Panchagavya Products: यूपी में गोवंश संरक्षण का हाईटेक मॉडल, पंचगव्य से बनेंगे 100 से अधिक ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स

Gaon Connection | Mar 25, 2026, 15:48 IST
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उत्तर प्रदेश जल्द ही गोवंस संरक्षण में नयी तकनीकी दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है, जिससे यह देश का पहला उदाहरण बनेगा। आईआईटी के विशेषज्ञों के सहयोग से बायोगैस संयंत्र लगाए जाएंगे, जिससे बायो-सीएनजी और जैविक खाद का उत्पादन होगा। जानिए क्या है पूरी परियोजना?
'पंचगव्य' से यूपी में खड़ा होगा विशाल ऑर्गेनिक बाजार

उत्तर प्रदेश जल्द ही देश का पहला 'टेक्नोलॉजी बेस्ड गोसंरक्षण मॉडल स्टेट' बनने की राह पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गो सेवा आयोग ने 'पंचगव्य वैल्यू चेन' (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी) का इस्तेमाल करके 100 से ज्यादा ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार करने और एक विशाल ऑर्गेनिक बाजार स्थापित करने की योजना बनाई है। इस योजना में आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और आईआईटी खड़गपुर के पासआउट छात्र की हाईटेक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा, जिससे बायोगैस प्लांट लगाकर बायो-सीएनजी तैयार की जाएगी। यह कदम प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी बड़ी कमाई का अवसर देगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।



आईआईटी विशेषज्ञों का सहयोग और हाईटेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोसंरक्षण के विजन को साकार करने के लिए देश के शीर्ष आईआईटी संस्थानों के विशेषज्ञ सहयोग कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना का पहला प्रयोग जालौन जिले की गोशालाओं से शुरू किया जा रहा है। यहाँ बायोगैस प्लांट लगाकर जैविक खाद, बायो-सीएनजी और अन्य पंचगव्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यदि जालौन का यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है, तो इस हाईटेक मॉडल को पूरे प्रदेश की गोशालाओं में लागू किया जाएगा। गोशालाओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली के प्रो. वीके विजय विशेष सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेक्निकल टीम गाँवों में जाकर स्थानीय लोगों को बायोगैस प्लांट के सुचारू संचालन के लिए स्किल ट्रेनिंग देगी।



उत्पादों की ब्रांडिंग और बिक्री में भी मिलेगी मदद

सॉफ्टवेयर कंपनी से करोड़ों का पैकेज छोड़कर आए आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज और उनकी टीम इन उत्पादों को तैयार करने से लेकर उनकी ब्रांडिंग और बिक्री तक में मदद करेगी। योगी सरकार के इस बड़े कदम से प्रदेश के छोटे पशुपालकों को भी लाभ होगा। पंचगव्य से बनाए गए उनके उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही, गांँव-गाँव स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा।



आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे: संरक्षण और रोजगार

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस आधुनिक मॉडल के दोहरे फायदे होंगे। एक ओर जहाँ गोवंश का सुरक्षित संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और छोटे किसानों के लिए रोजगार व अतिरिक्त आय के नए द्वार खुलेंगे। तकनीक और परंपरा का यह संगम गांवों में आजीविका का एक बिल्कुल नया और स्थायी मॉडल पेश करने जा रहा है।



योजना की महत्वपूर्ण बातें

- गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी से 100 से अधिक ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार किए जाएंगे।



- पहले चरण में जालौन की गोशालाओं को हाईटेक और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।



- बायोगैस प्लांट चलाने और उत्पाद बनाने के लिए आईआईटी विशेषज्ञ ट्रेनिंग दे रहे हैं।



- यह योजना गोसंरक्षण के साथ-साथ छोटे पशुपालकों और स्थानीय युवाओं की आय बढ़ाने का सीधा जरिया बनेगी।

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