Button Mushroom Farming: उत्तर प्रदेश के किसान अटल बिहारी वाजपेयी से जानें बटन मशरूम उगाने का पूरा गणित

Preeti Nahar | Feb 05, 2026, 16:01 IST
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बटन मशरूम उगाने का सही तरीका
उत्तर प्रदेश के मोहान में एक किसान ने अटल बिहारी वाजपेयी मशरूम की खेती में महारत हासिल कर ली है। उन्होंने साझा किया कि कैसे साधारण झोपड़ियों में बटन मशरूम की प्रभावी खेती की जा सकती है। इस विधि में भूसा तैयार करने से लेकर स्पानिंग और केसिंग की प्रक्रियाओं को समझाने में उन्होंने बहुत प्रयास किया है।

पिछले कुछ सालों से मशरूम की खेती शुरू करने का कल्चर काफी बढ़ गया है। इंटरनेट पर अनगिनत वीडियोज मिल जाएंगी मशरूम की खेती के बारे में। लेकिन असल तरीका, जगह का चुनाव, खाद की क्वालिटी के साथ-साथ तापमान और मार्किट की समझ के बारे लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पाती। अधुरी जानकारी लेकर कुछ लोग मशरूम की खेती शुरू तो कर देते हैं लेकिन या तो उनकी फसल खराब हो जाती है या फिर सही मार्किट की जानकारी न होने से फसल का सही दाम मिल नहीं पाता। इसी गैप को देखते हुए गाँव कनेक्शन की टीम पहुँची उत्तर-प्रदेश के मोहान ज़िले में, मशरूम की खेती का पूरा गणित समझने।



बटन मशरूम की खेती के सैटअप का खर्चा

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बटन मशरूम का सैटअप

उत्तर प्रदेश के मोहान में किसान अटल बिहारी वाजपेयी 10 साल से मशरूम की खेती कर रहे हैं। किसान अटल बिहारी वाजपेयी झोपड़ी/Hut में बटन मशरूम की खेती करते हैं। इनके पास कुल 10 ऐसी झोपड़ियाँ हैं जिनमें वो बटन मशरूम उगाते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने बताया कि वे पहले नौकरी करते थे, लेकिन मशरूम की खेती में रुचि होने के कारण उन्होंने यह काम शुरू किया। उन्होंने बताया, "एक हट बनाने में मान के चलिए, जो बनती है ये 55/20 की है और इसमें 4 हट हमने कंबाइंड कर रखी है। टोटल तो 1- 55/20 की हट में लगभग लगभग 70 से 75000 का खर्चा आता है।"



कैसे तैयार करें बटन मशरूम के लिए भूसा?

बटन मशरूम का कम्पोस्ट

मशरूम की खेती के लिए जमीन का चयन करना बेहद जरूरी होता है। जमीन के बाद भूसा तैयार करना होता है। उसके बाद कच्चा माल तैयार करना होता है। कच्चे माल में होता है भूसा, गोबर, चिकन बीट, चोकर और जिप्सम। इन सबको इकट्ठा करना पहला स्टैप है। उसके बाद भूसा तैयार किया जाता है। भूसे को 48 घंटे भिगोकर, फिर 2.5 फुट की ऊंचाई में ढेर बनाकर 20 दिन में कंपोस्ट तैयार किया जाता है। अगर 30 क्विंटल भूसे से 12 क्विंटल मशरूम निकल जाए तो मुनाफा हो सकता है।



भूसा तैयार करने सा सही तरीका

भूसा तैयार करने का सही तरीका

भूसा सूखा, साफ और फफूंद-रहित होना चाहिए। सबसे पहले भूसे को भिगोना होता है। भूसे को 48 घंटे (2 दिन) तक पानी में अच्छी तरह भिगो दें। ध्यान रखें हर तिनका पूरी तरह गीला हो। 48 घंटे बाद भूसे का पानी निकालना होता है। सही तरीके से भीगा भूसा कम्पोस्ट की नींव होता है। इसके बाद ढेर बनाना होता है जिसमें गोबर, चिकन बीट, चोकर अच्छे से मिला होना चाहिए। बीच-बीच में भूसा पलटते रहें। कुल 20 दिन में कम्पोस्ट तैयार होता है। इस दौरान 5 बार भूसे को पलटना जरूरी है।



कंपोस्ट तैयार होने पर कैसे उगेगा मशरूम?

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मशरूम की खेती में Span का खास ख्याल

कंपोस्ट तैयार होने के बाद उसमें स्पान (बीज) मिलाया जाता है। स्पानिंग एक तरह का फरमैंटि़ड (सड़ा हुआ) गेहूँ होता है। जिसे कंपोस्ट में बोया या मिलाया जाता है। स्पानिंग के बाद 15 दिन में स्लाइम रन करती है, जो कंपोस्ट को पूरी तरह से कवर कर लेती है। यानी जब कंपोस्ट में फंगस फैल जाती है, तब केसिंग की जाती है। केसिंग में गोबर, राख और फार्मिलिन मिलाया जाता है, जो स्लाइम के ऊपर बिछा देनी होती है। इस प्रोसेस के 20 दिन बाद मशरूम मिलना शुरू हो जाता है। स्पान रन करने के बाद, केसिंग के लिए गोबर, राख और फार्मिलिन का मिश्रण इस्तेमाल होता है। केसिंग के करीब 20 दिन बाद मशरूम मिलना शुरू हो जाता है।



बटन मशरूम की खेती के लिए कैसा रखें तापमान?

बटन मशरूम तुड़ाई के लिए तैयार

मशरूम की अच्छी फसल के लिए के लिए 15-20 डिग्री तापमान और अच्छी ह्यूमिडिटी जरूरी है। दिन में 30 डिग्री तापमान तक भी अच्छी फसल मिल सकती है, लेकिन 35-40 डिग्री होने पर मशरूम की ग्रोथ रुक जाती है। किसान बताते हैं कि दिन में अगर तापमान 30 डिग्री तक भी रहे और रात में 20 डिग्री हो, तो भी अच्छी फसल मिल जाती है। लेकिन अगर दिन में तापमान 35-40 डिग्री तक पहुंच जाए, तो मशरूम की ग्रोथ रुक जाती है। तापमान के हिसाब से किसान मार्च तक मशरूम की खेती करते हैं, हालांकि कभी-कभी फरवरी में तापमान अधिक हो जाए तो यह बंद भी करना पड़ जाती है।



अब आती है मार्किट की बारी

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मार्किट के लिए तैयार

ये स्टैप समझना बहुत जरूरी है। बात करें लखनऊ की तो मान लिजिए अगर किसान रात में 8 बजे तक कटाई कर लेता है तो अगले दिन 4-5 बजे तक लखनऊ की दुबगा और आलमबाग मंडी में माल पहुंचाना होता है। कटाई के बाद मशरूम को मार्केट तक पहुंचाने में भी चुनौतियां आती हैं। जब तापमान 15 डिग्री से नीचे रहता है, तो किसान सुबह 5-6 बजे से कटाई शुरू करते हैं और 4-5 बजे तक मंडी पहुंचा देते हैं। लेकिन अगर तापमान बढ़ता है, तो कटाई देर से शुरू करनी पड़ती है ताकि मशरूम खराब न हो। किसी भी फसल का रेट मंडी में उसकी मांग और आपूर्ति पर निर्भर करते हैं।

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