Wheat Procurement: गेहूं की सरकारी खरीद के लिए इस राज्य ने बदले नियम, जानिए कब होगी किस फसल की खरीद?
Dates of crop Procurement in Haryana: हरियाणा में इस बार फसल खरीद का तरीका पूरी तरह बदल दिया गया है। अब पुरानी व्यवस्था की जगह डिजिटल और बायोमेट्रिक सिस्टम लागू किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी। सरकार के मुताबिक 28 मार्च से सरसों और 1 अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हो रही है। इस नई व्यवस्था में किसान जब मंडी में फसल बेचने जाएंगे तो उनकी पहचान बायोमेट्रिक तरीके से होगी यानी अंगूठा या पहचान के जरिए उनकी पुष्टि की जाएगी।
क्या-क्या बदला है?
- सरकार ने इस साल मंडियों में अनाज लाने वाले किसानों के लिए गेट पास जारी करने के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब किसानों को अपनी फसल मंडी में लाने से पहले नए नियमों की शर्तों को पूरा करना होगा, तभी उनका गेट पास बनेगा। यह बदलाव किसानों को व्यवस्थित तरीके से अपनी उपज बेचने में मदद करेगा।
- नए नियमों के तहत, किसान जिस ट्रैक्टर-ट्रॉली में गेहूं लेकर मंडी आएंगे, उस ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट लगी होनी बहुत जरूरी है। इससे वाहन की फोटो लेकर पहचान करना आसान हो जाएगा। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।
- मंडियों में गेट पास सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक जारी किए जाएंगे। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे सरकार द्वारा तय किए गए समय का ही पालन करें और उसी दौरान अपनी गेहूं मंडी में लाएं। इससे भीड़भाड़ से बचा जा सकेगा और काम सुचारू रूप से चलेगा।
- गेट पास बनवाने के लिए अब बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब है कि किसान को अपनी पहचान के लिए बायोमेट्रिक (जैसे उंगलियों के निशान) का इस्तेमाल करना होगा। यह प्रक्रिया सुरक्षा और प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगी।
- बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए किसान अपनी ओर से तीन लोगों को नामित कर सकते हैं। यह सुविधा किसानों को थोड़ी राहत देगी, खासकर अगर वे खुद मंडी में मौजूद न रह पाएं। इन नामित व्यक्तियों के माध्यम से किसान अपनी फसल का गेट पास जारी करवा सकेंगे।
- इसके लिए किसानों को 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर जाकर अपनी फसल का गेट पास जारी करने के लिए इन तीन लोगों को मनोनीत करना होगा। यह ऑनलाइन प्रक्रिया किसानों को घर बैठे ही यह सुविधा उपलब्ध कराएगी। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी नियम और प्रक्रियाएं किसानों के लिए सरल हों।
- सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसान अपनी फसल को लेकर मंडी में तभी आएं जब वे सरकार द्वारा जारी किए गए सभी नियमों का पालन कर रहे हों। गेहूं की खरीद के लिए मंडी में सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। इसका मतलब है कि किसान बिना किसी चिंता के अपनी उपज बेच सकते हैं।
यह बदलाव किसानों को अपनी उपज बेचने की प्रक्रिया को आसान बनाने और सरकारी खरीद को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इन नए नियमों से किसानों को अपनी मेहनत का सही दाम मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कुशल हो।
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार का कहना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, फर्जी खरीद रुकेगी और किसानों को सीधे फायदा मिलेगा। डिजिटल रिकॉर्ड बनने से भविष्य में योजनाएं बनाने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गेहूं के भंडारण के लिए जूट और अन्य बोरियाँ खरीदने को मंजूरी दी है, जिस पर करीब 470 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे फसल रखने में कोई परेशानी नहीं होगी।
कब किस फसल की खरीद होगी?
| फसल | खरीद शुरू होने की तारीख | फसल | MSP RMS 2026-27 |
| सरसों | 28 मार्च | गेहूं | 2585 |
| गेहूं | 1 अप्रैल | जौ | 2150 |
| चना | 1 अप्रैल | चना | 5875 |
| ग्रीष्मकालीन मूंग | 15 मई | मसूर | 7000 |
| सूरजमुखी | 1 जून – 30 जून | सरसों | 6200 |