Pollution Alert: जानिए क्या होता है GRAP प्लान और इसकी अलग-अलग स्टेज?

Preeti Nahar | Jan 17, 2026, 16:55 IST
Image credit : Gaon Connection Network

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के विभिन्न चरणों का इस्तेमाल किया जाता है। यह योजना वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की मौजूदा स्थिति के आधार पर कार्य करती है। जैसे-जैसे AQI का स्तर ऊँचा होता है, वैसे-वैसे निर्माण कार्य, उद्योगों और यातायात पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

<p>ग्रैप (GRAP) यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान<br></p>

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता एक बार फिर चिंताजनक हो गई है। 15 जनवरी 2026 को दिल्ली का AQI 343 था, जो 16 जनवरी को बढ़कर 354 हो गया। यह 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। मौसम विभाग के अनुसार, हवा की धीमी गति के कारण AQI 400 के पार जा सकता है, जिससे स्थिति 'गंभीर' हो सकती है। इसी को देखते हुए, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उप-समिति ने तत्काल प्रभाव से ग्रैप के तीसरे चरण (GRAP-III) को लागू करने का फैसला किया है। यह कदम प्रदूषण को और बिगड़ने से रोकने और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उठाया गया है।



प्रदूषण बढ़ने पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत अलग-अलग चरण लागू किए जाते हैं। यह योजना वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर के अनुसार काम करती है। सबसे गंभीर स्थिति, जब AQI 401 से ऊपर चला जाता है, तो GRAP-IV लागू होता है, जिसमें स्कूल बंद करना, उद्योगों को रोकना और बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम जैसे कड़े कदम उठाए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदूषण को नियंत्रित कर लोगों को स्वास्थ्य जोखिम से बचाना है। जानिए कब लागू किया जाता है GRAP सिस्टम।



GRAP-I

ये चरण 1, तब शुरू होता है जब हवा की गुणवत्ता मध्यम से खराब होने लगती है यानी AQI लगभग 201–300 के आसपास होता है। इस चरण का मकसद प्रदूषण को शुरुआत में ही रोकना है। इसके तहत सड़कों और खुली जगहों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है। साथ ही, कूड़ा या बायोमास जलाने पर रोक लगाई जाती है। उद्योगों और निर्माण स्थलों पर भी प्रदूषण कम करने के नियमों का पालन कराया जाता है।



GRAP-II

जब हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुँच जाती है यानी AQI 301–350 के आसपास होता है, तब GRAP-II, यानी चरण 2 लागू होता है। इस चरण में पहले चरण के उपायों के साथ-साथ कुछ और सख्ती की जाती है। निर्माण और तोड़-फोड़ के कामों पर थोड़ी रोक लगाई जाती है। आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर, डीज़ल जनरेटर चलाने पर भी पाबंदी लगा दी जाती है। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कड़ी नज़र रखी जाती है। लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने और अपनी गाड़ियों का कम इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।



GRAP-III

ये चरण 3, तब लागू होता है जब हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है यानी AQI 351–400 के बीच होता है। यह एक सख्त कदम है। इसमें धूल और धुएं से जुड़े ज़्यादातर निर्माण और तोड़-फोड़ के कामों पर पूरी तरह या लगभग पूरी तरह रोक लगा दी जाती है। स्टोन क्रशर, खनन का काम और ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को बंद कर दिया जाता है। इसके अलावा, पुराने पेट्रोल-डीज़ल वाहनों और भारी सामान ढोने वाली गाड़ियों को चलाने पर रोक लगा दी जाती है। स्कूलों और दफ्तरों के लिए हाइब्रिड या घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम) जैसे विकल्प अपनाने को कहा जाता है।



GRAP-IV

GRAP का चौथा और सबसे कड़ा चरण, GRAP-IV, तब लागू होता है जब हवा की गुणवत्ता गंभीर या आपात स्थिति में पहुँच जाती है, यानी AQI 401 से ऊपर चला जाता है। इस चरण में लोगों के स्वास्थ्य को सबसे ज़्यादा अहमियत दी जाती है। स्कूलों को बंद करने या पूरी तरह ऑनलाइन क्लास चलाने, उद्योगों और बिजली बनाने वाले प्लांट्स को कुछ समय के लिए बंद करने, गैर-ज़रूरी गाड़ियों पर बड़ी रोक लगाने और बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम लागू करने जैसे कड़े फैसले लिए जाते हैं। इसका मकसद प्रदूषण के स्तर को तुरंत कम करना और लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाना है।

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