Jan Vishwas Bill: 1000 अपराध खत्म....DL रिन्यू में देरी और चक्का जाम पर अब नहीं होगी जेल! समझें पूरा बिल
जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2026 को संसद ने पारित कर दिया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य जीवन जीने और व्यापार करने को आसान बनाना है। यह विधेयक विश्वास पर आधारित शासन को मजबूत करता है, छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और जुर्माने व दंड को तर्कसंगत बनाता है। इसमें 23 मंत्रालयों के 79 केंद्रीय कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव है, जिसमें 717 प्रावधान व्यापार सुगमता के लिए और 67 प्रावधान जीवन यापन सुगमता के लिए अपराध की श्रेणी से हटाए जा रहे हैं।
पीएम मोदी और अमित शाह ने बताया ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक को पारित होने को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विश्वास पर आधारित ढांचे को मजबूत करता है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसे जीवन और व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक कई कानूनी प्रावधानों को कम करके सभी के लिए जीवन को आसान और व्यापार को सरल बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के सपने को साकार करता है।
784 प्रावधानों में बदलाव
लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक कुछ कानूनों में संशोधन करके जीवन यापन और व्यापार सुगमता के लिए विश्वास पर आधारित शासन को और मजबूत करेगा। इसका लक्ष्य कुछ अपराधों को गंभीर श्रेणी से हटाकर उन्हें तर्कसंगत बनाना है। यह विधेयक छोटे अपराधों के लिए जुर्माने और दंड को संशोधित करेगा। कुल 784 प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित है, जिनमें से 717 व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए और 67 जीवन यापन में सुगमता लाने के लिए अपराध की श्रेणी से बाहर किए जा रहे हैं।
अपराध के दायरे से बाहर
देश की संसद से जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल पारित हो गया है और गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही यह कानून की शक्ल ले लेगा। इस बिल के कानून बन जाने के बाद मौजूदा कानून के कई अपराध, अपराध के दायरे से बाहर हो जाएंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि इससे जनता की ईज ऑफ लिविंग बेहतर होगी और जीवनस्तर में बदलाव आएगा। उन्होंने इसे 'राम राज्य' की अवधारणा से जोड़ते हुए उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। जन विश्वास बिल के जरिये 80 केंद्रीय कानून संशोधित किए गए हैं, जिसके तहत करीब एक हजार अपराध, अपराध के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं। कुछ अपराधों में सजा का प्रावधान हटाकर जुर्माना जोड़ा गया है, वहीं कुछ अपराधों में अब केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा।
● ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद इसके रिन्यू कराने में मामूली देरी अब अपराध के दायरे से बाहर होगी। ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद 30 दिन तक उसे वैलिड माना जाएगा। डीएल रिन्यू कराने पर उसकी वैधता अवधि की गणना रिन्यू कराने की तारीख से की जाएगी, न कि वैधता समाप्त होने की तारीख से।
● राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत राजमार्ग जाम करने या ऐसी स्थिति उत्पन्न करने, जिससे आवागमन असुरक्षित हो, पर पांच साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों सजा का प्रावधान था। जन विश्वास बिल में इसके लिए जेल का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। राजमार्ग जाम करने के लिए अब केवल नागरिक दंड, यानी जुर्माने का प्रावधान होगा।
● आग का झूठा अलार्म देना अब अपराध नहीं होगा। जन विश्वास बिल में इसे अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया है। मौजूदा कानून के तहत यह अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सजा का प्रावधान है।
● जन्म-मृत्यु की सूचना न देना भी मौजूदा समय में कानून अपराध है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ही बात करें तो दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना अपराध है और इसके लिए सजा का भी प्रावधान है। जन विश्वास बिल के जरिये इसे भी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत रजिस्टर में गलत प्रविष्टि भी अब अपराध के दायरे में नहीं आएगी।
● आवारा मवेशियों से फसल को नुकसान पहुंचाना दंडात्मक अपराध है। जन विश्वास बिल में कैटल ट्रेसपास एक्ट, 1971 को अपडेट कर सजा के प्रावधान को नागरिक दंड यानी जुर्माने में बदलने की बात है। इस कानून के जरिये पशुओं को छोड़ने या आवारा छोड़ने पर भी केवल जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।
● बिजली अधिनियम, 2003 के मुताबिक विभाग के आदेश-निर्देश का पालन नहीं करने पर तीन महीने की जेल या जुर्माने का प्रावधान था। जन विश्वास बिल के कानून बन जाने के बाद इस अधिनियम से जुड़े अपराध पर जेल का प्रावधान खत्म हो जाएगा। ऐसे मामलों में केवल जुर्माने का प्रावधान रह जाएगा।
● ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियमों के खिलाफ कॉस्मेटिक्स का निर्माण करना, बिक्री करना दंडात्मक अपराध है। इसके लिए एक साल जेल, 20 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजा हो सकती थी। जन विश्वास बिल में जेल की सजा का प्रावधान खत्म कर केवल जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
● जन विश्वास बिल में कुछ कानूनों के उल्लंघन पर सुधार का मौका देने की बात है। अप्रेंटिस अधिनियम के तहत जानकारी देने से इनकार करना या प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे व्यक्ति से ओवरटाइम काम कराना मौजूदा कानून के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे अपराध में पहली बार उल्लंघन पर सलाह, दूसरी बार उल्लंघन पर चेतावनी और उसके बाद भी यही अपराध किए जाने की स्थिति में जुर्माने का प्रावधान जन विश्वास बिल में किया गया है।
● जन विश्वास बिल में यह प्रावधान किया गया है कि जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के अनुपात में तय की जाएगी। इसमें यह प्रावधान भी किया गया है कि विधेयक में निर्धारित जुर्माने और दंड हर तीन साल में न्यूनतम राशि के 10 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ेंगे।