Mango Farming: बदलता मौसम किसानों के लिए बड़ी चुनौती, मंजर झुलसा रोग (ब्लॉसम ब्लाइट) से तबाह आम के बाग

Gaon Connection | Mar 20, 2026, 11:19 IST
इस वर्ष मंजर झुलसा रोग ने आम के उत्पादन पर गंभीर असर डाला है, लेकिन अभी भी जिन बागों में मंजर बचे हैं, वहाँ सही समय पर उठाए गए कदम नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में जागरूकता, वैज्ञानिक सलाह और समय पर कार्रवाई ही किसानों को नुकसान से बचा सकती है।
आम की खेती पर मौसम की मार

इस वर्ष मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने आम उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। असामान्य वर्षा, अधिक नमी, लंबे समय तक बादल छाए रहना और मध्यम तापमान जैसी परिस्थितियों ने आम के बागों में मंजर झुलसा यानी ब्लॉसम ब्लाइट रोग को तेजी से फैलने का मौका दिया। कई क्षेत्रों में हालात इतने खराब हो गए कि पेड़ों पर लगे मंजर लगभग पूरी तरह झुलस गए, जिससे फल बनने की संभावना खत्म हो गई। इस स्थिति ने खासतौर पर उन किसानों को ज्यादा प्रभावित किया है, जिनकी आजीविका आम की फसल पर निर्भर है।



क्या है ब्लॉसम ब्लाइट (मंजर झुलसा) रोग?

ब्लॉसम ब्लाइट (मंजर झुलसा) एक फफूंद जनित रोग है, जो विशेष रूप से फूल आने के समय सक्रिय होता है। इस साल जिन इलाकों में फूल आने के दौरान नमी अधिक रही, हल्की बारिश होती रही और धूप कम निकली, वहाँ यह रोग तेजी से फैलता हुआ दिखाई दिया। शुरुआत में मंजर के छोटे-छोटे फूलों पर भूरे या काले धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे पुष्पक्रम को प्रभावित कर देते हैं। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, पूरा मंजर सूखकर काला पड़ जाता है और कई बार झड़ भी जाता है। इस स्थिति में फल बनने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।



उचित प्रबंधन है जरूरी

हालांकि कई बागों में नुकसान बहुत अधिक हो चुका है, फिर भी कुछ स्थानों पर मंजर आंशिक रूप से सुरक्षित हैं और फल बनने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। ऐसे बागों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसान अभी सतर्क होकर उचित प्रबंधन अपनाएं, तो शेष बचे मंजरों को बचाया जा सकता है और उत्पादन में होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।



शेष बचे मंजरों को बचाने के उपाय

डॉ. एस. के. सिंह (विभागाध्यक्ष, पौध रोग एवं सूत्रकृमि विभाग, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय) के अनुसार, इस समय घबराने की बजाय वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाना सबसे जरूरी है। किसानों को चाहिए कि वे बागों में अनावश्यक नमी जमा न होने दें, जल निकासी की उचित व्यवस्था करें और घने पेड़ों में हवा के आवागमन को सुनिश्चित करें। इसके अलावा संक्रमित मंजर और टहनियों को पहचानकर समय पर हटाना भी रोग के फैलाव को रोकने में मददगार हो सकता है।



फफूंदनाशकों का सही समय पर छिड़काव

इस विषय पर किसानों को जागरूक करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा लगातार जानकारी साझा की जा रही है। 8 मार्च से अब तक इस रोग की पहचान, इसके फैलने के कारण, मौसम का प्रभाव, फफूंदनाशकों के चयन और छिड़काव की सही तकनीक जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसान समय रहते सही निर्णय ले सकें।



रोग नियंत्रण के लिए अनुशंसित और लेबल क्लेम फफूंदनाशकों का सही समय पर छिड़काव करना बेहद जरूरी है। छिड़काव की सही विधि और समय का पालन करने से संक्रमण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही समेकित रोग प्रबंधन (Integrated Disease Management) अपनाना भी दीर्घकालिक समाधान के रूप में कारगर साबित हो सकता है।

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