दस फ़रवरी से घर-घर पहुँचेगी दवा: फ़ाइलेरिया से लड़ाई में भारत का बड़ा कदम
भारत सरकार ने 10 फ़रवरी से फ़ाइलेरिया (हाथीपाँव) जैसी गंभीर लेकिन पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी के खिलाफ मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान शुरू किया है। यह अभियान देश के 12 राज्यों के 124 फ़ाइलेरिया-प्रभावित जिलों में चलाया जा रहा है, जहाँ स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर मुफ़्त और सुरक्षित दवाएँ खिलाएँगे। फ़ाइलेरिया मच्छर के काटने से फैलने वाला परजीवी रोग है, जो समय पर रोका न जाए तो आजीवन सूजन, दर्द और विकलांगता का कारण बन सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया में फ़ाइलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित देशों में है जहाँ करोड़ों लोग जोखिम में और लाखों लोग बीमारी के दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। MDA का उद्देश्य इलाज नहीं, बल्कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हर पात्र व्यक्ति दवा ले, तो भारत 2027 तक फ़ाइलेरिया-मुक्त बनने के लक्ष्य के बेहद करीब पहुँच सकता है।
मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA): कैसे काम करता है यह अभियान?
मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी सामूहिक दवा वितरण है जिसके तहत सरकार साल में एक तय अवधि के दौरान फ़ाइलेरिया-प्रभावित क्षेत्रों में हर पात्र व्यक्ति को एक साथ दवा देती है चाहे उसे लक्षण हों या न हों। इसका मकसद शरीर में मौजूद परजीवी को खत्म कर मच्छर के जरिए आगे फैलने की कड़ी तोड़ना है।
इस अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर दवाएँ देते हैं और अपने सामने सेवन करवाते हैं, ताकि कवरेज अधिकतम हो। दवाएँ मुफ़्त, WHO-समर्थित और वर्षों से सुरक्षित रूप से इस्तेमाल में हैं। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण ढाँचे का अहम हिस्सा है।
फ़ाइलेरिया क्या है और यह कैसे फैलता है?
फ़ाइलेरिया एक परजीवी रोग है, जो मुख्यतः मच्छर के काटने से फैलता है। जब मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो परजीवी उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और बाद में दूसरे व्यक्ति तक पहुँचते हैं। शुरुआती चरण में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन वर्षों तक संक्रमण बना रहे तो यह लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुँचाता है।जिसके कारण हाथ-पैरों में असामान्य सूजन (हाथीपाँव), हाइड्रोसील और बार-बार होने वाले संक्रमण जैसी समस्याएँ सामने आती हैं।
आधिकारिक आंकड़े क्या कहते हैं?
भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फ़ाइलेरिया देश की सबसे बड़ी वेक्टर जनित सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक रहा है। वर्तमान में भारत के लगभग 345 जिले ऐसे माने गए हैं जहाँ फ़ाइलेरिया का संक्रमण स्थानीय स्तर पर पाया गया या पाया जाता रहा है। ये जिले 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।
इन क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को देखें तो करीब 74 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जिन्हें फ़ाइलेरिया के लिए जोखिम क्षेत्र माना गया है। यही वजह है कि सरकार इसे केवल बीमारी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में देखती है। आधिकारिक रिकॉर्ड यह भी बताते हैं कि फ़ाइलेरिया का सबसे बड़ा असर इसकी दीर्घकालिक जटिलताओं के रूप में सामने आता है। देश में लगभग 6.2 लाख लोग लिम्फैडेमा यानी हाथ-पैरों की स्थायी सूजन से पीड़ित हैं, जबकि करीब 1.21 लाख लोगों में हाइड्रोसील जैसी गंभीर स्थिति दर्ज की गई है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में जिले फ़ाइलेरिया-एंडेमिक रहे हैं। अकेले इन राज्यों में देश के अधिकांश जोखिमग्रस्त जिले और आबादी आती है। यही कारण है कि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियानों का सबसे बड़ा फोकस इन्हीं राज्यों पर रहा है। दुनिया में फ़ाइलेरिया के जोखिम में रहने वाली कुल आबादी का लगभग 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत में पाया जाता है। इसी वजह से भारत सरकार ने फ़ाइलेरिया उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता वाले स्वास्थ्य लक्ष्यों में शामिल किया है और 2027 तक इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है।
दवाएँ कौन-सी हैं और क्या ये सुरक्षित हैं?
MDA के दौरान आमतौर पर Diethylcarbamazine (DEC) और Albendazole दी जाती है। ये दवाएँ परजीवी को खत्म करती हैं और संक्रमण को आगे बढ़ने से रोकती हैं। सरकारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक दवाएँ सुरक्षित हैं लेकिन कुछ लोगों में हल्का बुखार, चक्कर या मतली जैसे सिम्टम्पस हो सकते हैं, जो शरीर में परजीवी के नष्ट होने की प्रतिक्रिया के कारण होते हैं यह सामान्य है और गंभीर नहीं माना जाता।
किसे दवा लेनी चाहिए और किसे नहीं?
MDA के दौरान प्रभावित जिलों में रहने वाला हर पात्र व्यक्ति दवा ले। हालाँकि, गर्भवती महिलाएँ, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति दवा से पहले स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लेते हैं यह नियम सुरक्षा के लिए है। सरकार MDA के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण, स्वच्छता, जलभराव रोकने, और जागरूकता पर भी जोर देती है। घरों के आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी का उपयोग और साफ-सफाई ये सभी उपाय संक्रमण के जोखिम को और कम करते हैं।
भारत ने 2027 तक फ़ाइलेरिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए MDA की उच्च कवरेज, समुदाय की भागीदारी और सतत निगरानी जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हर व्यक्ति दवा लेता है, तो मच्छर को परजीवी नहीं मिलेगा और बीमारी अपने-आप खत्म हो जाएगी।