Dragon Fruit: गर्मी से झुलसते ड्रैगन फ्रूट को बचाएगा 'स्मार्ट सन शील्ड, आईसीएआर का नया समाधान
Dragon Fruit cultivation: देश के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच रहा है, जिसका सीधा असर बागवानी फसलों पर पड़ रहा है। खासकर ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। तेज धूप और लू के कारण पौधों में सनबर्न, तनों का पीला पड़ना और फूल-फल गिरने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई क्षेत्रों में किसानों को हर साल 30 से 60 प्रतिशत तक उत्पादन हानि का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कैसे अपनी फसल को कड़ी धूप से बचाना है इसका समाधान जानिए।
बढ़ती गर्मी से ड्रैगन फ्रूट को क्या नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी में ड्रैगन फ्रूट के पौधों की बाहरी सतह झुलस जाती है। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फल का आकार व गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं। लगातार तनाव की स्थिति में पौधे रोगों के प्रति भी अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे उत्पादन और कम हो जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए ICAR-Indian Institute of Horticultural Research (आईसीएआर-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु) ने एक सरल और कम लागत वाली तकनीक विकसित की है, जिसे ‘स्मार्ट सन शील्ड’ नाम दिया गया है।
क्या है स्मार्ट सन शील्ड तकनीक
Smart Sun Shield एक विशेष स्प्रे तकनीक है, जिसे पौधे पर छिड़कने से उनकी सतह पर हल्की परत बन जाती है। यह परत तेज धूप को परावर्तित/Reflect करती है और पौधे के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती है। संस्थान के फील्ड ट्रायल में पाया गया कि इस तकनीक के उपयोग से पौधों की छतरी (कैनोपी) का तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कम हो गया। साथ ही सनबर्न की समस्या में 75 प्रतिशत तक कमी देखी गई। पौधों के तने अधिक हरे और स्वस्थ पाए गए, फूलों की संख्या बढ़ी और रोगों का दबाव भी कम हुआ। इस तकनीक से सीधा फायदा उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया।
हजार से अधिक किसानों ने अपनाई तकनीक
ड्रैगन फ्रूट की खेती आज किसानों के लिए ज्यादा पैदावार और ज्यादा मुनाफे का भरोसेमंद विकल्प बनती जा रही है। देशभर में 1,000 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं। इस तकनीक से 30 से 50 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन मिल रहा है, जिससे प्रति हेक्टेयर लगभग 1.5 से 3 लाख रुपये तक अतिरिक्त आय संभव हो रही है। इसकी लागत अपेक्षाकृत कम है, लेकिन रिटर्न बेहतर मिलता है। बदलते मौसम और जलवायु चुनौतियों के बीच ड्रैगन फ्रूट की खेती को भारत के किसानों के लिए एक क्लाइमेट-स्मार्ट और टिकाऊ समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
गर्म इलाकों वाले किसान अपनाएं ये तकनीक
यह तकनीक खासतौर पर उन इलाकों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जहाँ गर्मियों में तापमान बहुत अधिक रहता है। कम लागत होने के कारण छोटे और मध्यम किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं। इससे न केवल पौधों को गर्मी से बचाया जा सकता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार मूल्य भी बेहतर हो सकता है। ये तकनीक इसलिए भी जरूरी है अपनानी क्योंकि ड्रैगन फ्रूट की खेती देश में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी नई चुनौतियाँ लेकर आ रही है। ऐसे में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह ‘स्मार्ट सन शील्ड’ तकनीक किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। साफ है कि अगर पौधे ठंडे रहेंगे, तो तनाव कम होगा और उत्पादन बढ़ेगा यानी पौधे स्वस्थ होगें और पैदावार बेहतर होगी।