Fish Farming: अब अकेले नहीं, साथ मिलकर कमाएंगे मछुआरे, FFPO के जरिए सरकार दे रही पूरा सहयोग

Gaon Connection | Mar 25, 2026, 15:11 IST
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देशभर में मछुआरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPO) बना रही है। अब तक 1990 FFPO बन चुके हैं। इन संगठनों से मछुआरों की आय बढ़ेगी और बाजार में उनकी ताकत मजबूत होगी।
देश में 1990 मत्स्य किसान उत्पादक संगठन बने

देश में मछुआरों और मछली पालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) के तहत पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) में देशभर में 2195 मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPO) बनाने की मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 544.86 करोड़ रुपये है।



अब तक कितने FFPO बने

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक देश में कुल 1990 मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPO) बनाए जा चुके हैं। इनमें कर्नाटक में 64 FFPO शामिल हैं। इन संगठनों का उद्देश्य मछुआरों को एकजुट कर उनकी आय बढ़ाना और बाजार में उनकी सौदेबाजी की ताकत को मजबूत करना है।



किन एजेंसियों के जरिए हो रहा काम

इस योजना का कार्यान्वयन कई केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से किया जा रहा है। इनमें National Fisheries Development Board (NFDB), Small Farmers Agribusiness Consortium (SFAC), National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India (NAFED) और National Cooperative Development Corporation (NCDC) शामिल हैं। ये एजेंसियां FFPO के गठन, प्रशिक्षण और संचालन में मदद करती हैं।



कर्नाटक में बड़े निवेश को मंजूरी

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत कर्नाटक को भी बड़ी राहत दी गई है। पिछले पांच वर्षों और चालू वर्ष 2025-26 के दौरान कर्नाटक में 1,078.12 करोड़ रुपये की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 375.04 करोड़ रुपये है।



किन-किन परियोजनाओं पर हो रहा काम

इन परियोजनाओं के तहत कई महत्वपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जैसे- तालाब निर्माण, पुनर्चक्रण मत्स्य पालन प्रणाली (RAS), मछली और झींगा हैचरी, पिंजरा संस्कृति (Cage Culture), बर्फ संयंत्र और कोल्ड स्टोरेज, मछली परिवहन सुविधाएं, सजावटी मत्स्य पालन इकाइयां, मत्स्य सेवा केंद्र और समुद्री शैवाल (Seaweed) उत्पादन। इसके अलावा उद्यमिता मॉडल के तहत मछली व्यापार केंद्र और मछली उत्पाद (फिश मील, फिश ऑयल) बनाने की इकाइयों को भी मंजूरी दी गई है।



राज्यवार FFPO का आंकड़ा

देश के विभिन्न राज्यों में FFPO की संख्या अलग-अलग है। तेलंगाना (245), महाराष्ट्र (196), असम (176), आंध्र प्रदेश (176) और मणिपुर (148) जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा संगठन बने हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में 75, बिहार में 48 और मध्य प्रदेश में 107 FFPO गठित किए गए हैं। कुल मिलाकर 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1990 संगठन सक्रिय हैं।



FPO/FFPO क्या होते हैं?

FPO यानी Farmer Producer Organization ऐसे संगठन होते हैं, जिनमें किसान या मछुआरे मिलकर एक समूह बनाते हैं। जब यही संगठन मछली पालन से जुड़े लोगों का होता है, तो उसे FFPO (Fish Farmer Producer Organization) कहा जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य छोटे किसानों और मछुआरों को एक मंच पर लाकर उन्हें बेहतर दाम दिलाना, लागत कम करना, तकनीकी मदद देना और बाजार तक सीधी पहुँच उपलब्ध कराना होता है। इससे उनकी आय बढ़ती है और वे आत्मनिर्भर बनते हैं।



सरकार का उद्देश्य

इस पूरी पहल का मकसद मछली पालन क्षेत्र को संगठित करना, रोजगार बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इस संबंध में जानकारी केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी। सरकार का मानना है कि FFPO के जरिए मछुआरों को सशक्त बनाकर देश में मत्स्य उत्पादन को नई ऊंचाई दी जा सकती है।

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