शिवराज सिंह चौहान: MSP, दलहन आत्मनिर्भरता और ब्राजील के साथ कृषि सहयोग पर अहम बैठकें
20 फरवरी का दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए खासा व्यस्त रहा। सुबह से ही उन्होंने किसानों से जुड़े दो अहम मोर्चों पर एक साथ काम किया। पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर नाफेड यानी राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ की विस्तृत समीक्षा बैठक की और उसके बाद कृषि भवन में ब्राजील के कृषि मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठक में शामिल हुए। दोनों बैठकों का एक ही मकसद था कि देश का किसान मजबूत हो और उसे उसकी मेहनत का सही दाम मिले।
MSP पर खरीद होगी और पारदर्शी
नाफेड की समीक्षा बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीद को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य बिना किसी देरी के मिलना चाहिए। खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्थाएं हों और किसान को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई।
बैठक में मूल्य समर्थन योजना और मूल्य स्थिरीकरण निधि के तहत चल रहे खरीद कार्यों की प्रगति पर भी गहन चर्चा हुई। मंत्री महोदय ने राज्यों के साथ समन्वय मजबूत करने और भंडारण व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर दिया ताकि बाजार में कीमतें स्थिर रहें और किसानों के हितों की रक्षा हो सके।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर जोर
बैठक में खास तौर पर तुअर, उड़द और मसूर जैसी दलहन फसलों की बात हुई। इन फसलों के लिए एक 6 वर्षीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर विचार किया जा रहा है जिसका मकसद है कि भारत को दाल उत्पादन में किसी और देश पर निर्भर न रहना पड़े। इस मिशन के तहत उन्नत बीजों की उपलब्धता, तकनीकी मदद और बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने की योजना है। शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता है कि किसानों को बिचौलियों से मुक्त करके सीधे सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ा जाए।
बैठक में कृषि मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, अपर सचिव प्रमोद कुमार मेहरदा, अपर सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी और नाफेड के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
ब्राजील के साथ खेती का नया रिश्ता
उसी दिन दोपहर में कृषि भवन में एक और अहम बैठक हुई। शिवराज सिंह चौहान ने ब्राजील के कृषि एवं पशुधन मंत्री कार्लोस फावारो और कृषि विकास एवं परिवार कृषि मंत्री लुइज़ पाउलो टेक्सीरा फेरेरा के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। यह बैठक इसलिए भी खास रही क्योंकि भारत और ब्राजील दोनों ही दुनिया के बड़े कृषि उत्पादक देश हैं और दोनों के बीच सहयोग की संभावनाएं बहुत व्यापक हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत और ब्राजील के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिके हैं और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2025 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्राजील यात्रा के बाद से दोनों देशों के संबंध और मजबूत हुए हैं। उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट में ब्राजील की भागीदारी की सराहना करते हुए इसे तकनीकी सहयोग की दिशा में एक अच्छा कदम बताया।
ब्राजील के मंत्री लुइज़ पाउलो ने कहा कि कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग से दोनों को फायदा होगा और कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां मिलकर काम किया जा सकता है। वहीं कार्लोस फावारो ने भारत के बायो-इनपुट यानी जैविक खेती से जुड़े नवाचारों की तारीफ की और कहा कि यह क्षेत्र भविष्य में दोनों देशों के लिए साझेदारी का बड़ा मंच बन सकता है।
बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा सहयोग की समीक्षा की और नई साझेदारी के रास्ते तलाशे। शिवराज सिंह चौहान ने ब्राजील के मंत्रियों को आगामी ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया।
भारत की ओर से इस बैठक में कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मांगी लाल जाट, ब्राजील में भारत के राजदूत दिनेश भाटिया और कृषि मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, आईसीएआर तथा नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
एक ही दिन में दो बड़ी बैठकें और दो अहम फैसले। शिवराज सिंह चौहान का यह कदम यह बताता है कि सरकार किसानों के हित में घरेलू मोर्चे पर भी सक्रिय है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय खेती को नई पहचान दिलाने की कोशिश जारी है।