क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील से हर किसान को होगा फायदा? जानिए किन फसलों को मिलेगी नई उड़ान

Gaon Connection | Feb 09, 2026, 14:03 IST
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भारत और अमेरिका के बीच हाल में बनी नई ट्रेड डील को भारतीय कृषि के लिए एक अहम अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब भारत अपने कृषि उत्पादों के लिए नए और स्थिर वैश्विक बाजार तलाश रहा है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका पहले से ही भारत के कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का एक बड़ा खरीदार है। ऐसे में यह डील न केवल व्यापार बढ़ाने का माध्यम बन सकती है, बल्कि कुछ खास फसलों और उनसे जुड़े किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकती है।मसाले, बासमती चावल, आम, काजू और समुद्री उत्पादों के निर्यात में वृद्धि की उम्मीद है। यह समझौता किसानों और निर्यातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

APEDA के अनुसार, वित्त वर्ष 2023–24 में भारत ने अमेरिका को लगभग 6 अरब अमेरिकी डॉलर के कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों का निर्यात किया। यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि अमेरिका भारतीय कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। वहीं USDA का आकलन है कि अमेरिका में एशियाई खाद्य पदार्थों, मसालों और प्रीमियम चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रेड डील में कुछ खास कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच की संभावनाएं बनी हैं।



हालांकि इस समझौते में भारत ने अपनी सभी फसलों को शामिल नहीं किया है। गेहूं, सामान्य चावल, दालें, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों को जानबूझकर इस डील से बाहर रखा गया है। NITI Aayog का कहना है कि ये फसलें केवल व्यापारिक वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई हैं। इन्हें विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह खोलना घरेलू किसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए सरकार ने संवेदनशील फसलों को सुरक्षित रखते हुए उच्च मूल्य वाली और निर्यात योग्य फसलों पर फोकस किया है।



इनमें सबसे पहला नाम मसालों का आता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक और निर्यातक देश है। FAO के अनुसार, वैश्विक मसाला उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। हल्दी, मिर्च, जीरा, काली मिर्च और इलायची जैसे मसालों की अमेरिका में लगातार मांग बढ़ रही है। APEDA बताता है कि भारत हर साल करीब 4 अरब डॉलर के मसाले निर्यात करता है। ट्रेड डील के बाद अगर इन उत्पादों पर शुल्क में राहत मिलती है, तो भारतीय मसाले अमेरिकी बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं। इसका सीधा फायदा मसाला उत्पादक किसानों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को मिल सकता है।



बासमती चावल दूसरी ऐसी फसल है, जिसे इस ट्रेड डील से लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि चावल भारत की संवेदनशील फसल है, लेकिन बासमती को इससे अलग माना जाता है क्योंकि यह मुख्य रूप से निर्यात के लिए उगाया जाता है। APEDA के अनुसार, वर्ष 2023–24 में भारत ने लगभग 4.8 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया। USDA का मानना है कि अमेरिका में प्रीमियम और सुगंधित चावल की मांग स्थिर बनी हुई है। इससे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है।



आम और आम से बने उत्पाद भी इस डील के संभावित लाभार्थियों में शामिल हैं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आम पैदा करता है। FAO के अनुसार, वैश्विक आम उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है। ताजा आम के निर्यात में जहां कई तकनीकी और जांच संबंधी बाधाएं होती हैं, वहीं आम का पल्प, जूस और अन्य प्रोसेस्ड उत्पाद आसान और स्थिर निर्यात विकल्प माने जाते हैं। APEDA का आकलन है कि प्रोसेस्ड आम उत्पाद किसानों को बेहतर और स्थिर आय दिला सकते हैं।



इसके अलावा काजू और अन्य प्रोसेस्ड नट्स को भी इस ट्रेड डील से लाभ मिलने की संभावना है। FAO के अनुसार, भारत दुनिया के प्रमुख काजू प्रोसेसर देशों में शामिल है। अमेरिका में हेल्दी स्नैक्स और ड्राई फ्रूट्स की बढ़ती मांग भारतीय काजू उद्योग के लिए नए अवसर खोल सकती है। इससे काजू प्रोसेसिंग से जुड़े लाखों श्रमिकों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।



समुद्री उत्पाद, खासकर झींगा, पहले से ही भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल हैं। Marine Products Export Development Authority के अनुसार, भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को जाता है। ट्रेड डील के बाद प्रोसेस्ड और फ्रोजन सी-फूड के निर्यात में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जिससे तटीय राज्यों के मछुआरों और एक्वाकल्चर किसानों को फायदा हो सकता है।



कुल मिलाकर भारत–अमेरिका ट्रेड डील हर किसान के लिए एक जैसी नहीं है, लेकिन मसाले, बासमती चावल, आम, काजू और समुद्री उत्पाद जैसी फसलों के लिए यह नए अवसर लेकर आई है। अगर सरकार, निर्यात एजेंसियां और किसान मिलकर सही रणनीति अपनाएं, तो यह समझौता भारतीय कृषि को वैश्विक बाजार में और मजबूत बना सकता है।

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