Jal-Jeevan-Mission: गाँवों में पीने के पानी की गुणवत्ता जाँच के लिए फील्ड टेस्ट किट का बढ़ता उपयोग
जल जीवन मिशन के तहत, गाँवों में पीने के पानी की गुणवत्ता जाँचने के लिए फील्ड टेस्ट किट (FTK) का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इन किटों से पानी की शुद्धता की जाँच समुदाय स्तर पर, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर की जाती है। इससे लोगों को पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है और वे खुद भी जाँच कर सकते हैं। क्या है फील्ड टेस्ट किट और कैसे करता है ये काम, जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
सामुदायिक भागीदारी से पानी की गुणवत्ता की जाँच
जल जीवन मिशन का मकसद हर घर तक साफ पीने का पानी पहुँचाना है। इसके लिए, गाँवों की जल और स्वच्छता समितियों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य स्वयंसेवकों को फील्ड टेस्ट किट (FTK) का इस्तेमाल सिखाया जा रहा है। वे इन किटों से पीने के पानी के स्रोतों और घरों में लगे नल के पानी की जाँच करते हैं। इससे लोगों को पानी की गुणवत्ता के बारे में पता चलता है और अगर पानी में कोई खराबी है तो उसका जल्दी पता चल जाता है।
जागरूकता और पहचान में FTK की भूमिका
फील्ड टेस्ट किट लोगों को पानी की गुणवत्ता के बारे में जागरूक करने और पानी में किसी भी तरह की गंदगी का तुरंत पता लगाने में बहुत मददगार हैं। यह सामुदायिक स्तर पर पानी की जाँच का एक पहला कदम है, जिससे स्थानीय लोग पानी की गुणवत्ता की निगरानी में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
प्रशिक्षण और परीक्षण के आकड़े
राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली पर दी गई रिपोर्ट के अनुसार 12 मार्च 2026 तक, लगभग 24.80 लाख महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण उपकरणों का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 2025-26 के दौरान, लगभग 47.59 लाख पानी के नमूनों का परीक्षण किया गया है। वहीं, 2024-25 में लगभग 93.84 लाख पानी के नमूनों का परीक्षण किया गया था।
प्रयोगशालाओं में पुष्टिकरण और सुधार
फील्ड टेस्ट किट से मिले नतीजे सिर्फ शुरुआती जाँच के लिए होते हैं। अगर इन जाँचों में पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं पाई जाती है, तो पानी के नमूने जाँच के लिए पास की पेयजल परीक्षण प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं। राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर बनी प्रयोगशालाओं का नेटवर्क इन नतीजों की पुष्टि करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पानी की गुणवत्ता की जाँच सही तरीके से हो रही है।
निवारक और उपचारात्मक उपाय
राज्यों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे प्रयोगशाला परीक्षण के नतीजों का विश्लेषण करें। इससे पानी में प्रदूषण के पैटर्न का पता चलता है, स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के कारणों की पहचान होती है और समस्या वाले स्रोतों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके आधार पर, पानी को साफ करने और भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों, इसके लिए योजनाएं बनाई जाती हैं।
मिशन के दिशा-निर्देश और अनुवर्ती कार्रवाई
जल जीवन मिशन के तहत जारी किए गए दिशानिर्देशों में नियमित रूप से फील्ड टेस्ट किट से पानी की जाँच करने का प्रावधान है। अगर टेस्ट किट से पानी में कोई खराबी पाई जाती है, तो राज्यों को प्रयोगशाला में इसकी पुष्टि करानी होती है। इसके बाद, पानी को कीटाणुरहित करना, स्रोत का उपचार करना या सुरक्षित पानी के वैकल्पिक स्रोत की व्यवस्था करना जैसे सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं। राज्यों को यह भी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि नियमित प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और टेस्ट किट परीक्षण का सही रिकॉर्ड रखा जाए।