UP Cabinet: अब केवल असली मालिक ही अपनी संपत्ति बेच सकेंगे, रजिस्ट्री से पहले होगी खतौनी और स्वामित्व की जाँच
उत्तर प्रदेश में जमीन-जायदाद की फर्जी रजिस्ट्री और विवादों को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद अब किसी भी अचल संपत्ति की रजिस्ट्री करने से पहले उसकी खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जाँच अनिवार्य होगी। यानी पंजीकरण अधिकारी दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
अधिनियम में जोड़ी जाएँगी नई धाराएं
कैबिनेट ने रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की वर्तमान धारा 22 और 35 के बाद धारा 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन संशोधनों से संबंधित विधेयक अब विधानमंडल में लाया जाएगा। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत धारा 22-ए कुछ विशेष श्रेणी के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने का प्रावधान करेगी। वहीं धारा 22-बी के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा नई धारा 35-ए के तहत यदि किसी संपत्ति के स्वामित्व, अधिकार, पहचान या कब्जे से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो पंजीकरण अधिकारी को रजिस्ट्री करने से इनकार करने का अधिकार होगा।
फर्जी रजिस्ट्री और विवादों पर लगेगी रोक
सरकार का कहना है कि अभी कई मामलों में ऐसा देखने को मिलता है कि संपत्ति के असली मालिक के अलावा कोई अन्य व्यक्ति जमीन बेच देता है या फिर प्रतिबंधित और कुर्क संपत्तियों की भी रजिस्ट्री हो जाती है। कई बार कोई व्यक्ति अपने अधिकार से ज्यादा जमीन का भी सौदा कर देता है। ऐसे मामलों के कारण लोगों को लंबे समय तक अदालतों में मुकदमे लड़ने पड़ते हैं और अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लोगों को मिलेगी मुकदमेबाजी से राहत
सरकार के मुताबिक इस संशोधन के लागू होने के बाद जमीन की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी रजिस्ट्री पर काफी हद तक रोक लगेगी। इससे आम लोगों को अनावश्यक कोर्ट केस और विवादों से राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम जमीन से जुड़े विवादों को कम करने और पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।