Gobardhan Yojna: क्या बायोगैस से सचमुच बदलेगी गाँवों की तस्वीर और किसानों की किस्मत?

Gaon Connection | Mar 16, 2026, 18:58 IST
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गाँवों की साफ-सफाई और किसानों की आय में वृद्धि के लिए सरकार ने गोबरधन योजना पेश की है। माना जा रहा है कि यह योजना गाँवों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाएगी। मंत्रालय ने बायोगैस मशीनों की खरीद को प्रोत्साहित करने के लिए सहायक योजनाएँ बनाई हैं।
गोबरधन योजना में आवंटित धनराशि

सरकार गाँवों को स्वच्छ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गोबरधन योजना पर ज़ोरों-शोरों से काम कर रही है। इस योजना के तहत, बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए हर जिले को 50 लाख रुपये तक की मदद मिल रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस काम को आगे बढ़ा रहा है और इसके लिए करीब 565 करोड़ रुपये की एक खास स्कीम भी चलाई जा रही है, जिससे बायोगैस बनाने वाली मशीनों की खरीद में मदद मिल सके। अब तक 37 प्रस्तावों को मंज़ूरी मिल चुकी है और करीब 248 करोड़ रुपये की मदद दी जा चुकी है। यह योजना गांवों में रोज़गार पैदा करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।



बायोगैस से गाँवों का कायाकल्प

गोबरधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का एक अहम हिस्सा है। इसका मुख्य मकसद गांवों में मौजूद गोबर, बचा-खुचा खाना, फसल के अवशेष और बाज़ार के कचरे जैसी चीज़ों से बायोगैस और खाद बनाना है। इससे गांवों में गंदगी कम होती है और लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलता है। सरकार ने इस योजना को सफल बनाने के लिए कई मंत्रालयों को साथ मिलकर काम करने को कहा है।



किसानों को मशीनों के लिए मदद

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, बायोगैस बनाने वाली मशीनों (बायोमास एग्रीगेशन मशीनरी - BAM) को खरीदने में किसानों और उद्यमियों की मदद कर रहा है। इसके लिए कुल 564.75 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। अब तक 37 प्रस्तावों को मंज़ूरी मिली है, जिसमें आंध्र प्रदेश को 45 करोड़, मध्य प्रदेश को 45 करोड़, महाराष्ट्र को 46.94 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली है। पंजाब को 17.94 करोड़ रुपये की मदद मिली है, जिसमें से 1.7 करोड़ रुपये पहले ही बांटे जा चुके हैं।



पाइपलाइन बिछाने के लिए भी पैसा

सिर्फ मशीनें ही नहीं, सरकार बायोगैस को बाज़ार तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का काम भी कर रही है। इसके लिए 2024-25 से 2028-29 तक 994.5 करोड़ रुपये का फंड रखा गया है। इस योजना के तहत दिल्ली को 0.10 करोड़, गुजरात को 2.08 करोड़, हरियाणा को 3.39 करोड़, महाराष्ट्र को 25.05 करोड़ और उत्तर प्रदेश को 23.19 करोड़ रुपये की मदद मिली है। अब तक इस काम के लिए 0.91 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।



रोज़गार और आय में बढ़ोतरी

ये बायोगैस परियोजनाएं गांवों में नए रोज़गार पैदा कर रही हैं। किसानों को उनकी फसल के अवशेषों और पशुओं के गोबर से अच्छी आमदनी हो रही है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है।



जानकारी कहाँ मिलेगी?

अगर आप इस योजना के बारे में और जानना चाहते हैं या अपनी परियोजना की जानकारी देना चाहते हैं, तो आप गोबरधन पोर्टल ( ) पर जा सकते हैं। पेयजल और स्वच्छता विभाग भी इस पोर्टल पर दी गई जानकारी के आधार पर ही काम की निगरानी करता है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस योजना के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए भी कहा गया है। वे अलग-अलग तरीकों से लोगों को बायोगैस के फायदे बता रहे हैं।



कार्यशालाएं और सेमिनार

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, बायोगैस बनाने के काम में लगे लोगों को तकनीकी, वित्तीय और कामकाज से जुड़ी जानकारी देने के लिए लगातार कार्यशालाएं, सेमिनार और बैठकें आयोजित कर रहा है। इससे ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस काम से जुड़ सकें। ज़्यादा जानकारी के लिए आप गोबरधन पोर्टल और एसएटीएटी पोर्टल ( ) पर भी जा सकते हैं। यह सारी जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में दी।

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