Farmer ID: इस तारीख से किसान ID और किसान रजिस्ट्री के आधार पर ही मिलेगी खाद, 15 अप्रैल से पहले बनवा ले ID

Gaon Connection | Apr 12, 2026, 13:53 IST
उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एक नई चुनौती सामने आ रही है। अब एमएसपी पर फसल बेचना और उर्वरक खरीदना केवल किसान आईडी के जरिए ही संभव होगा। यह बदलाव न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अनिवार्य होगा, बल्कि इससे बिचौलियों पर लगाम लगेगी और सब्सिडी के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी।
KISAN ID बनाने की अंतिम तारीख

उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब किसान आईडी के बिना न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेच पाएंगे और न ही खाद खरीद पाएंगे। यह नई व्यवस्था सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी ज़रूरी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य कृषि व्यवस्था, सरकारी खरीद और सब्सिडी वितरण में सुधार लाना है। यह काम तेज़ी से चल रहा है।



किसान आईडी के बिना सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने निर्देश जारी किए हैं कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ केवल किसान आईडी वाले किसानों को ही मिलेगा। सरकार का लक्ष्य किसान आईडी को एमएसपी खरीद से जोड़कर बिचौलियों और फर्जी एंट्री को पूरी तरह खत्म करना है। इससे असली किसानों की पहचान हो सकेगी और खरीद के आंकड़ों की तुरंत ट्रैकिंग हो पाएगी, जिससे फर्जी लाभार्थियों पर लगाम लगेगी।



खाद मिलने का तरीका भी बदलेगा

अभी तक कृषि और सहकारिता विभाग पीओएस मशीनों से किसानों को खाद देता है, जो IFMS पोर्टल से जुड़ी होती हैं। लेकिन, मई महीने से यह तरीका बदल जाएगा। अब किसानों को खाद केवल उनकी किसान आईडी और किसान रजिस्ट्री के आधार पर ही मिलेगी। इसके लिए IFMS पोर्टल में ज़रूरी बदलाव किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि खाद वितरण अब पहचान आधारित होगा।



कालाबाजारी पर लगेगी रोक

इस नई व्यवस्था से सब्सिडी वाली खाद की कालाबाजारी और हेराफेरी रुकेगी। साथ ही, खाद की मांग और सप्लाई का सही अनुमान भी लगाया जा सकेगा। यह किसानों के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता आएगी।



विशेष अभियान चलाकर बनेंगी किसान आईडी

एक सरकारी आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश के लगभग 75 फीसदी किसानों को किसान आईडी मिल चुकी है। बाकी किसानों को जोड़ने के लिए 6 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच एक विशेष 10 दिवसीय अभियान चलाया जा रहा है। कृषि विभाग 1 मई तक लाभार्थियों की पहचान का काम पूरा कर लेगा।



डिजिटल आईडी से जुड़ेगी जमीन और फसल का रिकॉर्ड

अधिकारियों ने बताया कि यह नई डिजिटल आईडी कोई साधारण पहचान पत्र नहीं है। इस नई प्रणाली में किसान की डिजिटल आईडी सीधे उनके जमीन के रिकॉर्ड, बोई गई फसल के विवरण और उनके आधार कार्ड से जुड़ी होगी। इससे पूरी कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।



यह नई प्रणाली किसानों को मज़बूत बनाने और कृषि क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। किसान आईडी के ज़रिए, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकारी योजनाओं और लाभों का पैसा सीधे उन किसानों तक पहुंचे जो इसके हक़दार हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और यह पक्का होगा कि सब्सिडी वाली खाद और एमएसपी पर उपज की बिक्री में कोई गड़बड़ी न हो। किसानों को अपनी ज़मीन के रिकॉर्ड, बोई गई फसलों और आधार कार्ड को अपनी डिजिटल आईडी से जोड़ना होगा, जिससे एक पारदर्शी व्यवस्था बनेगी। यह कदम उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने और किसानों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

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