Pulse Production: दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात, भारत बनेगा दालों का निर्यातक: शिवराज सिंह चौहान
भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत दालों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा और भविष्य में निर्यातक बनेगा।
मध्य प्रदेश के सीहोर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश की दाल नीति को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत अब दालों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि आत्मनिर्भर बनेगा और निर्यात भी करेगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब देश में दालों की बढ़ती मांग और आयात पर होने वाले भारी खर्च को लेकर चिंताएँ जताई जा रही थीं।
"दलहन आत्मनिर्भरता मिशन" पर दिया ज़ोर
दुनिया को दालों का आयात भारत से किया जाता है। केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दालों का आयात करना देश के लिए शर्म की बात है, क्योंकि हमारे पास ज़मीन, किसान और उत्पादन की पूरी क्षमता है। सरकार की मंशा है कि किसानों को बीज से लेकर बाज़ार तक हर स्तर पर मजबूत किया जाए, ताकि वे दाल उत्पादन को एक लाभकारी फसल के रूप में अपना सकें। इसी दिशा में 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' को ज़मीनी स्तर पर उतारने की योजना तैयार की गई है। वहीं किसानों का कहना है कि अगर उन्हें बीज, तकनीक और बाज़ार एक साथ मिल जाएं, तो दाल की खेती घाटे का सौदा नहीं रहेगी।
'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' की ख़ास बातें
इस मिशन के तहत क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे एक ही इलाके में बड़े पैमाने पर दालों की खेती हो सकेगी।
गांवों में बीज ग्राम बनाए जाएंगे ताकि किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों।
देशभर में लगभग 1000 दाल मिलें स्थापित करने की योजना
कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा
बैठक में बीज सुधार और वितरण की नई व्यवस्था के बारे में बताया गया कि- कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा, अलग-अलग प्रदेशों में किसान के बीच जाकर बीज रिलीज़ करेंगे। क्लस्टर मॉडल के ज़रिए खेती को मजबूती दी जाएगी, किसानों को जोड़कर संगठित रूप से उत्पादन बढ़ाया जाएगा और हर किसान को पूरा सहयोग मिलेगा। क्लस्टर में आने वाले किसानों को बीज किट दी जाएगी और आदर्श खेती के लिए एक हेक्टेयर पर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी, ताकि अच्छे बीज, बेहतर तकनीक और पर्याप्त वित्तीय सहयोग के साथ दलहन उत्पादन को नई ऊँचाई तक पहुँचाया जा सके।
बासमती, मसाले और टेक्सटाइल को मिलेगी बढ़त
सरकार का मानना है कि गांवों के पास दाल मिलें होने से किसानों को केवल कच्ची दाल बेचने की मजबूरी नहीं रहेगी। दाल की प्रोसेसिंग से प्रोटीन वैल्यू बढ़ेगी और किसानों की आमदनी में सीधा इज़ाफा होगा। हर दाल मिल पर लगभग 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देने का प्रावधान भी है, ताकि निजी निवेशक और किसान समूह इस काम में आगे आ सकें।
- बैठक में बताया गया कि दलहन उत्पादन बढ़ाने की नीतियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि ज़मीनी स्तर पर किसानों की ज़रूरतों को समझकर लागू की जाएँ। किसानों के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौतों और आयात-निर्यात नीति को लेकर जो आशंकाएं थीं, उन पर केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसी भी नीति से किसानों के हितों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
- भारतीय सामानों पर जो परंपरागत शुल्क था, वह घटकर लगभग 18 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों में विशाल बाजार और अवसर मिलेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा- सरकार की प्राथमिकता किसान की आय बढ़ाना, गाँवों में रोज़गार पैदा करना और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।