Kharif Crops : किसानों बहन-भाई ध्यान दें, खरीफ की तैयारी होगी आसान, AI बताएगा कब आएगा मॉनसून

Gaon Connection | Mar 18, 2026, 12:36 IST
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सरकार ने हाल ही में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जरिए मॉनसून की भविष्यवाणी के लिए एक नई प्रणाली को लागू किया है। यह प्रोजेक्ट भारत के 13 राज्यों के कुछ इलाकों में खरीफ 2025 के लिए चलाया गया था। इसका मकसद किसानों को यह बताना था कि मॉनसून कब आएगा, ताकि वे अपनी बुवाई की तारीख तय कर सकें, जो सफल रहा। अब इस प्रोजेक्ट को देश भर में लागू किया जा रहा है।
AI के सहारे किसान तय करेंगे बुवाई का सही समय

सरकार ने किसानों की मदद के लिए एक नई तकनीक शुरू की है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके यह पता लगाया जाता है कि मॉनसून कब आएगा। इसका मकसद यह है कि किसान सही समय पर खरीफ फसलों की बुवाई कर सकें और नुकसान से बचें। भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान जैसे संस्थानों के सहयोग से तैयार यह सिस्टम पुराने मौसम डेटा के आधार पर सटीक अनुमान देता है, जिससे किसानों को पहले से योजना बनाने में आसानी होती है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में दी।



खरीफ की बुवाई से पहले लें तकनीकी सहायता

सरकार ने किसानों को खरीफ की फसल की बुवाई के बारे में सही समय पर फैसले लेने में मदद करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। यह एक पायलट प्रोजेक्ट है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके स्थानीय मॉनसून का पूर्वानुमान लगाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट भारत के 13 राज्यों के कुछ इलाकों में खरीफ 2025 के लिए चलाया गया था। इसका मकसद किसानों को यह बताना था कि मॉनसून कब आएगा, ताकि वे अपनी बुवाई की तारीख तय कर सकें, जो सफल रहा। अब इस प्रोजेक्ट को देश भर में लागू किया जा रहा है।



मॉनसून का लगेगा सही जानकारी

इस AI-आधारित प्रोजेक्ट में एक खास तरह के ओपन-सोर्स मॉडल का इस्तेमाल किया गया। इसमें 125 सालों के बारिश से जुड़े पुराने डेटा को शामिल किया गया था। यह डेटा न्यूरलजीसीएम, यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरकास्टिंग सिस्टम (AIFS) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) से लिया गया था। इस मॉडल से सिर्फ यह पता लगाया गया कि मॉनसून स्थानीय स्तर पर कब दस्तक देगा।



SMS के जरिए भोजी जाती है जानकारी

सरकार की तरफ से बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत, 13 राज्यों के करीब 3,88,45,214 किसानों को SMS भेजे गए। ये SMS एम-किसान पोर्टल के जरिए हिंदी, उड़िया, मराठी, बांग्ला और पंजाबी जैसी पाँच क्षेत्रीय भाषाओं में भेजे गए थे। इन SMS में मॉनसून के स्थानीय आगमन के बारे में जानकारी दी गई थी।



SMS भेजने के बाद, मध्य प्रदेश और बिहार में किसानों से फोन पर बात करके उनका फीडबैक लिया गया। इस फीडबैक से पता चला कि 31% से लेकर 52% तक किसानों ने मॉनसून के पूर्वानुमान के आधार पर अपनी बुवाई की योजना बदली। उन्होंने अपनी रोपण की तारीखें बदलीं, फसल का चुनाव बदला और निवेश के फैसले भी बदले।



राष्ट्रीय सत्र पर होगा लागू

इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए, सरकार अब इस AI क्षमता को एक राष्ट्रीय प्रणाली में लागू करने का फैसला कर चुकी है। इसके लिए भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) मिलकर काम करेंगे। IITM के मॉडल ने स्थानीय स्तर पर बेहतर पूर्वानुमान लगाने में अपनी काबिलियत दिखाई है, इसलिए उन्हें 2026 से AI ढांचे में शामिल किया जाएगा।

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