Weight Loss : "ऑफ-लेबल उपयोग" करके बेची जा रही वजन घटाने वाली GLP-1 दवाओं पर बढ़ी सख्ती

Gaon Connection | Mar 24, 2026, 12:50 IST
GLP-1 जैसी दवाएँ वजन घटाने में भले ही मददगार हों, लेकिन इनका बिना सोचे-समझे और बिना निगरानी के इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है। इसीलिए सरकार ने समय रहते सख्ती बढ़ा दी है। आने वाले समय में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र में और कड़े नियम लागू हो सकते हैं।
वजन घटाने वाली दवाओं पर सख्ती

Weight loss Medicines: भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही वजन घटाने वाली दवाओं-खासतौर पर GLP-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) आधारित दवाओं को लेकर सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। वजन घटाने वाली दवाओं, खासकर GLP-1 दवाओं पर भारत सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। औषधि नियंत्रक (Drug Controller) ने इन दवाओं की अनधिकृत बिक्री, भ्रामक प्रचार और बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी तेज कर दी है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि ये दवाएं भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं और इनके कई जेनेरिक विकल्प बाजार में आ गए हैं।



सरकार ने 10 मार्च 2026 को एक एडवाइजरी जारी कर सभी दवा निर्माताओं को भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। साथ ही, देशभर में ऑनलाइन फार्मेसी, गोदामों, क्लीनिकों और थोक विक्रेताओं सहित 49 संस्थानों का ऑडिट और निरीक्षण किया गया है। नियम तोड़ने वाली संस्थाओं को नोटिस जारी किए गए हैं और राज्य नियामकों के साथ मिलकर सप्लाई चेन में गड़बड़ी रोकने के लिए संयुक्त कार्रवाई की जा रही है।



क्या हैं GLP-1 दवाएं?

GLP-1 दवाएं असल में टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए बनाई गई थीं। ये दवाएं शरीर में इंसुलिन को कंट्रोल करती हैं और भूख कम करती हैं। इसी वजह से आजकल लोग इन्हें वजन घटाने के लिए भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन, बिना डॉक्टर की सलाह के इनका इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है।



क्यों बढ़ी चिंता?

चिंता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि भारतीय बाजार में GLP-1 दवाओं के नए और सस्ते जेनेरिक वर्जन आसानी से मिल रहे हैं। ये दवाएं अब रिटेल मेडिकल स्टोर, ऑनलाइन फार्मेसी, थोक विक्रेताओं और वेट लॉस क्लीनिकों पर धड़ल्ले से बिक रही हैं। इस आसान उपलब्धता के कारण बहुत से लोग डॉक्टर की सलाह के बिना ही इनका सेवन कर रहे हैं। इससे उल्टी, पाचन की समस्या, हार्मोनल गड़बड़ी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा बढ़ गया है।



सरकार ने क्या कदम उठाए?

सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कई कदम उठाए हैं। 10 मार्च 2026 को जारी एडवाइजरी में सभी दवा निर्माताओं को भ्रामक विज्ञापन और अप्रत्यक्ष प्रचार पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। देशभर में 49 जगहों पर जांच की गई है, जिनमें ऑनलाइन फार्मेसी, गोदाम, क्लीनिक और थोक विक्रेता शामिल हैं। जो भी नियम तोड़ रहे हैं, उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। सप्लाई चेन में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए राज्य नियामकों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।



सबसे बड़ा खतरा "ऑफ-लेबल उपयोग" का है। इसका मतलब है कि दवाओं का इस्तेमाल उस काम के लिए किया जा रहा है जिसके लिए उन्हें मंजूरी नहीं मिली है। कई जगहों पर वजन घटाने के नाम पर इन दवाओं का प्रचार किया जा रहा है, जिससे लोग गुमराह हो रहे हैं।



किन डॉक्टरों की निगरानी में ही संभव है उपयोग?

भारत में इन दवाओं का इस्तेमाल केवल कुछ खास डॉक्टरों की निगरानी में ही किया जा सकता है। ये डॉक्टर हैं एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (हार्मोन विशेषज्ञ), इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट। अगर कोई नियमों को तोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें लाइसेंस रद्द करना, भारी जुर्माना लगाना और कानूनी कार्रवाई शामिल है।



क्या रखनी होगी सावधानी?

आम लोगों के लिए सलाह यह है कि वजन घटाने के लिए खुद से कोई दवा न लें। केवल योग्य डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें। ऑनलाइन या बिना पर्ची के मिलने वाली दवाओं से सावधान रहें। GLP-1 जैसी दवाएं वजन घटाने में भले ही मददगार हों, लेकिन इनका बिना सोचे-समझे और बिना निगरानी के इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है। इसीलिए सरकार ने समय रहते सख्ती बढ़ा दी है। आने वाले समय में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र में और कड़े नियम लागू हो सकते हैं।

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