Gaon Se: मिनिएचर पेंटिंग का माहिर एक कलाकार जिसने रंगों में किया 'समय को कैद'
राजस्थान कहानियों की धरती है, गाथाओं की धरती है, महाकाव्यों की धरती है। नायकों-नायिकाओं की धरती है और इन कहानियों को अलग अलग तरीकों से अलग अलग माध्यमों में वहाँ के कलाकारों ने सदियों से उकेरा है, सजाया है, बनाया है, चित्रित किया है। आज कहानी लाल सिंह भाटी की, जो ऐसे ही एक कलाकार है।
कला जैसे जैसे आकार में छोटी होती जाती है, उतनी मुश्किल होती जाती है। इन्हीं मुश्किल miniature painting के पारंगत है लाल सिंह भाटी। छोटी छोटी चित्रकलाएं, कहानियाँ के विराट रूप को छोटे आकार में प्रस्तुत करते हैं। लाल सिंह भाटी इस बहुमूल्य कला के संरक्षक है। उसको बचा रहे हैं।
जोधपुर, नीले रंगों में लिपटा एक शहर
हवाओं में इतिहास की खुशबू और दीवारों में सदियों से बसी कला की गूंज। इन्हीं गलियों में एक कहानी पली बढ़ी। एक ऐसे कलाकार की, जिसके brush ने समय को रंगों में कैद कर लिया। लाल सिंह भाटी। कहते हैं कुछ कहानियां इस जन्म से नहीं, पिछले जन्म से शुरू होती हैं। लाल सिंह भाटी के लिए कला भी वैसी ही थी। सिर्फ चार साल की उम्र में रंगों से उनका नाता जुड़ गया था। पिता थानेदार थे। चाहते थे कि बेटा पुलिस या फौज में जाए। लेकिन बेटे की नजर में कानून की किताब नहीं canvas था।
एक समय में नहीं मिला घरवालों का साथ
लाल सिंह भाटी बताते हैं, "तीन चार साल की age में मैंने school में board के ऊपर कुछ news के कुछ birds के flowers के animals बनाने चालू किए तो वहाँ से ही journey चालू हुई। जो करते-करते कुछ सालों मैंने श्मशान में जाकर किया। घरवालों को अच्छा नहीं लगता था। पुलिस में जाओ, आर्मी में जाओ। मेरे father थानेदार थे। फिर उनको जब उन्हें पता चला मेरे कला के प्रति लगाव के बारे में तो उन्होंने मेरे को एक अच्छा सा studio दिला दिया और बहुत cooperate किया। उन्हीं की बदौलत मैं यहाँ तक पहुंचा हूँ, मेरे माता पिता की वजह से।"
1984 में शुरू खुद की आर्ट गैलरी
जब घर में कला को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी उसको प्यास थी तो उन्होंने घर छोड़ दिया और शुरू हुआ एक कलाकार का सफ़र। उन्नीस सौ चौरासी में उन्होंने उम्मेद आर्ट Gallery की नींव रखी। लाल सिंह भाटी बताते हैं, "दिल में कलाकार और दिमाग में कल्पना हो तब ही कोई कलाकृति बनती है। जो बच्चा समर्पित है, जिसके संस्कार अच्छे हैं और जो कुछ करना चाहता है अपने देश के लिए, अपनी संस्कृति के लिए वो तो art सीखता ही है।"
आज बनाते हैं सोने की कलाकारी
लाल सिंह भाटी मारवाड़ miniature painting के पारंगत कलाकार हैं। उनके हाथों से निकली मुनब्बतकारी यानी सोने की embossed कलाकारी लकड़ी और चमड़े पर जिंदा हो उठती है। traditional art हो, modern, abstract या restoration उनके लिए हर सतह एक नई कहानी है। लकड़ी, दीवार, कपड़ा, धातु या यहाँ तक कि अपराधियों के चेहरे sketch करना उनके लिए पूरी प्रकृति ही उनका canvas है। कला के बारे में बात करते हुए लाल सिंह भाटी बताते हैं, "Artist के लिए कोई बंदिश नहीं है। बंदिश सारी सरहदों की है। पूरी दुनिया उसके लिए पूरी nature प्रकृति उसके लिए प्रत्येक प्रकृति के हर रंग, हर रस में वो रमा हुआ है।"
जीत चुके हैं कई अवार्ड्स
आज के समय में लाल सिंह भाटी की कला के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार, राज्य सम्मान, UNESCO की मुहर मिल चुकी है। उनके काम को भारत ही नहीं पूरी दुनिया ने सराहा है। गुरु शिष्य परंपरा के सच्चे वाहक आज वे अपनी gallery में सैकड़ों युवाओं को miniature painting, modern art और पारंपरिक शिल्प सिखा रहे हैं। वो कहते हैं, "मैं जोधपुर शैली में भी काम करता हूं, बूंदी में भी करता हूं, पहाड़ी में मैं सारी शैलियों में काम करता हूं और बच्चों को सिखाता हूं। मैंने तीस बत्तीस हजार बच्चों को अभी तक प्रशिक्षण दिया है चित्रकला का और उसमें से कई लोग national state awardee हैं। कई gold medalist हैं।"
अगली पीढ़ी भी सीख रही है Miniature Painting
लाल सिंह भाटी की आर्ट गैलरी में जो बच्चे कला सीखने आते हैं वो आर्ट गैलरी को महसूस करते हुए बताते हैं कि यहाँ एकदम Feel like home जैसा महसूस होता है। मतलब हमारा कभी कभी ऐसा मन होता है कि हमारा घर जाने का मन भी नहीं होता। आज इसे complete करना है तो कर लो तो ऐसा लगता है कि नहीं नहीं जाएं तो अच्छा और सिखाने का तरीका इतना अच्छा है ना कि मतलब पता ही नहीं चला इतने साल निकल गए।
राजस्थान की परंपरा को कर रहे हैं दस्तावेज
हर stroke में वो एक परंपरा सौंपते हैं और हर रंग में एक विरासत। अब तक वे पंद्रह हजार से ज्यादा paintings बना चुके हैं। हर painting एक दस्तावेज है। राजस्थान की कलात्मक आत्मा का। यहाँ पारंपरिक रंगों और सोने की चमक में आधुनिकता की नई लकीरें जुड़ती जाती हैं। अपनी कला के बार में भाटी बताते हैं, मेरे को जो अच्छा लगा वो किया और मेरे को अच्छा क्यों लगा कि मेरे ग्रह नक्षत्र किस वक्त किस चाल में चल रहे हैं तो वो मेरे को उस जगह आकर्षित करते हैं, प्रेरित करते हैं, उसका समूह मेरे में पैदा करते हैं। मैं वो चीजें वो subject बनाने लग जाता हूँ।
लाल सिंह भाटी एक नाम नहीं एक युग है। उन्होंने जोधपुर की हवाओं में रंगों की ऐसी महक घोली है जो पीढ़ियों तक महसूस की जाएगी। उनके brush की हर रेखा कहती है कला अमर है। उसे नई जिंदगी जीने वाला चाहिए गांव से।