Krishi Mela: जलवायु सहिष्णु खेती, फसल विविधीकरण और आधुनिक तकनीक से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
रायसेन में आयोजित कृषि मेले में आज देशभर से कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, उन्नतशील किसान और मंत्रीगण एकत्र हुए, जहाँ खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाने के विभिन्न पहलुओं पर गहन मंथन हुआ। इस मेले का मूल उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि जिले और ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम और कुशल उपयोग करते हुए किसानों की समग्र आय में वृद्धि करना रहा। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हर क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए एक ही मॉडल पूरे राज्य या देश पर लागू नहीं किया जा सकता। इसी कारण ब्लॉक स्तर पर माइक्रो प्लानिंग और जरूरत के अनुसार कृषि रोडमैप तैयार करने की दिशा में पहल की जा रही है।
कुशल प्रबंधन ही खेती की सफलता का आधार
मेले में जल संरक्षण और जल के कुशल प्रबंधन को खेती की सफलता का आधार बताया गया। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरिगेशन तकनीकों को अपनाने, वर्षा जल संचयन करने और कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी गई। “प्रति बूंद अधिक फसल” के सिद्धांत को व्यवहार में उतारने पर जोर देते हुए बताया गया कि सीमित जल संसाधनों के बावजूद उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है, यदि वैज्ञानिक पद्धतियों का सही तरीके से उपयोग किया जाए।
जलवायु परिवर्तन खेती की सबसे बड़ी चुनौती
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन को खेती के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने जलवायु सहिष्णु खेती (क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर) को बढ़ावा देने पर जोर दिया, जिसमें ऐसी फसल किस्मों, तकनीकों और प्रबंधन प्रणालियों को अपनाया जाता है जो सूखा, अधिक वर्षा या तापमान में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियों में भी टिक सकें। इसके लिए उन्नत बीज, मौसम आधारित सलाह, फसल बीमा और डिजिटल तकनीकों के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम पर हो जोर
कार्यक्रम के दौरान फसल विविधीकरण को किसानों की आय बढ़ाने का अहम जरिया बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल धान, गेहूं और सोयाबीन पर निर्भर रहने से जोखिम बढ़ता है, जबकि बागवानी, दलहन, तिलहन, औषधीय फसलें और पशुपालन जैसी गतिविधियों को शामिल कर किसान अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकते हैं। इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (एकीकृत कृषि प्रणाली) के माध्यम से फसल, पशुपालन, मछली पालन और बागवानी को जोड़कर कम भूमि में भी अधिक लाभ प्राप्त करने के मॉडल प्रस्तुत किए गए।
प्राथमिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान दें किसान
इसके साथ ही, कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर भी विशेष जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि यदि वे अपनी उपज का प्राथमिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग करें, तो बाजार में उन्हें बेहतर कीमत मिल सकती है। इसके लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
खेती में हो आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल
मेले में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को भी प्रमुखता दी गई, जिसमें ड्रोन के जरिए फसल सर्वेक्षण, दवा छिड़काव, मिट्टी परीक्षण और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार से सीधा जुड़ाव शामिल है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए इन तकनीकों को सुलभ और किफायती बनाने पर भी चर्चा हुई।