Edible Oil Imports: महंगे तेल के चलते भारत ने घटाई पाम ऑयल खरीद, मार्च में आयात 19% गिरा, रहा 3 महीने का निचला स्तर
देश में खाद्य तेल की कीमतों में आई तेजी का असर अब आयात पर साफ दिखने लगा है। मार्च 2026 में भारत का पाम ऑयल आयात करीब 19% घटकर तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। मुंबई स्थित सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के मुताबिक, कीमतों में तेजी और ऊर्जा बाजार से जुड़े दबाव के चलते रिफाइनरों ने खरीद कम कर दी, जिससे आयात में गिरावट दर्ज की गई। यह दिसंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
पाम ऑयल आयात में बड़ी गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, मार्च में पाम ऑयल का आयात घटकर 6,89,462 मीट्रिक टन रह गया, जो फरवरी के 8,47,689 टन के मुकाबले काफी कम है। यह दिसंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। कीमतों में उछाल के कारण आयातकों ने फिलहाल खरीद टाल दी है और बाजार में गिरावट का इंतजार कर रहे हैं।
खाद्य तेल का कुल आयात भी घटा
केवल पाम ऑयल ही नहीं, बल्कि कुल खाद्य तेल आयात में भी गिरावट देखी गई है। मार्च में कुल आयात 9% से अधिक घटकर 1.17 मिलियन टन रह गया, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे कम स्तर है। सोयाबीन तेल (सोयोइल) का आयात 4% घटकर 2,87,220 टन रह गया, जबकि सूरजमुखी तेल का आयात करीब 35% बढ़कर 1,96,486 टन हो गया।
कहां से आता है तेल
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश पाम ऑयल इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात करता है। वहीं सोयोइल और सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से मंगाया जाता है। इन देशों में कीमतों और सप्लाई में बदलाव का सीधा असर भारत के आयात पर पड़ता है।
घरेलू बाजार और आगे की रणनीति
विशेषज्ञों के मुताबिक, आयात में कमी से घरेलू तेलबीज की कीमतों को समर्थन मिल सकता है, लेकिन इससे स्टॉक भी घट सकते हैं। मुंबई के एक ट्रेड डीलर के अनुसार, “खरीदार फिलहाल कीमतों में नरमी का इंतजार कर रहे हैं। अगर अगले कुछ हफ्तों में कीमतें नहीं घटीं, तो भारतीय रिफाइनर फिर से आयात बढ़ा सकते हैं।” इसके अलावा, नए सीजन की सरसों फसल से मिल रही बढ़ती आपूर्ति भी फिलहाल आयात को सीमित रखने में मदद कर रही है।