें।
5 टमाटर- टमाटर के फलों को फली छेदक कीट से बचाने के लिए खेत में पक्षी बसेरा (चिड़ियों के बैठने के लिए जगह) लगाएं। कीट से खराब हुए फलों को इकट्ठा करके जमीन में दबा दें। फल छेदक कीट की निगरानी के लिए फिरोमोन ट्रैप @ 4-5 ट्रैप प्रति एकड़ की दर से लगाएं।
6 प्याज- प्याज की समय से बोई गई फसल में थ्रिप्स (एक प्रकार का कीट) के आक्रमण की लगातार निगरानी करते रहें। यदि कीट दिखाई दे, तो कानफीडोर @0.5 मिली./3 ली. पानी को किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि (1.0 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें।
7 बैंगन -बैंगन की फसल को प्ररोह और फल छेदक कीट से बचाने के लिए, प्रभावित फलों और प्रोरहों (नई टहनियों) को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। यदि कीटों की संख्या बहुत ज्यादा हो, तो स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @1.0 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
8 गेंदा-गेंदे के फूल में पुष्प सड़न रोग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, किसान फसल की निगरानी करते रहें। यदि रोग के लक्षण दिखें, तो कार्बडीजम 50% WP @ 1.0 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
इन सब्जियों की करें बुवाई
फ्रेंच बीन, गर्मी के मौसम वाली मूली जैसी फसलों की सीधी बुवाई के लिए वर्तमान तापमान बहुत अच्छा है, क्योंकि यह बीजों के अंकुरण के लिए उपयुक्त है। किसान उन्नत बीजों को हमेशा किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। टमाटर, मिर्च, और कद्दूवर्गीय सब्जियों के तैयार पौधों की रोपाई इस सप्ताह की जा सकती है।