Milk Production In Summers: जानिए वो जरूरी टिप्स जो गर्मियों में भी पशुपालन को बनाएंगे फायदेमंद
भारत दूध उत्पादन के मामले में लगातार 27 सालों से दुनिया में सबसे आगे है। बड़े-बड़े विकसित देश भी इस मामले में हमसे पीछे हैं। इंडियन डेयरी सेक्टर ने 25 करोड़ टन दूध उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है और डेयरी एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले कुछ सालों में यह आंकड़ा दोगुना भी हो सकता है।
लेकिन खुशी की इस खबर के बीच एक सच्चाई यह भी है कि हाईटेक डेयरी टेक्नोलॉजी होने के बावजूद हमारे देश में प्रति पशु दूध उत्पादन कई देशों की तुलना में कम है। इसका मतलब यह है कि हमारे पास पशु तो बहुत हैं, लेकिन हर पशु अपनी पूरी क्षमता से दूध नहीं दे पा रहा। गर्मियों का मौसम इस समस्या को और बड़ा कर देता है। तेज धूप, लू और उमस की वजह से पशु कम खाते हैं, कम पीते हैं और नतीजतन दूध उत्पादन घट जाता है।
डेयरी में मुनाफा बढ़ाने के लिए 6 जरूरी कदम
1. प्रति पशु उत्पादन बढ़ाएं: सिर्फ पशुओं की संख्या नहीं, बल्कि हर पशु से मिलने वाले दूध की मात्रा बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उन्नत नस्लें, संतुलित आहार और बेहतर देखभाल इसमें काम आती है।
2. आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट: दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उससे ज्यादा उत्पाद बनाने के लिए आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट जरूरी हैं। इनकी संख्या बढ़ानी होगी।
3. बाजार का दायरा बढ़ाएं: घरेलू के साथ-साथ निर्यात (एक्सपोर्ट) के बाजार को भी बढ़ाना होगा ताकि दूध और डेयरी उत्पादों की मांग हमेशा बनी रहे।
4. घी पर खास ध्यान: अंतरराष्ट्रीय बाजार में देसी घी की जबरदस्त मांग है। भारत को इस मांग का फायदा उठाना चाहिए और घी के उत्पादन व निर्यात पर विशेष जोर देना चाहिए।
5. कोऑपरेटिव और इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार की मदद से डेयरी वैल्यू चेन और सहकारी ढांचे को मजबूत करना होगा, ताकि छोटे पशुपालक भी इसका फायदा उठा सकें।
6. चारे की लागत कम करें: आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि दूध की कमाई का बड़ा हिस्सा चारे पर खर्च हो जाता है। अगर चारे की लागत घटाई जाए तो पशुपालक की जेब में ज्यादा पैसा बचेगा।
पशुपालकों की इनकम क्यों नहीं बढ़ती?
आज देश में ज्यादातर पशुपालक छोटे किसान हैं जो चार-पांच गाय या भैंस पालते हैं। इन्हें दूध बेचने से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा चारे में ही खर्च हो जाता है। ऊपर से बिजली और डीजल के बढ़ते दाम लागत और बढ़ा देते हैं। नतीजा यह होता है कि महीने के अंत में पशुपालक के हाथ में कुछ खास बचता नहीं। इसी वजह से किसानों के बच्चे अब पशुपालन में रुचि नहीं दिखाते और दूसरे कामों की तरफ जा रहे हैं। जब तक पशुपालन को एक व्यवस्थित और संगठित (ऑर्गेनाइज्ड) सेक्टर नहीं बनाया जाएगा, तब तक इसकी लागत कम नहीं होगी और मुनाफा भी नहीं बढ़ेगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि आज सबसे पहली जरूरत यह है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को पशुपालन से जोड़ा जाए और जो पहले से जुड़े हैं उन्हें इस काम में बनाए रखा जाए।
पैकिंग और प्रोसेसिंग दूध का मूल्य बढ़ाने का रास्ता
दूध सिर्फ दूध नहीं है इससे दही, पनीर, मक्खन, घी, आइसक्रीम और कई प्रकार के प्रोसेस्ड प्रोडक्ट बनते हैं। दूध को छोड़कर बाकी सभी डेयरी उत्पाद प्रोसेस होते हैं और इनकी कीमत दूध से कई गुना ज्यादा होती है। इसीलिए पशुपालकों को सिर्फ कच्चा दूध बेचने की बजाय उसे प्रोसेस करके बेचने की दिशा में सोचना चाहिए।इसके अलावा पैकिंग का भी बड़ा असर पड़ता है। अच्छी पैकिंग न सिर्फ उत्पाद को ताजा रखती है बल्कि उसकी बाजार में कीमत भी बढ़ाती है। आइसक्रीम जैसे उत्पाद में तो पैकिंग की वजह से ही ग्राहक आकर्षित होते हैं। इसलिए डेयरी उद्योग में पैकिंग को गंभीरता से लेना जरूरी है।
भारत के पास दूध उत्पादन को दोगुना करने की पूरी क्षमता है पशु हैं, पशुपालक हैं और डेयरी का ढांचा भी मौजूद है। बस जरूरत है तो सही दिशा में काम करने की। गर्मियों में दूध उत्पादन घटना कोई मजबूरी नहीं है यह एक चुनौती है जिसे सही जानकारी, उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन से आसानी से पार किया जा सकता है। मिल्क रेव्युलेशन-2 का सपना तब पूरा होगा जब हर पशुपालक जागरूक होगा, हर गांव में सहकारी ढांचा मजबूत होगा और सरकार-किसान मिलकर काम करेंगे। तभी न सिर्फ गर्मियों में, बल्कि पूरे साल हर पशुपालक के घर का कटोरा दूध से भरा रहेगा।