Integrated Farming: छोटे किसानों को मिलेगा एकीकृत खेती मॉडल, मजबूत MSP और बेहतर बीमा का साथ

Gaon Connection | Mar 17, 2026, 16:00 IST
सरकार छोटे किसानों के लिए सरकार एकीकृत खेती के नए मॉडल ला रही है। तंबाकू की जगह गन्ने और मक्का जैसी फसलें उगाने के सुझाव दिए गए हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)पर फसलों की खरीद जारी है और फसल बीमा योजना में सुधार किए गए हैं, ताकि किसानों की आय सुरक्षित हो साथ ही उसमें बढ़ोतरी हो।
Integrated Farming System 

कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि सरकार छोटे किसानों के लिए एकीकृत खेती के ऐसे मॉडल तैयार कर रही है जो उनके लिए फायदेमंद होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कई फसलें खरीदी जा रही हैं और फसल बीमा योजना में सुधार किए गए हैं।



सरकार छोटे किसानों के लिए एकीकृत खेती के मॉडल विकसित करने पर काम कर रही है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि देश में किसानों के पास जमीन का रकबा कम है। एकीकृत खेती में आमतौर पर फसलों और पशुधन जैसी विभिन्न गतिविधियों को एक साथ शामिल किया जाता है। लोकसभा में मंगलवार को मंत्री शिवराज सिंह ने क्या कुछ बातें खेती के क्षेत्र के लिए कहीं, समझते हैं।



छोटे किसानों के लिए एकीकृत खेती मॉडल

तंबाकू का विकल्प- मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी बताया कि सरकार तंबाकू किसानों के लिए वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए भी कई कदम उठा रही है। तंबाकू की खेती के विकल्प के तौर पर गन्ने और अन्य फसलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि "तंबाकू के स्थान पर कौन-कौन सी फसलें पैदा की जा सकती हैं, किस-किस इलाके में, वो भी चिन्हित करने का काम किया है।"



FCV तंबाकू की जगह हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, मक्का, आलू, चिया, मक्का, फील्ड बीन, लोबिया, रागी, रेड ग्राम, रागी-रेड ग्राम, मूंगफली जैसी फसलों का सुझाव दिया गया है। बीड़ी तंबाकू की जगह गन्ना, सोयाबीन, सोयाबीन-ज्वार, मूंगफली-ज्वार और अन्य विभिन्न प्रकार की फसलों को विकल्प के रूप में सुझाया गया है।



MSP बढ़ोतरी- किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद जारी है। इस वर्ष गेहूं, धान, दलहन और तिलहन जैसी फसलों का MSP बढ़ाया गया है। MSP बढ़ाने के साथ-साथ फसलों की ऐतिहासिक खरीदी भी जारी है।



समय पर बीमा- पहले फसल बीमा योजना में किसानों को भुगतान मिलने में कई महीनों की देरी होती थी। कई बार तो पूरी तहसील में नुकसान होने पर ही नुकसान की भरपाई की जाती थी। उन्होंने बताया कि फसल बीमा योजना के नियमों में संशोधन किया गया है ताकि एक भी किसान का नुकसान होने पर बीमा कंपनी को मुआवजा देना पड़े। स्थानीय आपदाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।



समय पर मिले क्लेम-साथ ही यह प्रावधान भी किया गया है कि यदि बीमा कंपनियाँ किसान के खाते में क्लेम ट्रांसफर करने में देरी करती हैं, तो उन्हें किसान को 12% ब्याज का भुगतान करना होगा। मंत्री ने कहा "हमने राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पिछले तीन साल में 9,930 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान 2 करोड़ 50 लाख किसानों के खाते में जमा करवाया है।"



शिकायत का प्रावधान- लगातार कृषि रक्षक पोर्टल और अन्य माध्यमों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कहीं कोई गड़बड़ न हो। यदि कहीं भी गड़बड़ पाई जाती है, तो किसान सीधे शिकायत कर सकते हैं। शिवराज सिंह ने कहा "कृषि रक्षक पोर्टल में अभी तक 2,71,708 शिकायतें दर्ज की गई हैं। उन शिकायतों की हम जाँच करते हैं और जाँच करने पर अगर कहीं गड़बड़ पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई करते हैं। किसी को, गड़बड़ करने वाले को छोड़ा नहीं जाएगा।"

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