Pulse Procurement: अब घर बैठे करें पंजीकरण, तुअर-उड़द की MSP पर खरीद शुरू
मूल्य समर्थन योजना के तहत तुअर और उड़द की MSP पर खरीद शुरू हो गई है। किसान NAFED के e-Samridhi और NCCF के e-Samyukti ऐप के जरिए घर बैठे पंजीकरण कर सरकारी खरीद का लाभ ले सकते हैं।
दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसानों को अपना उत्पादन बेचने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा, वो सीधे एमएसपी पर बेच सकते हैं, बस इसके लिए उन्हें पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा।
अरहर, चना, मसूर जैसी दलहन और सरसों जैसी तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए एक ज़रूरी सूचना जारी की गई है। मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत सरकार तुअर (अरहर) और उड़द की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद कर रही है।
इस योजना के तहत अब किसानों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया भी पहले से आसान कर दी गई है। किसान घर बैठे मोबाइल एप्लिकेशन या पोर्टल के माध्यम से स्वयं पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे उन्हें सरकारी खरीद का लाभ सीधे मिल सके।
ऑनलाइन पंजीकरण से आसान हुआ प्रक्रिया
सरकार ने दलहन किसानों के लिए दो डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए हैं, पहला NAFED का e-Samridhi और दूसरा NCCF का e-Samyukti। इन मोबाइल ऐप और पोर्टल के माध्यम से किसान तुअर और उड़द की MSP खरीद के लिए अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और किसानों के लिए सुविधाजनक बनाना है। अब किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे अपने मोबाइल से ही आवेदन कर सकते हैं या नजदीकी खरीद केंद्र पर जाकर ऑफलाइन पंजीकरण भी करवा सकते हैं।
किन दस्तावेजों की होगी ज़रूरत
पंजीकरण के लिए किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे, जैसे, आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक और मोबाइल नंबर। इन दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण पूरा होने के बाद किसान अपनी उपज MSP पर बेच सकते हैं और भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जाएगा।
क्यों ज़रूरी है MSP पर खरीद
दलहन फसलें जैसे तुअर और उड़द किसानों के लिए महत्वपूर्ण नकदी फसलें हैं, लेकिन बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में MSP पर सरकारी खरीद किसानों को न्यूनतम आय की सुरक्षा देती है।
मूल्य समर्थन योजना का उद्देश्य यही है कि जब बाजार भाव MSP से नीचे जाए, तब सरकार खरीद करके किसानों को नुकसान से बचाए। इससे किसानों का भरोसा बढ़ता है और दलहन उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के फायदे
NAFED और NCCF के ऐप के जरिए पंजीकरण से पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाती है। इससे किसानों का डेटा सुरक्षित रहता है, भुगतान में देरी कम होती है, खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है।
इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर और खरीद केंद्रों पर भी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से योजना का लाभ उठा सकें।
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